झुंझुनूं: 5 साल तक सरपंचों को मिली 'खुली छूट', सरकार के 150 करोड़ का नहीं कोई अता-पता

उदयपुरवाटी पंचायत समिति क्षेत्र के सरपंचों की. केंद्र सरकार की ओर से पंचायतों को भेजे जाने वाले पैसे का कोई भी हिसाब-किताब सरपंचों के पास नहीं है. 

झुंझुनूं: 5 साल तक सरपंचों को मिली 'खुली छूट', सरकार के 150 करोड़ का नहीं कोई अता-पता
जिला परिषद ने इस हिसाब-किताब को ढूंढने के लिए अब कैंप लगाने का भी फैसला लिया है.

संदीप केडिया, झुंझुनूं: पिछले पांच सालों में सरपंचों को खुली छूट के कारण हाल ये बने हैं कि अकेले झुंझुनूं जिले में सरपंचों के पास 150 करोड़ रुपये का कोई हिसाब-किताब नहीं है.

जी, हां 14वें वित्त आयोग की ओर से हर पंचायत को उसकी जनसंख्या के आधार पर केंद्र सरकार सीधे पैसा भेजती है, जिसे कुछ विशेष कार्यों के लिए खर्च करना होता है लेकिन झुंझुनूं जिला परिषद सीईओ रामनिवास जाट ने जबसे कार्यभार संभाला है, तब से उनके सामने जो चीजें सामने आई हैं, वो हैरान कर देने वाली हैं.

झुंझुनूं जिला परिषद सीईओ रामनिवास जाट इनदिनों एक्शन मोड में है. यही कारण है कि झुंझुनूं जिले के सरपंचों के रातों की नींद उड़ी हुई है. खासकर उदयपुरवाटी पंचायत समिति क्षेत्र के सरपंचों की. केंद्र सरकार की ओर से पंचायतों को भेजे जाने वाले पैसे का कोई भी हिसाब-किताब सरपंचों के पास नहीं है. अब तक 150 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब अकेले झुंझुनूं जिले के सरपंच नहीं दे पाए है जबकि उनका कार्यकाल खत्म होने को है. यदि ऐसे हालात पूरे प्रदेश के हैं तो यह आंकड़ा हजार करोड़ से भी कहीं ज्यादा का होगा.

75 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब ही नहीं 
अब झुंझुनूं जिला परिषद सीईओ ने सभी पंचायत समिति बीडीओ को पाबंद कर दिया है कि जब तक सरपंच अपने पुराने पैसों का हिसाब-किताब न दे, तब तक उन्हें केंद्र से आई अगली किस्त की राशि न दी जाए. आपको बता दें कि अकेले उदयपुरवाटी पंचायत समिति की 40 पंचायतों का करीब 75 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब ही नहीं है.

सरपंचों में मची है हलचल
सीईओ द्वारा केंद्र की किस्त रोकने के बाद सरपंचों में बवाल मचा हुआ है. एक ओर तो उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है. दूसरी ओर किस्त रोकने के साथ-साथ उनसे पुराना हिसाब मांगा जा रहा है तो सरपंच भी घबराए हुए हैं. सबसे ज्यादा घबराहट उदयपुरवाटी में इसलिए हो रही है क्योंकि सर्वाधिक हिसाब-किताब भी यहीं का बाकि है. खुद सीईओ भी मानते हैं कि पिछले दिनों उदयपुरवाटी विधायक राजेंद्रसिंह गुढ़ा जिस तरह से 30-40 लोगों को लेकर उनके पास आए और उनके साथ अभद्रता के साथ बातचीत की. वो कहीं ना कहीं इसी मामले से जुड़ा हुआ है.
चुनावों में सरपंचों को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा
जिला परिषद सीईओ रामनिवास जाट को अंदेशा है कि केंद्र से आए इस पैसे की निगरानी नहीं होने के कारण जिले के करीब 150 करोड़ रुपये का कोई हिसाब-किताब नहीं है. उन्हें अंदेशा है कि जिस तरह से अब परतें खुल रही है. उस लिहाज से इस पैसे का उपयोग सरपंचों ने निजी कामों में किया है. या तो उन्होंने अपने खुद के यहां काम करवा लिया या फिर परिचितों के यहां. इसलिए ही सरपंच डरे हुए है और हिसाब नहीं दे रहे. जबकि यह पैसा सार्वजनिक कामों में खर्च होना था. जाट ने कहा है कि यदि सरपंच हिसाब नहीं देते है तो उनसे वसूली तो होगी ही साथ ही आने वाले चुनावों में उन्हें अयोग्य घोषित करवाने की भी कोशिश की जाएगी. लेकिन सरकार का पैसा है. हिसाब तो देना पड़ेगा.
लगाए जाएंगे कैंप
जिला परिषद ने इस हिसाब-किताब को ढूंढने के लिए अब कैंप लगाने का भी फैसला लिया है. साथ ही सरपंचों और ग्रामसेवकों को बैठकों के जरिए बताया जा रहा है कि वे किस तरह से इसका हिसाब-किताब दें और इसका हिसाब-किताब देना कितना जरूरी है. जिला परिषद इस पैसे की उपयोगिता को मालूम करने के लिए भी पूरा सहयोग भी कर रहा है. लेकिन यह भी तय है कि अब झुंझुनूं में तो कम से कम पंचायतों का पैसा बिना हिसाब-किताब दिए नहीं मिलेगा. यही कारण है कि सभी पंचायत समितियों के खातों में पंचायतों में दिया जाने वाला पैसा पड़ा है.