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मोदी सरकार की 'आयुष्मान भारत' योजना में सबसे बड़ा पेंच, लॉन्च से पहले इन्हें मनाना जरूरी

मोदी सरकार आयुष्मान भारत यानी मोदीकेयर को जल्द से जल्द लॉन्च करने की तैयारियों में जुटी है

मोदी सरकार की 'आयुष्मान भारत' योजना में सबसे बड़ा पेंच, लॉन्च से पहले इन्हें मनाना जरूरी
ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि आजादी के दिन यानी 15 अगस्त को भारत की आबादी को स्वास्थ्य बीमा का ये तोहफा मिल जाएगा

सुमन अग्रवाल, नई दिल्ली: मोदी सरकार आयुष्मान भारत यानी मोदीकेयर को जल्द से जल्द लॉन्च करने की तैयारियों में जुटी है. ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं कि आजादी के दिन यानी 15 अगस्त को भारत की आबादी को स्वास्थ्य बीमा का ये तोहफा मिल जाएगा. सब कुछ ठीक है लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो फिलहाल सामने आ रहा है वो ये है कि क्या प्राइवेट अस्पताल जो आपको ये सेवा देंगे वो इस योजना को लागू करने के लिए तैयार हैं. क्या उन्हें आयुष्मान की तय दरों पर इलाज मंजूर है. इस बात की पड़ताल का जिम्मा जी मीडिया ने उठाया.

प्राइवेट अस्पतालों के पास अब तक नहीं पहुंचा कोई प्रपोजल
जी मीडिया से बातचीत में धर्मशिला नारायणा सुपरस्पैशालिटी अस्पताल में ऑनकोलॉजी के डायरेक्टर डॉ अन्षुमन कुमार ने इन दरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस स्कीम को लागू करने से पहले सरकार को निजी अस्पतालों से बात करनी चाहिेए. अस्पतालों के अपने कई तरह के खर्चे होते हैं. अच्छी बात है सीजीएचएस की दरों से भी कम दरों में इलाज हो लेकिन ऐसा भी न हो कि इलाज की गुणवत्ता के साथ कोई खिलवाड़ हो. इसलिए मरीज, सरकार और अस्पताल तीनों के फायदे के लिए बात करना जरूरी है. हालांकि अब तक हमारे पास कोई प्रपोजल या एडवाइजरी नहीं पहुंची है.

प्राइवेट अस्पताल पर सख्ती भी कर सकती है मोदी सरकार
सरकारी सूत्रों ने साफ कह दिया है कि अधिकतर अस्पतालों को इस स्कीम को मानना पड़ेगा और पारदर्शिता अपनानी होगी. अगर वे इसमें आनाकानी करते हैं तो सरकार उन पर सख्ती बरतने से भी पीछे नहीं हटेगी. जी हां, जैसा कि आप जानते हैं प्राइवेट अस्पताल इस स्कीम को लागू और सफल बनाने में सबसे बड़ा योगदान देने वाले हैं. लेकिन, प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी से भी कोई अंजान नहीं है. ऐसे में स्कीम लागू होने के बाद भी अगर कोई अस्पताल मरीज को इस स्कीम के अंतर्गत इलाज या सेवा नहीं देता है तो क्या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई होगी, क्या ये स्कीम हर अस्पतालों के लिए अनिवार्य होगी. इन सवालों के जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि अस्पताल इस स्कीम को अपनाने से इंकार नहीं कर सकते हैं. अगर वो ऐसा करते हैं तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

स्कीम के अंतर्गत सर्जरी और जांच की दरें तय
केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बीते दिनों इस बीमा योजना के तहत सर्जरी और जांच की दरें तय की थीं. इस स्कीम के अंदर 1352 तरह की सर्जरी और जांच की दरें तय होंगी. आयुष्मान भारत योजना के तहत स्टंट के लिए 40 हजार रुपये, बायपास सर्जरी के लिए 1.10 लाख रुपये, वॉल्व बदलने पर 1.20 लाख रुपये, आर्थोस्कोपी सर्जरी के लिए 20 हजार, हिप रिप्लेसमेंट के लिए 90 हजार, नी ट्रांसप्लांट के लिए 90 हजार, संक्रमित घुटने की सर्जरी के लिए 25 हजार, सर्वाइकल सर्जरी के लिए 20 हजार और बच्चेदानी हटाने के लिए 50 रुपये तय किए गए हैं.

जुलाई के अंत में कैबिनेट से मिल सकती है मंजूरी
आयुष्मान भारत योजना के तहत हर परिवार को एक साल में 5 लाख रुपए तक का हेल्थ इंश्योरेंस दिया जाएगा. लेकिन इसके रजिस्ट्रेशन की कोई डेट अब तक तय नहीं हुई है. क्योंकि अब तक केवल 4 राज्यों ने इस पर अपनी मुहर लगाई है. बाकी राज्यों से जून के अंत तक बातचीत करके कोई फैसला लिया जाएगा. जुलाई के अंत तक स्कीम को कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है. उसके बाद ही इसकी लॉन्चिंग की डेट तय की जाएगी. इस स्कीम के तहत पहले दिन से ही इंश्योरेंस कवर मिलना शुरू हो जाएगा.

आयुष्मान भारत के सीईओ ने किया कम खर्च का दावा
जी मीडिया से बातचीत के दौरान आयुष्मान भारत के सीईओ ने दावा किया है कि इस स्कीम के तहत आने वाला खर्च राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना व सीजीएचएस में आने वाला खर्च से 15-20 फीसदी कम होगा.