राज ठाकरे का शिवसेना पर हमला, 'संपादकीय में कोसने वाले एक्शन के समय चुप्पी साध लेते हैं'

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्षी दलों द्वारा बुलाए भारत बंद से शिवसेना ने खुद को दूर रखा था.

राज ठाकरे का शिवसेना पर हमला, 'संपादकीय में कोसने वाले एक्शन के समय चुप्पी साध लेते हैं'
राज ठाकरे का कहना है कि शिवसेना एक मौकापरस्त पार्टी है, जो अपना फायदा देखती है

नई दिल्ली : पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के भारत बंद पर राजनीतिक दल आपस में हमलावर हो गए हैं. भारत बंद में शिवसेना द्वारा खुद को अलग रखने पर एमएनएस ने कड़ा हमला बोला है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने शिवसेना के बारे में कहा कि शिवसेना का जब पैसा फंसता है तो वह गठबंधन से बाहर निकलने की बात करती है और जब काम पूरा हो जाता है तो केंद्र के हर काम को लेकर चुप्पी साध लेती है.

बता दें कि कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने सोमवार को भारत बंद का आह्वान किया था. इस बंद के दौरान कई स्थानों पर हिंसक झड़पेें भी हुईं. हालांकि बीजेपी ने विपक्षी दलों के इस बंद को असफल करार दिया और कहा कि तेल की बढ़ती कीमतें क्षणिक हैं.

राज ठाकरे ने कहा कि पूरा देश पिछले 4 वर्षों से देख रहा है कि शिवसेना केंद्र के हर कदम को लेकर अपने संपादकीय में आलोचना करती है, लेकिन जब तेल की कीमतों को लेकर पूरा देश उबल रहा है तो एक शब्द तक नहीं लिखा. उन्होंने कहा कि शिवसेना के पास इस मुद्दे पर खेलने के लिए कोई भूमिका नहीं है, वह नहीं जानती कि उसे क्या करना है. इसलिए शिवसेना को महत्व देने की कोई जरूरत नहीं है.

राज ठाकरे ने भारत बंद में शिवसेना की भूमिका को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी भी की है. उन्होंने कहा कि जब उनका (शिवसेना) पैसा फंस जाता है, तो वे गठबंधन से बाहर निकलने की बात करते हैं, जब उनका काम पूरा हो जाता है, तो वे चुप हो जाते हैं.

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बता दें कि आज सोमवार को कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने भारत बंद का आह्वान किया था. लेकिन शिवसेना ने इस बंद से खुद को अलग रखा. इतना ही नहीं शिवसेना ने बंद को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना तक की. पार्टी के मुखपत्र 'सामना' और 'दोपहर का सामना' में प्रकाशित संपादकीय में सेना ने जनता की तकलीफों के प्रति आखिरकार जागने के लिए विपक्षी दलों की भी आलोचना की.

Bharat Bandh

उधर, राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने मुंबई, ठाणे, पालघर, पुणे, नासिक और राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी आक्रामक विरोध प्रदर्शन किए. दादर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के वाहनों का काफिला जैसे ही गुजरा, मनसे कार्यकर्ताओं ने पुलिस की घेराबंदी तोड़कर उन्हें काले झंडे दिखाएं. औरंगाबाद में प्रदर्शनकारियों ने बैलगाड़ी पर रैलियां निकाली और ड्रॉपर्स से अपने वाहनों में पेट्रोल भरा.