झुंझुनूं: 103 साल के स्वतंत्रता सैनानी ने अपना दुख बताकर सरकार से लगाई यह गुहार...

अब 103 साल के झुंझुनूं के सेडूराम कृष्णियां काफी वृद्ध हो चुके है. बावजूद इसके उन्हें आज भी देश के प्रति जज्बा बरकरार है.

झुंझुनूं: 103 साल के स्वतंत्रता सैनानी ने अपना दुख बताकर सरकार से लगाई यह गुहार...
बुडाना गांव में रहने वाले स्वतंत्रा सैनानी सेडूराम कृष्णियां 103 साल के हैं.

संदीप केड़िया/झुंझुनूं: देश में कुछ ऐसे दीवानों भी हैं, जिन्होंने जिंदगी में अंग्रेजों से आजादी को ही अपना जीवन माना और कभी शादी तक नहीं की. आज इनकी उम्र 100 के पार भी हो गई है. लेकिन वह अपनी आजादी से खुश हैं और कहते है कि, आज हम जो कर पा रहे, बोल पा रहे हैं, यह सब 73 साल पहले मिली आजादी के कारण हो सका है. अब 103 साल के झुंझुनूं के सेडूराम कृष्णियां काफी वृद्ध हो चुके है. बावजूद इसके उन्हें आज भी देश के प्रति जज्बा बरकरार है.

दरअसल, राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बुडाना गांव में रहने वाले स्वतंत्रा सैनानी सेडूराम कृष्णियां 103 साल के हैं. जब वह 21 साल के थे, तब आजादी के आंदोलन में कूद गए थे. सुभाषचंद्र बोस (Subash Chandra Bose) की आजाद हिंद फौज के सिपाही के तौर पर वह, विभिन्न देशों में गए, जेल में रहे. लेकिन आजादी दिलाकर ही दम लिया. आज भी उन्हें अपने पुराने किस्से याद हैं.

उन्होंने बताया कि, 1940 में वे आजादी की लड़ाई में कूद गए और उनकी मुलाकात जेल में बंद के दौरान सुभाषचंद्र बोस से हुई. उन्होंने उन्हें अपनी फौज में शामिल किया और फिर हमने बोस के नेतृत्व में लड़ाई लड़ी. इस मौके पर उन्होंने कहा कि, उन्हें कई बार चिंता होती है कि, उन जैसे कई स्वतंत्रता सैनानी, जो अब वृद्ध हो चुके है. लेकिन अविवाहित हैं, उनकी अब तक सरकार ने सुध नहीं ली है. उनके परिवार के अन्य सदस्य, उनकी सेवा एक पिता, दादा, पड़दादा की तरह कर रहे हैं. लेकिन भविष्य में मेरा उत्तराधिकारी कौन होगा, इसे लेकर कोई भी कदम सरकार नहीं उठा रही है. इसलिए सरकार को मेरे उत्तराधिकारी के तौर पर सहमति प्रदान करने और आश्रितों को मिलने वाली सुख, सुविधाएं और सम्मान के लिए सोचना चाहिए.

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वहीं, स्वतंत्रता सैनानी सेडूराम कृष्ण्यिां के पौत्र ने बताया कि, वह बचपन से अपने दादा के पास किस्से कहानियां सुनते आ रहे हैं. उनके परिवार में आज भी राष्ट्रप्रेम को लेकर जज्बा है. वह भी, वायु सेना में जाकर देश सेवा करना चाहता है. जिसके लिए उनके दादा सेडूराम ने भी उन्हें आशीर्वाद दिया है.

सेडूराम के परिवार के सदस्य एवं बुडाना के पूर्व सरपंच दिलीप कृष्णियां ने बताया कि, उनके उम्र 103 साल हो गई है. वह कई देशों का भ्रमण कर चुके है. आजाद हिंद फौज के सिपाही हैं. लेकिन उन्होंने देश की आजादी तक वैसे शादी नहीं की. बाद में भी उन्होंने अविवाहित रहने का फैसला किया. लेकिन अब उनकी सेवा करने वाले आश्रितों को लेकर सरकार कोई सोच नहीं रख रही, जिसका दुख खुद स्वतंत्रता सैनानी को भी है. इसलिए कम से कम उनकी ताउम्र सेवा करने वालों को उनके मरणोपरांत सम्मान मिले.

दिलीप कृष्णियां ने बताया कि उनके बड़े पापा सेडूराम कृष्णियां ने उन्हें जिंदगीभर यही बताया कि, आज हम जो कर रहे है, जो बोल रहे है, यह आजादी ही असली आजादी है. उन्होंने बताया कि, वो खुशनसीब है कि, ना केवल सेडूराम कृष्णियां उनके गार्जियन है, बल्कि उनके ही परिवार के सदस्य बालाराम भी फ्रीडम फाइटर रह चुके है. उन्होंने बताया कि बालाराम के नाम से गांव में स्कूल है. इसलिए वो चाहते हैं कि सेडूराम के नाम से गांव में कॉलेज खुले तो, उनकी याद चिरस्थायी रह सके.

वहीं, 103 साल पूर्ण करने वाले सेडूराम आज भी स्वस्थ और कुशलमंगल नजर आते हैं. यहां तक की घूमने फिरने के अलावा बिना चश्मा के अखबार पढ़ने की आदत है. सेडूराम कृष्णियां भले ही 103 साल पार कर गए हैं, लेकिन आज भी उन्हें उम्मीद है कि, अभी तो और जीवन जिऊंगा. 21 वर्ष की उम्र में आजाद हिंद फौज के सिपाही बने सेडूराम कृष्णियां आजादी की लड़ाई में फ्रांस द्वारा कैद किए जाने तथा 18 दिन भूखे रहकर डटे रहे थे. अब यह आजादी के सिपाही सरकार से बस यही चाहतें हैं कि उसके अविवाहित होने पर, उसके बाद उसकी देखभाल करने वाले परिजनों को उनकी पेंशन संबंधी सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो.