पंजाब के मालवा क्षेत्र में यूरेनियम मुक्त जल उपलब्ध करवाए सरकार: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि नौ साल से इस केस की सुनवाई कर रहे हैं फिर भी सरकार लोगों को पीने लायक पानी क्यों नहीं मुहैया करवा पाई.

पंजाब के मालवा क्षेत्र में यूरेनियम मुक्त जल उपलब्ध करवाए सरकार: हाईकोर्ट
मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी..

चंडीगढ़: पंजाब के मालवा क्षेत्र में पीने लायक पानी न उपलब्ध करवाने में पंजाब सरकार की नाकामी पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि सरकार प्रधान सचिवों की समिति का गठन करके लोगों को यूरेनियम मुक्त जल उपलब्ध करवाने का प्रबंध करे. हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि नौ साल से इस केस की सुनवाई कर रहे हैं फिर भी सरकार लोगों को पीने लायक पानी क्यों नहीं मुहैया करवा पाई.

समिति में स्थानीय निकाय विभाग, सिंचाई और जल संसाधन, जल आपूर्ति और स्वच्छता, ऊर्जा और वित्त विभाग के सचिवों को शामिल किए जाने के आदेश देते हुए हाई कोर्ट ने कहा है कि यह समिति लोगों को  यूरेनियम मुक्त जल ना मिल पाने की समस्या पर विचार करे और लोगों को इससे निजात दिलवाने के उपाय करे. हाईकोर्ट ने मालवा क्षेत्र में लोगों को भरपूर मात्रा में यूरेनियम मुक्त भूमिगत जल और नहरी जल की आपूर्ति सुनिश्चित करवाने के भी आदेश दिए हैं. हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को इस समिति में अन्य सदस्य शामिल करने की भी छूट दी है.

लगभग 9 साल से विचारधीन इस मामले में याचिकाकर्ता ब्रिजेन्दर सिंह लूम्बा ने ZEE MEDIA को बताया कि बठिंडा, फरीदकोट और लुधियाना में पानी में यूरेनियम के तत्व होने के चलते लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जटिल समस्याएं हो रही है. इस मामले पर पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए चीफ जस्टिस रवि शंकर झा और जस्टिस राजीव शर्मा ने कहा है कि इस बात में कोई विवाद नहीं है कि मालवा क्षेत्र में लोगों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले जल में प्राकृतिक तौर पर यूरेनियम के तत्व पाए जा रहे है जोकि लोगों के स्वास्थ्य के लिए अहितकर हैं. हाईकोर्ट ने अपने आदेशों में केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को भूमिगत जल में यूरेनियम तत्वों को निष्क्रिय करने की संभावनाएं तलाशने के भी निर्देश दिए हैं.

ये भी देखें: 

मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने बठिंडा नगर निगम को शहर में वांछित पानी की मात्रा की सूचना मांगी है. इस मामले में सुनवाई को स्थगित करते हुए हाई कोर्ट ने चार सप्ताह में अपने आदेशों की अनुपालना पर रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी. चीफ जस्टिस की बेंच ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए कि कमेटी गठन के बाद लोगों को पीने लायक पानी मुहैया कराने के लिए क्या कदम उठाए गए, इसकी जानकारी दी जाए.