विपक्षी नेताओं की श्रीनगर यात्रा को राज्य सरकार ने नहीं दी इजाजत, कहा- यहां ना आएं सियासी नेता

जम्मू-कश्मीर में सब ठीक है लेकिन ये अमन चैन शायद विपक्ष के नेताओं को पसंद नहीं आ रही है.

विपक्षी नेताओं की श्रीनगर यात्रा को राज्य सरकार ने नहीं दी इजाजत, कहा- यहां ना आएं सियासी नेता
विपक्ष कश्मीर को लेकर विपक्ष की नीयत में खोट नजर आ रहा है.

नई दिल्ली/श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में जहां अनुच्छेद 370 हटने के बाद हालात अब सामान्य होते जा रहे हैं. स्कूल-कॉलेज खुल चुके हैं. कई इलाकों से इंटरनेट और फोन से पाबंदियां भी हटा ली गई हैं. अनुच्छेद 370 हटने के बाद पत्थरबाजी जैसी घटनाएं अब इतिहास बन चुकी हैं. यानी जम्मू-कश्मीर में सब ठीक है लेकिन ये अमन चैन शायद विपक्ष के नेताओं को पसंद नहीं आ रही है. तभी तो राहुल गांधी समेत विपक्ष के 12 नेता आज श्रीनगर जाने वाले हैं.  

कांग्रेस से राहुल गांधी, गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, केसी वेणुगोपाल, सीपीएम के सीताराम येचुरी, टीएमसी से दिनेश त्रिवेदी, एनसीपी से माजिद मेमन, सीपीआई के डी राजा, आरजेडी के मनोज झा, डीएमके से तिरुचि शिवा और जेडीएस के डी कुपेंद्र रेड्डी, लोकतांत्रिक जनता दल से शरद यादव शामिल हैं. इन नेताओं ने श्रीनगर जाने के लिए दिल्ली से सुबह 11 बजकर 50 मिनट की फ्लाइट की टिकट भी ले रखी है. 

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जाहिर है 5 अगस्त को जब से जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐलान हुआ, राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई नेता लगातार जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर इस से बयानबाजी कर रहे हैं. हालांकि इस बार जिस तरह से राहुल गांधी समते विपक्ष के 12 नेताओं ने श्रीनगर जाने की तैयारी की हुई है, उस पर जम्मू-कश्मीर सरकार ने देर रात बयान जारी कर घाटी की यात्रा नहीं करने की सलाह दी है. 

बयान में कहा गया है कि ऐसे वक्त में जब सरकार राज्य के लोगों को सीमा पार आतंकवाद के खतरे और आतंकवादियों के हमलों से बचाने की कोशिश कर रही है, उपद्रवियों तथा शरारती तत्वों को नियंत्रित करके लोक व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की जा रही है, तब वरिष्ठ राजनेताओं की ओर से आम जनजीवन को धीरे-धीरे पटरी पर लाने में बाधा डालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. राजनेताओं से अनुरोध किया जाता है कि सहयोग दें और श्रीनगर की यात्रा नहीं करें, क्योंकि उनके ऐसा करने से दूसरे लोगों को असुविधा होगी. यात्रा से पाबंदियों का भी उल्लंघन होगा जो अब भी कई इलाकों में कायम हैं. वरिष्ठ नेताओं को समझना चाहिए कि शांति, व्यवस्था और जानहानि को रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए. 

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जाहिर है जम्मू-कश्मीर सरकार जम्मू-कश्मीर में हर हाल में अमन चैन कायम रखना चाहती है. नेताओं के दौरे से हालात बिगड़ने का अंदेशा है. ऐसे में यही कहा जाएगा कि कश्मीर को लेकर विपक्ष की नीयत में कहीं न कहीं खोट जरूर है. विपक्ष के नेताओं के श्रीनगर दौरे को लेकर जम्मू-कश्मीर प्रशासन का रुख बेहद साफ है. शांति व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है. यानी मनाही के बावजूद राहुल गांधी समेत विपक्ष के 12 नेता श्रीनगर जाने की तैयारी में हैं, ऐसे में कश्मीर को लेकर विपक्ष की नीयत में खोट जरूर नजर आ रहा है. 

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