राहुल गांधी को समझ आ गई सुप्रीम कोर्ट की हिदायत, भविष्‍य में कभी नहीं कहेंगे 'चौकीदार चोर है'- सूत्र

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राहुल गांधी ने भविष्‍य में दोबारा ऐसा न करने की मानी है. 

राहुल गांधी को समझ आ गई सुप्रीम कोर्ट की हिदायत, भविष्‍य में कभी नहीं कहेंगे 'चौकीदार चोर है'- सूत्र
फाइल फोटो

नई दिल्‍ली : राफ़ेल मामले (Rafale Case) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पुराने फ़ैसले को लेकर चुनावी दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के खिलाफ ‘चौकीदार चोर है’ के नारे का इस्तेमाल करने को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्‍हें भविष्‍य में ऐसा न करने की हिदायत दी गई है. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राहुल गांधी ने भविष्‍य में दोबारा ऐसा न करने की मानी है. उन्‍होंने तय किया है कि वे राफेल मामले पर अब सावधानी बरतेंगे और भविष्‍य में कभी ‘चौकीदार चोर है’का नारा नहीं लगाएंगे. सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है.

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने तय किया है कि वे भविष्‍य में किसी भी तरह से ‘चौकीदार चोर है’का नारा नहीं लगाएंगे और पूरी तरह सावधानी बरतेंगे. हालांकि कांग्रेस पार्टी राफेल मामले पर संसद में JPC यानि joint Parliamentry Committee की मांग को जारी रखेगी. आपको बता दें कि आगामी 18 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है.

दरअसल, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदा मामले में जांच की मांग वाली समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति एस.के. कौल ने आदेश पढ़ते हुए कहा कि समीक्षा याचिका अयोग्य है. सुप्रीम कोर्ट ने दसॉ एविएशन से संबद्ध राफेल मामले की जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दिया.

साथ ही कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे अवमानना मामले को भी खत्म कर दिया और कहा कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक व्यक्ति के तौर पर राहुल गांधी को भविष्य में और सतर्क रहना होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में राहुल गांधी के 'चौकीदार चोर है' बयान देने पर उनके खिलाफ अवमानना मामले की जांच शुरू कर दी गई थी.

सीजेआई रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस.के. कौल और न्यायमूर्ति के.एम. जोसफ की पीठ ने कहा कि राजनीति में महत्वपूर्ण व्यक्ति के तौर पर राहुल गांधी को भविष्य में कोर्ट का हवाला देते हुए ऐसे बयान देते समय और सतर्क होना चाहिए, जो कोर्ट के आदेश का हिस्सा ही नहीं था.