राजस्थान में 465 खिलाड़ियों को मिलेगी सरकारी नौकरी, मांगे गए आवेदन

खेल के क्षेत्रों में राजस्थान का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को बिना किसी परीक्षा के उनके मेडल के आधार पर अब नौकरी की सौगात मिल सकेगी.

राजस्थान में 465 खिलाड़ियों को मिलेगी सरकारी नौकरी, मांगे गए आवेदन
आउट ऑफ टर्न नियुक्ति पाने वाले खिलाड़ियों को विभिन्न श्रेणियों में रखा गया है.

जयपुर: खेल के क्षेत्रों में राजस्थान का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को बिना किसी परीक्षा के उनके मेडल के आधार पर अब नौकरी की सौगात मिल सकेगी. पिछले करीब दो सालों से कांग्रेस सरकार की ओर से शुरू की गई इस कवायद की अब शुरूआत हो चुकी है. 

नौकरी को लेकर खेल विभाग की ओर से आज से प्रदेश के खिलाड़ियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. 2016 से फिलहाल 465 खिलाड़ी नौकरी पाने की कतार में शामिल किए गए हैं हालांकि इस दायरे में 2014 के मेडलिस्ट खिलाड़ियों को शामिल नहीं किया गया है. खेल विभाग की ओर से प्रदेश के बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अब आउट ऑफ टर्न नौकरी देने का सिलसिला शुरू किया गया है.

आउट ऑफ टर्न लागू 2016 की पॉलिसी हुई संशोधित
राजस्थान के खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न लागू 2016 की पॉलिसी में संशोधन करने के साथ ही अब इसकी प्रक्रिया की शुरूआत कर दी गई है. इसके तहत अब राज्य के मेडिलस्ट खिलाड़ियों के लिए उनके मेडल के अनुसार सीधे नौकरी मिल सकेगी. 

खेल मंत्री अशोक चांदना ने बताया कि प्रदेश में कुल 465 खिलाड़ियों को सबसे पहले इस दायरे में रखा गया है, जो साल 2016 के बाद मेडलिस्ट रहे हैं. इसमें ए कैटेगरी में नौकरी पाने वाले 10 खिलाड़ी बी कैटेगरी में नौकरी पाने वाले 13 खिलाड़ी और सी कैटेगरी में नौकरी पाने वाले 443 खिलाड़ियों को शामिल किया गया है.

किस श्रेणी में किन लोगों को रखा गया
आउट ऑफ टर्न नियुक्ति पाने वाले खिलाड़ियों को विभिन्न श्रेणियों में रखा गया है. पहली श्रेणी में ए कैटगरी में ओलम्पिक, पैरा ओलम्पिक के पद विजेता, वर्ल्ड कप, वर्ल्ड चैम्पियनशिप, एशियन कॉमनवेल्थ, क्रिकेट वर्ल्ड कप चैम्पियनशिप के विजेता या उप विजेता को रखा गया है तो वहीं बी कैटेगरी में एशियन चैम्पियनशिप के पद विजेता, साउथ एशियन गेम्स के पदक विजेता रखा गया है जबकि सी कैटेगरी में नेशनल गेम्स और नेशनल पैरा गेम्स के पद विजेता, रणजी ट्रॉफी के विजेता शामिल किए गए हैं.

हालांकि 2014 के मेडिलिस्ट खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि उन्हें भी लाभ मिलेगा लेकिन नियमों की पेचीदगियों की वजह से उनको लाभ नहीं मिल सका. इसको लेकर खेल मंत्री अशोक चांदना ने कहा कि अगर इन पेचीदिगियों के साथ आगे बढ़ा जाता थो इन 465 खिलाड़ियों की नौकरी भी कोर्ट में फंस जाती लेकिन इन खिलाड़ियों को भी निराश होने की जरुरत नहीं है. आगे इनके लिए भी कोई रास्ता निकाला जाएगा.