11 महीने से रची जा रही थी पुलवामा हमले की साज़िश, ऐसे तैयार किया आत्‍मघाती आतंकी

जुलाई 2018 से आरडीएक्स को इकट्ठा किया जा रहा था. गैस सिलेंडर और कोयले की थैलियों में छुपाकर लाया गया विस्फोटक और पुलवामा के त्राल के मिडोरा पहुंचा.

11 महीने से रची जा रही थी पुलवामा हमले की साज़िश, ऐसे तैयार किया आत्‍मघाती आतंकी

श्रीनगर: पुलवामा के लेथपुरा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले में हो रही जांच से पता चला है कि इस हमले में करीब 80 किलो आरडीएक्स इस्तेमाल किया गया था. इसमें अमोनियम नाइट्रेट और दूसरे केमिकल का इस्तेमाल किया गया. यह आरडीएक्स पाकिस्तान से पुंछ के रस्ते से घुसपैठ किये 13 आतंकियों के ग्रुप ने  2018 मार्च के महीने सीमा के इस पार लाया था. फिर धीरे धीरे कर इसे दक्षिणी कश्मीर के शोपियां पहुंचाया गया. शोपियां से इसे गैस सिलेंडरों और कोयले की थैलियों में पुलवामा के त्राल के मिडोरा गावों में पहुंचाया गया था.

सूत्रों के मुताबिक इन जैश के 13 आतंकियों में कामरान और रशीद गाज़ी भी शामिल थे, जो आईईडी एक्सपर्ट थे. कामरान पहले उत्तरी कश्मीर गया और रशीद दक्ष‍िण कश्मीर में रहा. दोनों जगहों पर ऐसे आतंकी की तलाश शुरू हुई जो आत्मघाती बनने के लिए तैयार हो.
फिर रशीद गाज़ी की संपर्क में आया आदिल डार. आदिल के मिलते ही आतंकी कामरान वापस दक्ष‍िण कश्मीर के मिडोरा गांव पहुंचा. यहां पाकिस्तानी आतंकी रशीद गाज़ी और कामरान आदिल को तैयार करने में लगे. कई महीनों तक 12वीं कक्षा के छात्र आदिल का ब्रेन वॉश किया गया. जब आदिल आत्मघाती हमले के लिए तैयार हुआ तो हमले की योजना काम शुरू हुआ.

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आरडीएक्स को कथित तौर पर पाक सीमा से लाया गया है. पाकिस्तान की सीमा में चल रहे आतंकी ट्रेनिंग कैंपों में प्रशिक्षित आतंकवादियों को जब भारतीय सीमा में धकेला जाता है तो उन्हें आरडीएक्स की बहुत छोटी मात्रा बारीक कोयले के बीच रखकर थमा दी जाती है.

सूत्रों के मुताबिक त्राल मिडोरा में रची ये साज़िश जब फाइनल हुई तो सही मौका तलाशने की प्रक्रिया शुरू हुई. यह तय हुआ कि हमला बड़ा करना है तो ऐसी जगह हो जहां सुरक्षाबलों को बड़ा नुकसान हो. इसलिए सुरक्षाबलों को कैंपों में निशाना बनाने के बजाए खुले में हमला करने की योजना शुरू की गई. ऐसा इसलिए हुआ क्‍योंकि वर्ष 2017 दिसम्बर महीने में लेथपुरा के ही सीआरपीएफ कैंप पर जैश का आत्मघाती हमला विफल हुआ था. फिर तय हुवा कि सुरक्षाबलों पर यह हमला जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर किया जाए क्‍योंकि कि यह वह रास्ता है, जिस पर सैकड़ों सुरक्षाबलों की गाड़ियां हर दिन काफि‍ले के रूप में  चलती हैं

फिर जब कश्मीर में भीषण बर्फ़बारी के कारण जम्मू कश्मीर राजमार्ग कई दिनों तक बंद रहने के बाद खोला गया और सीआरपीएफ का काफि‍ला दोगुनी तादाद में कश्मीर की तरफ चल पड़ा. आतंकियों को अपने ओवर ग्राउंड वर्करों से यह पता चला तो 14 फरवरी का दिन हमले के लिए चुना गया. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 14 फरवरी की सुबह ही मिंडोरा गांवों में आतंकी कामरान और रशीद गाज़ी ने तैयार किये गए इस विस्फोटक को गाड़ी में फिट किया और दोहपहार बाद आदिल इस गाड़ी को लेकर लेथपुरा के लिंक रोड से हाईवे पर पहुंचा. करीब 3.20 मिनट पर सीआरपीएफ का काफि‍ला इस जगह पहुंचा और आदिल ने सीआरपीएफ की बस को देखते ही गाड़ी को कानवाय के बीच धकेल दिया और इस हमले को अंजाम दिया.

इस हमले में 40 सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए और 5 घायल अभी भी अस्पताल में भरती हैं. इस हमले की ज़द में सीआरपीएफ की दो बस आयी थीं. सुरक्षाबलों को हमले के दिन ही यह लीड मिली थी की इस में कौन शामिल है करीब 19 लोगों से हमले के बाद उसी रात हिरासत में लिया गया और पूछताछ की गई और पता चला कि  आदिल को तैयार करने वाले मास्टरमाइंड कामरान और रशीद गाज़ी है और उनकी  तलाश शुरू की गई, कल हुवी मुठभेड़ से पहले इन दोनो को चार बार घेरे में लिया गया था मगर यह निकलने में सफल रहे थे मगर कल पांचवी बार इन दोनो को पिंगलिन गावों में घेर लिया गया और डेर किया गया.