धर्म के सारे नियमों का पालन करना जरूरी है, जानिए नवरात्रि के 9वें दिन पूजा करने की विधि

हम धर्म के नियम पालन का नहीं करते हैं और फिर धर्म को गाली देने लगते हैं.

धर्म के सारे नियमों का पालन करना जरूरी है, जानिए नवरात्रि के 9वें दिन पूजा करने की विधि
दुर्गा मां

नई दिल्ली: हमने अक्सर धर्म और आध्यात्म को केवल चमत्कार के नजरिए से देखा है. जैसे आजकल एक कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से मैसेज चल रहा है कि 'धर्म वाले छुट्टी पर हैं,विज्ञान वाले ड्यूटी पर'. दरअसल जो ऐसा कहते हैं वो धर्म को समझ ही नहीं पाए हैं और वैज्ञानिक तो वो हैं नहीं. धर्म और विज्ञान दरअसल एक ही हैं. ये भी कहा जा सकता है कि विज्ञान धर्म का हिस्सा है. धर्म ने विज्ञान को कभी नहीं छोड़ा, हां तथाकथित धर्मांध लोग वैज्ञानिकता से परे बे सिर-पैर की बात करें ये संभव है. हां ये भी सच है कि विज्ञान भी COVID-19 के कारण मरने वाले लोगों को मरने से बचा नहीं पाया.

आप उस दृश्य को याद कीजिए जब इसरो ने मंगलयान छोड़ा था और उससे पहले वो तिरुपति जी की आराधना करने गए थे. वो तो वैज्ञानिक हैं फिर ये कैसे चक्कर में पड़े. दरअसल वो जानते हैं कि धर्म, आध्यात्म और विज्ञान सब एक ही हैं. धर्म-आध्यात्म के नियम बहुत कड़े हैं. इन नियमों का पालन नहीं करेंगे तो रिजल्ट नहीं मिलेगा. फिर भी लोग कहते हैं कि धर्म ढकोसला है. जैसे विज्ञान में 2 H (हाइड्रोजन) और 1 O (ऑक्सीजन) के मिले बिना H2O (जल) नहीं बन सकता है. अगर हम एक H और एक O अलग-अलग लेकर बैठ जाएंगे और फिर कहें कि जल तो बन ही नहीं रहा तो क्या विज्ञान झूठा है?

लेकिन ये विज्ञान के साथ सही बात नहीं होगी. आजकल इसी तरह धर्म और आध्यात्म के साथ हो रहा है. हम धर्म के नियम पालन नहीं करते हैं और फिर धर्म को गाली देने लगते हैं. जैसे धर्म कहता है कि सद्भावना रखो, जानवर मत मारो और दूसरों की सेवा करो. अगर हम ये बात मानते तो कोरोना पैदा ही नहीं होता.

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एक उदाहरण देखिए धर्म और आध्यात्म में कहा गया है कि कुंडलिनी शक्ति से इंसान बड़े से बड़ा काम करने में सक्षम हो जाता है तो इस शक्ति को जगाने के लिए स्टेप बाय स्टेप नियम हैं. अब आप ऊपर-ऊपर नियम का पालन कर लेंगे तो सफल नहीं होंगे. अगर आप ब्रह्मचर्य, ध्यान, योगासन, ब्रह्म मूहूर्त और संतुलित आहार के नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आप फेल हो जाएंगे और धर्म आध्यात्म को बुरा कहने लगेंगे. आज दुनिया में बस यही हो रहा है.

पहले तो ये जान लीजिए धर्म और आध्यात्म, भगवत आराधना वो रास्ता है जो आपको एंपावर करेगा. इतनी शक्ति दे सकता है कि आप स्वयं चमत्कार करने में सक्षम हो जाएं पर आपको नियमों का पालन कड़ाई से करना होगा.

धर्म कहता है कि पूरे ब्रह्मांड में देवी दुर्गा (मां पार्वती) एनर्जी का सोर्स हैं. जब कोई काम करो तो सबसे पहले उनका आह्वान करो. नवरात्रि में ब्रह्मांड की कॉस्मिक पोजिशनिंग ऐसी होती है कि सही तरह से किए गए आह्वान और आराधना का फल मिलता है. हम एंपावरमेंट होने की तरफ बढ़ते हैं.

