सांभर झील के बाद नागौर के नावां में बॉटुलिज्म का अटैक, मृत मिले 5 हजार से ज्यादा पक्षी

नागौर जिले के नावां इलाके में बैक्टीरिया ने तेज़ी से पक्षियों को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया है. 

सांभर झील के बाद नागौर के नावां में बॉटुलिज्म का अटैक, मृत मिले 5 हजार से ज्यादा पक्षी
नावां क्षेत्र में रेस्क्यू काम भी सही से नहीं हो पा रहा है.

दीपक गोयल, जयपुर: सांभर झील से अभी एवियन बॉटुलिज्म का खतरा टला नहीं है. सांभर झील के जयपुर से सटे इलाकों में इस बैक्टीरिया की मार कम हुई तो नागौर जिले के नावां इलाके में बैक्टीरिया ने तेज़ी से पक्षियों को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया है. 

नावां क्षेत्र में अवैध खनन के चलते रेस्क्यू का काम भी समय पर नहीं हो पा रहा है. मामले में जयपुर कलेक्टर ने जिला पर्यावरण समिति की बैठक की, जिसमें हालात की गंभीरता सामने आने पर उन्होंने भी जिम्मेदार अधिकारियो के में त्वरित एक्शन के डायरेक्शन दिए और नागौर कलक्टर से बात कर उन्हें नावां क्षेत्र में रेस्क्यू के काम को को लेकर तेजी से काम करने के लिए भी बात की.

सांभर झील में 12 नवंबर से चलाये जा रहे ऑपेरशन के किए कराये कामकाज पर पानी फिर सकता है. एवियन बॉटुलिज्म की मार जयपुर जिले में कम हुई तो इसने नागौर जिले में अपना असर तेजी़ दिखाना शरू कर दिया है. नावां क्षेत्र में रेस्क्यू काम भी सही से नहीं हो पा रहा है. मौके पर पहुंचे वॉलिंटियर्स की मानें तो अवैध खनन करने वाले शाम चार बजे ही नमक बनाने के लिए पानी में करंट दौड़ा देते हैं. इससे मौके पर मारे जा रहे पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. 

बताया जा रहा है कि अकेले नावां क्षेत्र में ही अभी पांच हजार से ज्यादा पक्षियों के शव इधर-उधर बिखरे पड़े हैं. मामले में जयपुर जिला कलेक्टर ने आज जब जिला पर्यावरण समिति की बैठक की. कई नए तथ्य सामने आए. मामले की गंभीरता को समझते हुए हुए मौके पर करंट रोके जाने, स्थानीय टीम की अन्य विभागों के साथ मिलकर तेज़ी से काम करने और ड्रोन, समेत नाव और दूसरे जरूरी संसाधन नावां पहुंचाए जाने के निर्देश दिए गए.

एवियन बॉटुलिज्म को लेकर विशेषज्ञ पहले ही चेता चुके हैं कि झील में एक भी मृत पक्षी मौजूद रहा तो बॉटुलिज्म का खतरा और पक्षियों के मरने का सिलसिला जारी रहेगा. ऐसे में झील के दूसरे हिस्से में अगर पांच हजार से ज्यादा मृत पक्षी अभी मौजूद हैं तो साफ है कि बॉटुलिज्म को अभी काबू में नहीं लाया जा सका है. ऐसे में झील के दुर्गम क्षेत्रों में ऑपरेशन क्लीन को फिर से गति देनी होगी, नहीं तो इसका खामियाजा़ अब तेज़ी सर्दी में आने वाले पक्षियों को भी उठाना होगा. 

मामले में जयपुर कलेक्टर ने वन विभाग, सांभर साल्ट‌स, बिजली विभाग, चिकित्सा विभाग, शिक्षा विभाग और पशु पालन विभाग समेत वहां काम कर एनजीओ से कहा है कि जब तक सभी मृत पक्षी पूरी झील से साफ न हो जाएं, काम पूरी तेज़ी से जारी रखें. मौके पर एक वॉच टावर लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं. झील पर आ रहे और झील से दूसरी जगह जा रहे पक्षियों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं.