कोटा: MBS अस्पताल में शातिर गठजोड़ का नमूना, कागजों में ऐसे हुआ 12 लाख का हेर-फेर

अस्पताल अधीक्षक की ओर नयापुरा थाना पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है. पुलिस ने भी अधीक्षक की शिकायत पर आईपीसी की धारा 406 (अमानत में खयानत) के तहत मामला दर्ज किया है. 

कोटा: MBS अस्पताल में शातिर गठजोड़ का नमूना, कागजों में ऐसे हुआ 12 लाख का हेर-फेर
मामला संभागीय आयुक्त तक पहुंचा तो उन्होंने अस्पताल प्रशासन से रिपोर्ट तलब की.

मुकेश सोनी, कोटा: जिले के एमबीएस अस्पताल में शातिर गठजोड़ का एक और नमूना सामने आया है. अस्पताल प्रशासन 10 माह से पूर्व साइकिल स्टैंड संवेदक से राशि वसूलना ही भूल गया, जिसके चलते RMRS को 12 लाख 50 हजार की वित्तीय हानि हुई. 

टेंडर को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाला संभाग का सबसे बड़ा एमबीएस अस्पताल एक बार फिर चर्चाओ में है. इस बार चर्चा साइकिल स्टैंड को लेकर है. अस्पताल प्रशासन को साइकिल स्टैंड के पेटे (बदले) करीब 12 लाख 50 हज़ार रुपये फ़टका लगा है. 10 माह बीत जाने के बाद भी न तो अस्पताल प्रशासन पूर्व संवेदक से वसूली कर पाया है, न ही पूर्व संवेदक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है. इसके चलते अस्पताल के आरएमआरएस को वित्तीय हानि हुई है.

मामला संभागीय आयुक्त तक पहुंचा तो उन्होंने अस्पताल प्रशासन से रिपोर्ट तलब की. संभागीय आयुक्त ने अस्पताल प्रशासन से पूरे मामले की जानकारी मांगी है. संभागीय आयुक्त द्वारा जानकारी मांगने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है. आनन-फानन में अस्पताल अधीक्षक की ओर से साइकिल स्टैंड के पूर्व संवेदक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है.

क्या है पूरा मामला
दरअसल, अस्पताल प्रशासन ने साल 2017 में अस्पताल परिसर स्थित साइकिल स्टैंड का ठेका की निविदा जारी की थी. निविदा के तहत सालाना  करीब 32 लाख 50 रुपये राशि तय की थी. संवेदक ने साल भर ठेका भी चलाया. लेकिन समय अवधि पूरी होने के बाद भी जब अस्पताल प्रशासन दोबारा टेंडर नहीं निकाल सका तो उसी संवेदक को तीन माह का अवधि विस्तार दे दिया गया. तीन माह तक ठेका संचालक ने साइकिल स्टैंड के पेटे लोगों से राशि वसूली लेकिन अस्पताल में जमा नही करवाई. इस बीच अस्पताल प्रशासन ने नई निविदा जारी कर दी. दूसरे संवेदक के नाम ठेका जारी हो गया. 

अस्पताल प्रशासन भी पूर्व संवेदक से राशि वसूलना भूल गया
इधर दस महीनों से अस्पताल प्रशासन पूर्व संवेदक से पैसा वसूल करना ही भूल गया, जिसके चलते आरएमआरएस को करीब 12 लाख 50 हज़ार की वित्तीय हानि हुई. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ठेका अवधि खत्म होने पर एक शातिर बाबू ने संवेदक फर्म की धरोहर राशि रिलीज कर दी थी लेकिन 3 माह का अवधि विस्तार बढ़ाने के दौरान ठेका संवेदक से न तो एडवांस चेक लिए, न ही एफडीआर जमा करवाई जबकि नियम और शर्तों के मुताबिक संवेदक को तीन माह की राशि एडवांस जमा करवानी होती है यानी शर्त के मुताबिक तीन माह की अवधि विस्तार के पेटे पूर्व संवेदक को 12 लाख 50 हज़ार की राशि एडवांस जमा करानी थी लेकिन पूर्व संवेदक ने राशि जमा नही करवाई. अस्पताल प्रशासन भी पूर्व संवेदक से राशि वसूलना भूल गया.

अब अस्पताल अधीक्षक की ओर नयापुरा थाना पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है. पुलिस ने भी अधीक्षक की शिकायत पर आईपीसी की धारा 406 (अमानत में खयानत) के तहत मामला दर्ज किया है. जांच अधिकारी ने अस्पताल प्रशासन से जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगा है.

ऐसे आया शिकंजे में अस्पताल
कागजों में खेल करने के चक्कर में अस्पताल प्रशासन बैक डेट में पूर्व संवेदक को नोटिस भेजता रहा क्योंकि अस्पताल प्रशासन के पास न तो पूर्व संवेदक द्वारा दिया गया चेक था (धरोहर राशि), न ही कोई डॉक्यूमेंट. बस यही शतरंजी चाल शातिर बाबू की गले की फांस बन गई.