राफेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 6 मार्च को होगी सुनवाई
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राफेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 6 मार्च को होगी सुनवाई

CJI रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसफ की बेंच सुनवाई करेगी. आपको बता दें कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई खुली अदालत में होगी.

राफेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 6 मार्च को होगी सुनवाई

नई दिल्‍ली: राफेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 6 मार्च को सुनवाई करेगा. CJI रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसफ की बेंच सुनवाई करेगी. आपको बता दें कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई खुली अदालत में होगी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को देखने के बाद खुली अदालत में सुनवाई की इजाज़त दी थी.

दरअसल, फैसले के एक हिस्से में सुधार की सरकार की अर्ज़ी और गलत जानकारी देने का आरोप लगाने वाली प्रशांत भूषण, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होगी. याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को राफेल को लेकर गलत जानकारी दी है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील मामले में फैसला देते हुए केंद्र सरकार को क्लीन चिट दी थी. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राफेल डील प्रक्रिया में कोई खामी नहीं हुई.

इससे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने फैसले में कहा था कि हमने इस मामले में तीन बिंदु- डीले लेने की प्रकिया, कीमत और ऑफसेट पार्टनर चुनने की प्रकिया पर विचार किया और पाया कि कीमत की समीक्षा करना कोर्ट का काम नहीं, जबकि एयरक्राफ्ट की ज़रूरत को लेकर कोई संदेह नहीं है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गत 31 अक्टूबर 2018 को सरकार को सील बंद लिफाफे में राफेल की कीमत और उससे मिले फायदे का ब्योरा देने का निर्देश दिया था. साथ ही कहा था कि सौदे की निर्णय प्रक्रिया व इंडियन आफसेट पार्टनर चुनने की जितनी प्रक्रिया सार्वजनिक की जा सकती हो उसका ब्योरा याचिकाकर्ताओं को दे.

सरकार ने आदेश का अनुपालन करते हुए ब्योरा दे दिया है. सरकार ने सौदे की निर्णय प्रक्रिया का जो ब्योरा पक्षकारों को दिया है, जिसमें कहा गया था कि राफेल में रक्षा खरीद सौदे की तय प्रक्रिया का पालन किया गया है. 36 राफेल विमानों को खरीदने का सौदा करने से पहले डिफेंस एक्यूजिशन काउंसिल (डीएसी) की मंजूरी ली गई थी. इतना ही नहीं करार से पहले फ्रांस के साथ सौदेबाजी के लिए इंडियन नेगोसिएशन टीम (आइएनटी) गठित की गई थी, जिसने करीब एक साल तक सौदे की बातचीत की और खरीद सौदे पर हस्ताक्षर से पहले कैबिनेट कमेटी आन सिक्योरिटी (सीसीए) व काम्पीटेंटफाइनेंशियल अथॉरिटी (सीएफए) की मंजूरी ली गई थी.

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