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राजस्थान: सरकार को लेकर BJP नेता का बड़ा बयान- 'कांग्रेस विधायकों में होगी उठापटक'

बीजेपी विधायक वासुदेव देवनानी ने राजस्थान में भी कांग्रेस विधायकों के उठापटक के संकेत दिए हैं. 

राजस्थान: सरकार को लेकर BJP नेता का बड़ा बयान- 'कांग्रेस विधायकों में होगी उठापटक'
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने से पहले ही पूरी पार्टी दो खेमों में बटी हुई थी.

जयपुर: कर्नाटक औग गोवा में कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद बीजेपी विधायक वासुदेव देवनानी ने राजस्थान में भी कांग्रेस विधायकों के उठापटक के संकेत दिए हैं. वासुदेव देवनानी ने कांग्रेस को लेकर अपने बयान में कहा है कि 'राजस्थान में भी कांग्रेस विधायकों में होगी उठापटक. राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद राजस्थान में कांग्रेस नेता ख़ुद को असुरक्षित पा रहे हैं.'

साथ ही बीजेपी विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा है कि कर्नाटक और गोवा में कांग्रेस विधायकों में भगदड़ मची हुई है और इससे बीजेपी का इससे कांग्रेसीकरण नहीं होगा बल्कि कांग्रेस का भाजपाईकरण होने जा रहा है. गौरतलब है कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने से पहले ही पूरी पार्टी दो खेमों में बटी हुई थी. हालांकि, चुनाव जीतने के बाद आलाकमानों के द्वारा दो पक्षों की दूरी को कम करने की पूरी कोशिश की गई. 

लेकिन तमाम कोशिशों के बाद ऐसा लगा नहीं कि पार्टी में गुटबाजी खत्म हो गई है. इस गुट में एक गुट सीएम अशोक गहलोत का गुट था तो दूसरा उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का गुट था. साथ ही सीएम और डिप्टी सीएम परोक्ष रूप से आमने-साने थे. लेकिन अब हालात और बिगड़ रहे हैं.

दरअसल, राजस्थान में कांग्रेस की जीत के साथ ही ऐसा माना जा रहा था कि सचिन पायलट प्रदेश के मुखिया होंगे और सीएम की कुर्सी संभालेंगे. हालांकि, अशोक गहलोत भी इसके प्रबल दावेदार थे क्योंकि उन्होंने पहले भी इस पद को संभाला था. वहीं, दिल्ली के निर्देशानुसार अशोक गहोलत को सीएम और सचिन पायलट को डिप्टी सीएम बनाया गया. लेकिन इसके बाद ही दोनों गुटों में खींचतान और बढ़ गई.

राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने के छुपे हुए अभियान से परेशान हैं, और बजट पेश करने के बाद इस मुद्दे पर आर-पार करने के मूड में हैं. गहलोत ने इशारों इशारों में आलाकमान को भी साफ कर दिया राजस्थान का बॉस मैं हूं. यहां दो नेता नहीं चलेंगे.

बहरहाल, राजस्थान में दोनों के बीच की लड़ाई अब इस स्तर पर पहुंच गई है कि अगर फैसला नहीं हुआ तो पार्टी के लिए ठीक नहीं होगा राज्य में सरकार चलाना भी कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा.