चित्तौड़गढ़ में 292 खाने हुई बंद, हजारों लोग हुए बेरोजगार

मेवाड़ रियासत काल के साथ ही करीब 200 वर्षों से शहर के समीपस्थ मानपुरा गांव की यह खदाने जिले सहित आस-पास के लोगों की रोजगार का सहारा बनी रही.

चित्तौड़गढ़ में 292 खाने हुई बंद, हजारों लोग हुए बेरोजगार
एनजीटी के आदेश के बाद खान विभाग द्वारा 292 खाने बंद करा दी गई.

दीपक व्यास/चित्तौड़गढ़: राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण नई दिल्ली की प्रधान बैंच के आदेश के बाद चित्तौड़गढ़ के मानपुरा क्वारी क्षेत्र में 292 खाने बंद कराने के बाद खनन क्षेत्र में सन्नाटा पसरा होने के साथ ही हजारों लोगों के समक्ष रोजगार का संकट आ गया है.  

मेवाड़ रियासत काल के साथ ही करीब 200 वर्षों से शहर के समीपस्थ मानपुरा गांव की यह खदाने जिले सहित आस-पास के लोगों की रोजगार का सहारा बनी रही. जहां के पत्थर मकान निर्माण के साथ ही विदेशों में निर्यात किया जाता रहा है. लेकिन एनजीटी के आदेश के बाद खान विभाग द्वारा विधिक प्रक्रिया पूरी कर 292 खाने बंद करा दी गई.

बता दें कि, एनजीटी प्रधान बैंच के न्यायाधीश राघवेंद्र सिंह राठौड़ और विशेषज्ञ सदस्य सत्यवान सिंह ने गत 12 फरवरी को प्रताप भानु सिंह शेखावत बनाम खान व भूविज्ञान विभाग राजस्थान मामले में सुनवाई करते हुए इन खदान को बंद कराने का आदेश दिया था, जिसकी पालना में शपथ सत्र के साथ 28 फरवरी को होने वाली सुनवाई में फैसला आएगा. ऐसे हालात में खान मालिक और रोजगार छीनने पर श्रमिक जनप्रतिनिधियों को भी कोसते नजर आ रहे हैं.

सर्वेयर जनरल ऑफ इण्डिया की रिपोर्ट के आधार पर मानपुरा क्वारी लाइसेंस क्षेत्र को नगर परिषद क्षेत्र मानकर खदाने बंद करने का आदेश जारी किया. क्षेत्र की खदाने क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए रोजगार का प्रमुख आधार थी. जिनको बंद कर देने से खदानों में कार्यरत श्रमिकों के लिए नया रोजगार तलाशना चुनौती बन गया है. 

उनका कहना है कि मानपुरा गांव नगर परिषद की पेरा फेरी में नहीं आता और ना ही यहां होने वाले खनन से किसी को खतरा है, लेकिन उसके बाद इस तरह के आदेश पारित करने से हजारों श्रमिकों के रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो गया है. बहरहाल, रोजगार से वंचित हजारों श्रमिकों को अब न्याय पालिका ही सहारा है जो आगामी 28 फरवरी को होने वाले सुनवाई में किसके पक्ष में फैसला देगी यह आने वाले समय बताएगा.