नागौर के 'मोदी' बने मिसाल, गायों के लिए तैयार किए दो हजार सहजन के पौधे

डीडवाना कस्बे में पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जगह-जगह सहजन के पौधे लगाए जाएंगे, जो पर्यावरण को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाएंगे. 

नागौर के 'मोदी' बने मिसाल, गायों के लिए तैयार किए दो हजार सहजन के पौधे
प्रतीकात्मक तस्वीर.

हनुमान तंवर, नागौर: लॉकडाउन में मानवता की भलाई के लिए कुछ लोग इस तरह से सदुपयोग कर रहे हैं. डीडवाना में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है एक पर्यावरण प्रेमी और गौसेवक ने. लॉकडाउन में पर्यावरण सरंक्षण के लिए लगभग 2000 सहजन के पौधों की पौध तैयार कर ली है, जो आने वाले दिनों में गौसेवा में भी हरे चारे के रूप में उपयोगी सिद्ध हो सकेगी.

दरअसल, डीडवाना शहर के समाजसेवी और गौसेवक ओमप्रकाश मोदी बीते कई वर्षों से गौसेवा में दिन-रात लगे हुए हैं और 2 जगह गौशाला भी चलाते हैं. यहां हजारों गायों की निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं. 

लॉकडाउन के दौरान जब दोनों जगह गायों की देखभाल करने जा नहीं पाए और गायों के लिए हरे चारे की व्यवस्था नहीं हो पाई तो विचार आया क्यों नहीं ऐसे पौधों की पौध तैयार करूं, जो ऐसे संकट के समय गाय के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी सही साबित हो सके. इसी सोच के साथ गौशाला में पौध तैयार करना शुरू किया और 2000 से ज्यादा पौधों की पौध तैयार कर ली है, जो आगामी मानसून की सीजन में गौशाला के आसपास लगाई जाएगी. डीडवाना कस्बे में पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जगह-जगह सहजन के पौधे लगाए जाएंगे, जो पर्यावरण को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाएंगे. 

सहजन के पौधे एक औषधीय गुणों के रूप में भी जाने जाते हैं. इन पौधों को गायें भी खाती हैं और औषधियां भी बनाई जा सकती हैं. मोदी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान 2 हजार पौधे तैयार कर लिए गए और लॉकडाउन खुलने के साथ ही डीडवाना गौपाल गौशाला और छापरी गौशाला आदि स्थानों पर लगाए जाएंगे, जिसके लिए खड्ढे खुदवा लिए गए हैं, जिनमें गौबर की खाद और मिट्टी भी भरवा दी गई है. इन पौधो से पर्यावरण को संतुलित रखने मे बड़ी सफलता मिलती है और पौधे के पत्तों से विशेष औषधि भी तैयार की जा सकती है.