पुलवामा हमले को एक साल पूरे, शहीद के परिजनों ने लगाई सरकारी नौकरी की गुहार

शहीद के पिता ने कहा कि अगर उनकी बेटी को नौकरी मिल जाती तो अच्छा होता. साथ ही शहीद के पिता ने पोती की पढ़ाई के लिए भी सरकार से गुहार लगाई है.

पुलवामा हमले को एक साल पूरे, शहीद के परिजनों ने लगाई सरकारी नौकरी की गुहार
पुलवामा हमले में शहीद हुए थे सुदीप बिस्वास. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अनूप दास/ नदिया: देखते देखते एक साल निकल गया पुलवामा हमले को हुए, लेकिन उस दर्दनाक आतंकी हमले को आज भी कोई भूला नहीं सकता. 14 फरवरी भारत के इतिहास का वो कला दिन है जिसे याद करते ही भारतवासियो के रोंगटे खड़े हो जाते है. इस आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ (CRPF) के जवान शहीद हो गए थे. इनमे से कुछ जवान हाल ही में छुट्टी से लौटे थे और कुछ तो छुट्टियों पर भी जाने वाले थे.

मगर किसको पता था कि आतंकी हमले में यह जवान अब कभी भी अपने परिवार का सामना नहीं कर पाएंगे. पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले और नदिया जिले के भी दो जवान इस आतंकी हमले में शहीद हो गए थे और आज उस घटना को एक साल पूरा होने वाला है.

नदिया ज़िले के शहीद जवान के परिवार वाले आज किस स्थिति में जी रहे है. इसका जाएजा लिया हमारे संवाददाता अनूप दास ने. शहीद सुदीप बिस्वास के परिवार वाले अब पहले से खुशहाल जिंदगी जी रहे है, क्योंकि उनकी माली हालत ठीक नहीं थी, लेकिन अब सरकारी मदद मिलने के बाद से अब शहीद सुदीप बिस्वास के परिवार वालों को एक रौशनी की किरण दिखाई दे रही है. शहीद के परिवार वाले अब उनकी एक फाइबर की मूर्ति बनवा रहे हैं, जिसें राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त सुबीर पाल द्वारा गांव के बीचों-बीच लगाया जाएगा.

वहीं, शहीद की मां ममता बिस्वास ने कहा की उनके घर में 5 सदस्य हैं. उन्होंने बताया की अब उनका बेटा तो नहीं है, इसीलिए अब उनका जमाई बाबू ही सब कुछ करते हैं. जमाई ही उनको डॉक्टर के पास ले जाता है, घर के कामो में मदद करता है.

उन्होंने कहा कि जमाई या बेटी को अगर एक काम मिल जाए तो पोती की पढाई भी हो जाएगी. सुदीप के नाम पर सड़क का भी एलान किया गया, मगर सड़क की हालत बेहद ख़राब है, बारिश में कीचड़ हो जाता है. राज्य सर ने 5 लाख दिया है और केंद्र सरकार ने भी मदद किया है.

शहीद के पिता सन्यासी बिस्वास ने कहा कि की केंद्र सरकार की तरफ से एक करोड़ रूपए मिले हैं और राज्य सरकार ने 5 लाख रूपए दिए है. अब एक सरकार द्वारा 25 लाख रूपए भी उनको दिए गए हैं. हालांकि, उन्होंने बताया की केंद्र सरकार और राज्य सरकार परिवार के लोगों को नौकरी देंगे. हमने कागज भी जमा किए थे, लेकिन अभी तक नौकरी नहीं मिली. अगर उनकी बेटी को नौकरी मिल जाती तो अच्छा होता. इसके साथ ही शहीद के पिता ने पोती की पढ़ाई के लिए भी सरकार से गुहार लगाई है.

नदिया जिले के पलाशीपाड़ा ब्लॉक के हाशपुकुरिया ग्राम में रहने वाले शहीद जवान सुदीप बिस्वास के घर पर जब उनका शव पंहुचा था तो, ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. उसके बाद सरकारी मदद मिलने के बाद से शहीद के परिवार की माली हालत पहले से काफी ज़्यादा बेहतर हो गई है, अब वो कच्चा मकान नहीं है बल्कि अब उसकी जगह एक पक्का मकान बन गया है. साथ ही अब शहीद जवान की एक फाइबर की प्रतिमा का काम भी चल रहा है जिसे कृष्णानगर के रहने वाले और राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले शिल्पकार सुबीर पाल खुद अपने हाथो से तैयार कर रहे हैं.

शिल्पकार का कहना है की वो गौरव महसूस कर रहे है क्योंकि जिसने देश के बलिदान दिया आज उसी की मूर्ति बनाने का मौका उन्हें दिया गया है. अभी मिट्टी की मूर्ति तैयार की जा रही है जिसके बाद उसे फाइबर की मूर्ति का रूप दिया जाएगा.

वहीं, शहीद सुदीप बिस्वास का घर अब किसी महल से कम नहीं है. सुदीप के माता पिता और बहन अभी तक अपने घर के चिराग को नहीं भूल पाए हैं. अभी उनके पास कहने को तो सब कुछ है, नहीं है तो केवल उनका बेटा.