कोटा: शिक्षकों के लिए तरस रहा सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय, 66% पद पड़े हैं खाली

विश्वविद्यालय में मौजूदा समय पर टीचिंग और नॉन टीचिंग के कुल मिलाकर लगभग 55 % से ज्यादा पद खाली पड़े हैं यानी की यूं कहे तो राजस्थान की पहली तकनीकी यूनिवर्सिटी मात्र लगभग 44% स्टाफ के दम पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है.

कोटा: शिक्षकों के लिए तरस रहा सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय, 66% पद पड़े हैं खाली
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में टीचिंग पदों की रिक्तियों का आकंड़ा वाक़ई चिंताजनक है.

कोटा: राज्य में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार ने कोटा में एक तकनीकी विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की, जिसके तहत साल 2006 में अभियांत्रिकी महाविद्यालय कोटा, रावतभाटा रोड को राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय का संघटक कॉलेज मानकर इसी में राजस्थान का पहला तकनीकी विश्वविद्यालय खुला लेकिन दो दशक भी नहीं हुए कि इसकी हवा निकलती नजर आ रही है. 

विश्वविद्यालय में मौजूदा समय पर टीचिंग और नॉन टीचिंग के कुल मिलाकर लगभग 55 % से ज्यादा पद खाली पड़े हैं यानी की यूं कहे तो राजस्थान की पहली तकनीकी यूनिवर्सिटी मात्र लगभग 44% स्टाफ के दम पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है. इसके साथ ही वर्ष 2011 से भर्ती के नाम पर बार-बार विज्ञप्ति जारी कर बेरोजगार युवाओं के साथ भद्दा मजाक तो किया जा ही रहा है, इसके अलावा इन्हीं बेरोजगारों से अभी तक 100 लाख रुपये से ज्यादा एप्लीकेशन फॉर्म फीस के नाम पर लिए जा चुके हैं और उन भर्ती का क्या हुआ, किसी को नहीं पता.

66 percent teachers are not available in rajasthan technical university

पहले बात करें रिक्तियों की तो इसमें टीचिंग ओर नॉन टीचिंग पद दो तरह की श्रेणी है. टीचिंग पद जिसमें संघटक कॉलेज के टीचर आते हैं, जो कॉलेज में पढ़ने वाले इंजीनियर विद्यार्थी को अभियंत्रिकी के बारे में अध्यन करवाते हैं. उनको अपने अनुभव, शोध, तकनीकी ज्ञान के बारे में अवगत करवाते हैं और नॉन टीचिंग वो पद होते हैं, जो की किसी भी विश्वविद्यालय का टीचिंग को छोड़कर पूरा कार्य देखते हैं, प्लेसमेंट, लेखा, एडमिन, परीक्षा, परिणाम, आदि.

रिक्तियों का आकंड़ा वाक़ई चिंताजनक 
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में टीचिंग पदों की रिक्तियों का आकंड़ा वाक़ई चिंताजनक है. स्वीकृत पदों में से मात्र 36.78% ही टीचिंग स्टाफ कॉलेज में कार्यरत जबकि 63.21% पद खाली हैं. विश्वविद्यालय में टीचिंग के कुल 261 पद स्वीकृत हैं लेकिन उनमें से 165 पद खाली पड़े हैं और मात्र 96 पद ही वर्तमान में भरे हैं. प्रोफेसर की पोस्ट में 37 पद स्वीकृत हैं लेकिन उसमे सिर्फ 10 पद ही भरे हैं बल्कि 27 पद खाली हैं मतलब 30% से भी कम प्रोफेसर विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं. 

नैनो टेक्नोलॉजी को छोड़कर सभी पद रिक्त हैं
सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक & कम्युनिकेशन ब्रांच में क्रमश: 6,5,5,3,3 पद स्वीकृत हैं लेकिन वर्तमान में 3,2,1,1,2 प्रफेसर ही कार्यरत हैं जबकि अन्य विषय पेट्रोलियम, एयरोनॉटिकल, P&I, आईटी, MBA आदि में 1-1 पद स्वीकृत हैं और नैनो टेक्नोलॉजी को छोड़कर सभी रिक्त हैं. अब बात की जाए एसोसिएट प्रोफेसर की तो कुल 68 पद स्वीकृत हैं जबकि मात्र 19 पद ही भरे हैं और 49 पद खाली हैं मतलब इसमें भी 30% से कम एसोसियेट प्रोफेसर विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं, जिसमें सबसे ज्यादा सिविल & इलेक्ट्रिकल विभाग में जिसमें 10 और 9 स्वीकृत पदों में से 4-4 पद भरे हुए हैं जबकि मैकेनिकल विभाग की बात की जाए तो 9 स्वीकृत पदों में से मात्र 1 पद ही भरे हैं.

असिस्टेंट प्रोफेसर भी नहीं पूरे
ऐसे ही बात अब असिस्टेंट प्रोफेसर की की जाए तो 156 पद स्वीकृत हैं जबकि 67 पद भरे हैं और 89 रिक्त हैं, जिसमें पेट्रोकेमिकल, आईटी, MBA में कोई भी असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत नहीं है जबकि फिजिक्स में छ: और हुमांइटिस में पांच स्वीकृत पदों में मात्र 1-1 ही कार्यरत है. यह भी एक तरह की विडंबना है की पेट्रोकेमिकल, आईटी, MBA में विद्यार्थी अन्य विद्यार्थियों की तरह पूरी फीस देकर पढ़ते तो हैं लेकिन सवाल यह है कि उन्हें पढ़ाता कौन है, यह नहीं पता क्योंकि इन तीनों में न तो कोई प्रोफेसर है, न ही एसोसिएट प्रोफेसर न ही असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत है. इन तीनों ब्रांच में कुल 25 पद स्वीकृत हैं लेकिन सब के सब रिक्त.

