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उदयपुर में एक मार्बल व्यवसायी बना बेसहारा मरीजों का मसीहा, जानिए पूरा मामला

वह पिछले करीब 15 सालों से निस्वार्थ भाव से एमबी हॉस्पिटल की आपताकालीन इकाई में आने वाले मरीजों की मदद करने में जुटे हुए हैं.

उदयपुर में एक मार्बल व्यवसायी बना बेसहारा मरीजों का मसीहा, जानिए पूरा मामला
वह विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से मरीजों को सहायता उपलब्ध करवाते है.

अविनाश जगनावत/उदयपुर: कई बार किसी व्यक्ति के जवीन में ऐसे घटनाएं घटती हो जाती जो उसके जीने के मकसद को ही बदल देते है. इसके बाद वो परिवार और समाज के लिए भी प्रेरणा को स्त्रोत बन जाता है. कुछ ऐसा ही वाकिया हुआ था उदयपुर के एक मार्बल व्यवसायी राकेश अग्रवाल के साथ. जिसके बाद उन्होने लावारिस और बेसहारा मरीजों की मदद करना ही अपने जीवन का उद्धेश्य बना दिया.

उदयपुर संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में आने वाले मरीजों को सेवा करने वाला यह सख्श सरकारी कर्मचारी नहीं बल्की शहर का जाना माना मार्बल व्यवसायी राकेश अग्रवाल है. जो पिछले करीब 15 सालों से निस्वार्थ भाव से एमबी हॉस्पिटल की आपताकालीन इकाई में आने वाले मरीजों की मदद करने में जुटे हुए हैं. वे मरीजों को एक्सरे, ईसीजी, एमआरआई रूम में लेजाने के साथ उन्हे वार्ड में भर्ती कराने की मदद करते है. 

 

साथ ही जरूरत पड़ने पर विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से उन्हें रक्त सहित अन्य सहायता भी उपलब्ध करवाते है. अग्रवाल बताते है कि एक हादसे ने उनके जीवन में यह बदलाव ला दिया. दरअसल करीब 15 साल पहले वे अपने दोस्त के साथ राणकपुर से उदयपुर की ओर हा रहे थे, लेकिन राणकपुर के घाटे में उनका एक्सिडेंट हो गया था. जैसे तैसे वो रात को करीब एक बजे एमबी हॉस्पिटल के आपातकालिन इकाई पहुंचे. उस समय उनकी मदद करने वाला वहां पर कोई नहीं था. बड़ी मुश्किलों का सामना करते हुए रात में उन्होने अपना उपचार करवाया. इस हादसे के बाद उन्होने ठान लिया कि वे हर रोज हॉस्पिटल में जाएगें और वहां आने वाले मरीजों की सेवा करेगें. तभी से लेकर अब तक वे लगातार अपने इस मिशन को पुरा करने में जुटे हुए है. 

यूं तो राकेश ने इस दौरान सैकडों लोगों की मदद की है जो आज भी उन्हे याद करते है. इनमें से ऐसे कई लोग है जिनका जीवन ही अग्रवाल के कारण बच पाया है. कुछ ऐसा ही हुआ शहर के एक दिव्यांग संजीव कुमार गुप्ता के साथ. एक्सिडेंट के बाद गंभीर अवस्था में उन्हे एमबी हॉस्पिटल लाया गया. इस दौरान काई अपना उनके साथ नहीं था, लेकिर मरीजों की सेवा के प्रति तत्पर रहने वाले अग्रवाल ने उनकी हर संभव मदद की और उनका उपचार करवाया. आज गुप्ता अकेले ऐसे सक्ष्य नहीं है जो उन्हे साधुवाद देते हुए नहीं थकते. 

बहरहाल सरकारी हॉस्पिटल में अव्यवस्थाओं को लेकर कई बार लोग शिकात तो करते है लेकिन उन्हे दूर करने के लिए अपने स्तर पर कोई प्रयास नहीं करते. ऐसे में राकेश अग्रवाल जैसे लोग उनके लिए प्ररेणा के स्त्रोत है जो सरकारी सिस्टम की कमियां निकालने में तो अग्रणी भूमिका निभाते है लेकिन उनकों दूर करने के लिए काई प्रयास नहीं करते.