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बोफोर्स रिश्वत मामले में जांच जारी रहेगी: सीबीआई

सीबीआई के प्रवक्ता नितिन वाकणकर ने कहा, “माइकल हर्षमैन नाम के व्यक्ति द्वारा किए गए कुछ खुलासों के मद्देनजर सीबीआई ने बोफोर्स मामले में आगे की जांच के लिए निचली अदालत की अनुमति मांगी है. ”

बोफोर्स रिश्वत मामले में जांच जारी रहेगी: सीबीआई
Photo: Reuters

नई दिल्ली: बोफोर्स दलाली मामले में सीबीआई की जांच जारी रहेगी. अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी. यह मामला स्वीडिश तोपों की खरीद में 64 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत से जुड़ा हुआ है. सीबीआई के प्रवक्ता नितिन वाकणकर ने कहा, “माइकल हर्षमैन नाम के व्यक्ति द्वारा किए गए कुछ खुलासों के मद्देनजर सीबीआई ने बोफोर्स मामले में आगे की जांच के लिए निचली अदालत की अनुमति मांगी है. ”

उन्होंने बताया कि आठ मई को अदालत ने कहा कि जब सीबीआई के पास अपनी इच्छा से आगे की जांच करने का स्वतंत्र अधिकार एवं शक्तियां उपलब्ध हैं, यदि ऐसा करना उसके विवेक पर निर्भर है, तो फिर भी इस तरह की अर्जी अदालत में अब भी क्यों दायर की जा रही है.

उन्होंने कहा, “कानूनी राय लेने के बाद, सीबीआई ने 16 मई 2019 को चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, राउज एवेन्यू कोर्ट नयी दिल्ली में आवेदन दायर कर कहा कि सीआरपीसी की धारा 173 (8) के तहत आगे की जांच के लिए सीबीआई को अदालत की अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य नहीं है और इस संबंध में अदालत को पूर्व सूचना देना काफी होगा.” प्रवक्ता ने कहा कि बोफोर्स मामले में जांच जारी रहेगी.

एजेंसी की ओर से यह प्रतिक्रिया तब आई है जब उसने राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील 64 करोड़ रुपये के बोफोर्स रिश्वत मामले में आगे की जांच की अनुमति मांगने की अपनी अर्जी दिल्ली की एक अदालत से वापस ले ली.

जांच एजेंसी मामले में अपील दायर करने के लिए अटार्नी जनरल से हरी झंडी मिलने के बाद मामले की आगे की जांच के लिए इजाजत पाने को लेकर हरकत में आ गई थी. दरअसल, अपील में उसने इस बात का जिक्र किया था कि प्राइवेट जासूस हर्षमैन के अक्टूबर 2017 के साक्षात्कार में यह आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने उनकी जांच को जानबूझ कर नुकसान पहुंचाया.  निजी चैनलों को दिए साक्षात्कार में अमेरिकी निजी जासूसी कंपनी फेयरफैक्स के प्रमुख हर्षमैन ने दावा किया था कि राजीव गांधी उस वक्त बहुत नाराज हो गए जब उन्होंने पाया कि स्विस बैंक में एक मोंट ब्लैंक अकाउंट है.

हर्षमैन ने डीएनए अखबार को दिए साक्षात्कार में दावा किया था कि उन्हें (हर्षमैन को) वित्त मंत्रालय ने उन्हें कांग्रेस सरकार के दौरान कथित कालाधन के बाहर जाने की जांच के काम पर लगाया था. यह मंत्रालय उस समय राजीव के चिर-प्रतिद्वंद्वी वी पी सिंह के पास था. दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (अब सेवानिवृत) न्यायमूर्ति आरएस सोढी ने 31 मई 2005 को बोफोर्स रिश्वत कांड का मामला रद्द कर दिया था.