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मात्र 49% ही भरे हैं जबकि 51% पद रिक्त
नॉन टीचिंग पदों जैसे कुलपति, प्राचार्य, परीक्षा नियंत्रक, निदेशक अकादमी से लेकर पम्प बॉय तक के कुल 382 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 187  पद फ़िलहाल भरे हुए जबकि 195 पद रिक्त. दूसरे शब्दों में कहे तो मात्र 49% ही भरे हैं जबकि 51% पद रिक्त. जिनमें परीक्षा नियंत्रक, निर्देशक, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, निदेशक अकादमी, लेखाधिकारी, विधि अधिकारी जैसे अनेक महत्वपूर्ण रिक्त हैं, वहीं, सबसे ज्यादा कनिष्ठ सहयक के सबसे ज्यादा पद 66 में से 59 पद रिक्त हैं.

विश्वविद्यालय ने बनाए लाखों रुपये
इन रिक्तियों पर किस तरह से विभिन्न विज्ञापन निकाल कर विश्वविद्यालय ने बेरोजगारों के जले पर नमक छिड़कते हुए लाखों रुपये बना लिए, यह बड़ा ही निंदनीय है. विश्वविद्यालय ने वर्ष 2011 में कनिष्ठ सहायक के 29 पदों के लिए भर्ती निकाली, जिसमें 2687 आवेदन प्राप्त हुए, जिससे विश्वविद्यालय को 8,14,000 रुपये की धन राशि प्राप्त हुई लेकिन इस भर्ती पर कोई एग्जाम नहीं करवाया गया. इसी वर्ष यूनिवर्सिटी ने अन्य टीचिंग एन्ड नॉन टीचिंग के विभिन्न पदों पर भी भर्ती विज्ञापन जारी किया, जिसमें 91 पद टीचिंग के और 18 पद नॉन टीचिंग के थे. इसमें कुल 762 आवेदन प्राप्त हुए, जिससे यूनिवर्सिटी को 3,00,930 रुकी धनराशि प्राप्त हुई लेकिन इनमे कुछ टीचिंग एवं नॉन टीचिंग मिलाकर 20 पदों पर चयन हुआ.

उसके बाद वर्ष 2013 में पुनः कनिष्ठ सहायक के 29 पदों की विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें 2128 आवेदन आए और इस बार रकम 5,34,600 रुपये प्राप्त हुई. इसी के साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 33 पदों की भी विज्ञप्ति जारी की गयी थी, जिसमें 4656 आवेदन विश्विवद्यालय को प्राप्त हुए और इससे 9,07,146 रुपये की धन राशि प्राप्त हुई. इस विज्ञापन जारी भी विश्विवद्यालय ने आवेदन की धनराशि प्राप्त करने के बाद कोई संज्ञान नहीं लिया और 2014 में विभिन्न पदों की भर्ती विज्ञापन जारी किया, जिसमें क्लर्क ग्रेड-II के 29 पदों के लिए वापस से आवेदन मांगे गए और इस बार 2864 आवेदन के जरिये यूनिवर्सिटी को 18,74,010 रुपये की धनराशि प्राप्त हुई. इसके अलावा 37 अन्य विभिन्न नॉनटीचिंग पद की भी विज्ञप्ति इसी में जारी की गई थी, जिसमें कुल 1659 आवेदन आए और उससे 5,64,550 रुपये की धनराशि यूनिवर्सिटी को प्राप्त हुई जबकि इसी विज्ञापन में 41 टीचिंग पदों के लिए 453 आवेदन आये और 1,93,750 रु की धनराशि भी. कुल मिलाकर इस विज्ञापन से यूनिवर्सिटी को 26,32,310 रुपये की धनराशि अर्जित हुई और इस विज्ञापन पर भी इन नॉन टीचिंग पदों पर कोई भर्ती नहीं हुई जबकि टीचिंग के 41 में से 19 पदों का चयन हो गया. 

नॉनटीचिंग में 12 लोगों की भर्ती हुई है
सूचना के अधिकार के तहत दी गयी सुचना से यह प्रतीत होता है कि वर्ष 2012 से अब तक टीचिंग में 56 एवं नॉनटीचिंग में 12 लोगों की भर्ती हुई है, वर्ष 2014 में यह अंतिम भर्ती थी, जिसमें टीचिंग के 19 अभ्यर्थी का चयन हुआ और उसके बाद से अब तक कोई भर्ती टीचिंग में नहीं हुई जबकि नॉन टीचिंग में अंतिम भर्ती वर्ष 2013 में हुई थी. इसमे एकं पुस्तकालय अध्यक्ष और एक कनिष्ठ अभियंता की थी. उसके बाद से अब तक कोई भर्ती नहीं हुई जबकि वर्ष 2011 से अब तक विश्वविद्यालय ने विभिन्न भर्ती विज्ञापनों के जरिये 1,05,77,536/- रुपये की धनराशि एकत्र की है या यूं कहें तो बेरोजगारों से हर साल यूनिवर्सिटी लाखो रुपये नौकरी के सपने दिखाकर हड़प रही है. 

ये हालात राजस्थान के सबसे बड़े और पहले तकनीकी विश्वविद्यालय के हैं. छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ होता नज़र आता है.