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लेकिन आप पूछेंगे एंपावर कैसे होते हैं? तो बता दें कि आप चमत्कार करने की शक्तियों से लैस हो सकते हैं. कभी कहानी में सुना होगा कि कोई व्यक्ति पानी पर चलता है या किसी के मन की बात हूबहू जान लेता है या उड़ने की ताकत रखता है या फिर एक जगह बैठे-बैठे दूसरे शहर की घटना केवल ध्यान लगाकर बता देता है. ये सब चमत्कारिक शक्तियों का कमाल होता हैं. चूंकि इन शक्तियों को पाने के नियम इतने कठोर हैं कि आप सारे नियम पालन नहीं करेंगे तो ये हासिल नहीं होंगी. कई साल लग सकते हैं, इसमें ठीक वैसे ही होता है जैसे वैज्ञानिक किसी प्रयोग में कई बार फेल होते हैं.

बता दें कि ये शक्तियां सिद्धि कही जाती हैं. इन सिद्धियों को हासिल करने में नवरात्रि की 9वीं देवी सिद्धिदात्री का आह्वान और पूजा-अर्चना की जाती है. ये सिद्धियां अणिमा (शरीर बहुत छोटा कर लेना), महिमा (शरीर बहुत विशाल कर लेना), लघिमा (शरीर बहुत हल्का कर लेना, उड़ना), गरिमा (कोई हिला ना पाए ऐसे स्थापित होना), प्राप्ति प्राकाम्य (हर चीज पा लेने की ताकत), इशित्व (देव श्रेणी से ऊपर आ जाना) और वशित्व (किसी को भी वश में कर लेना) भी हो सकती हैं, जिन्हें अष्ट सिद्धि कहा जाता है.

पंडित सकला नंद बलोदी बताते हैं कि मां दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है. जो सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं. नवरात्रि के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है. इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो सकती है. सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूरे नियम-संयम से कार्य और योग को अपनाना होगा. 

इस देवी के दाहिनी तरफ नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा और बाईं तरफ नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का पुष्प है. इनका वाहन सिंह है और यह कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं. हिमाचल के नंदापर्वत पर इनका प्रसिद्ध तीर्थ है. माना जाता है कि इनकी पूजा करने से बाकी देवियों कि उपासना भी स्वंय हो जाती है.

सिद्धिदात्री देवी सर्व सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं. उपासक या भक्त पर इनकी कृपा से कठिन से कठिन कार्य भी आसानी से संभव हो जाते हैं. इसीलिए इस देवी की सच्चे मन से विधि विधान से उपासना-आराधना करने से यह सभी सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं.

कहते हैं कि भगवान शिव ने भी इस देवी की कृपा से यह तमाम सिद्धियां प्राप्त की थीं. इस देवी की कृपा से ही शिव जी का आधा शरीर नारी का हुआ था. इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए.

विधि-विधान से नौंवे दिन इस देवी की उपासना करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं. इनकी साधना करने से लौकिक और परलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है. मां के चरणों में शरणागत होकर हमें निरंतर नियमनिष्ठ रहकर उपासना करनी चाहिए. इस देवी का स्मरण, ध्यान, पूजन हमें अमृत पद की ओर ले जाता है.

मंत्र: - 

सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयाात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

इसके अलावा दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, हवन‌ करें, मां दुर्गा का ध्यान करें.

तो अगर चमत्कार करने की कहानियां आपने सुन रखी हैं और आप चमत्कारों को ढोंग-ढकोसला मानते हैं तो एक बार कड़े नियमों वाले धर्म-आध्यात्म का प्रयोग करके देखिए और देवी दुर्गा के आह्वान और आराधना के साथ-साथ हर एक स्टेज तक सभी नियमों का उसी तरह पालन कीजिए जैसे वैज्ञानिक करते हैं. उसके बाद शायद आप ही हमें समझा रहे होंगे कि धर्म और आध्यात्म व्यक्ति को बहुत सी शक्तियों से एंपावरमेंट करने की ताकत देता है.

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