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राजस्थान में नजर आई विभिन्न देशों की आध्यात्मिक परंपराओं की झलक

इस साल डब्ल्यूएसएसएफ में मिस्र, तुर्की, फ्रांस, ईरान, पेरिस, मंगोलिया, स्वीडन, स्कॉटलैंड, स्पेन और एनाटोलिया समेत कई देशों के कलाकारों ने शिरकत की

राजस्थान में नजर आई विभिन्न देशों की आध्यात्मिक परंपराओं की झलक
डब्ल्यूएसएसएफ का पहला संस्करण नागौर में 2007 में संपन्न हुआ था

जोधपुर: एक ही मंच पर चीन, मंगोलिया, यूरोप, एनाटोलिया, फ्रांस और स्पेन की विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े कलाकारों की प्रस्तुतियां कभी न भूल पाने वाला अनुभव होता है. हाल ही में यहां आयोजित एक समारोह में दुनिया भर की, खास कर पूर्व, एशिया और अफ्रीका की आध्यात्मिक संगीत परंपराओं का संगीत प्रेमियों ने आनंद लिया. 

भारतीय संगीत का आध्यात्म और दिव्यता से गहरा जुड़ाव रहा है. इतिहास की ओर देखें तो देवदासी परंपरा से शुरू होते हुए सूफी संगीत और निर्गुण-सगुण भक्ति धारा तक की संगीत परंपराएं देखने को मिलती हैं. लेकिन दुनिया में ऐसी संगीत परंपराओं का पालन करने वाले हम अकेले नहीं हैं.

मेहरानगढ़ संग्रहालय न्यास की ओर से आयोजित 'वर्ल्ड सेक्रेड स्पिरिट फेस्टिवल' (डब्ल्यूएसएसएफ) के 12वें संस्करण में चीन, मंगोलिया, यूरोप, एनाटोलिया, फ्रांस और स्पेन से आए कलाकारों ने ऐसी ही विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं की झलक दिखाई. 

इस मौके पर मीडिया के साथ एक विशेष बातचीत में डब्ल्यूएसएसएफ की निदेशक और मेहरानगढ़ संग्रहालय न्याय की न्यासी राजकुमारी शिवरंजनी राजे ने कहा, 'डब्ल्यूएसएसएफ की कोशिश दुनियाभर की, खास कर पूर्व, एशिया और अफ्रीका की आध्यात्मिक संगीत परंपराओं को भारत की समृद्ध विरासत से जोड़ने की होती है. हर साल अहिछत्रगढ़ किला नागौर से शुरू होने वाला यह उत्सव मेहरानगढ़ किले में समाप्त होता है और दुनियाभर से आध्यात्मिक संगीत की पैरोकार प्रतिभाओं को सीमाओं से परे एक स्थान पर लाता है'. 

इस साल डब्ल्यूएसएसएफ में मिस्र, तुर्की, फ्रांस, ईरान, पेरिस, मंगोलिया, स्वीडन, स्कॉटलैंड, स्पेन और एनाटोलिया समेत कई देशों के कलाकारों ने शिरकत की. भारत की ओर से राजस्थान के मांगणियार और लांगा समुदाय की, सितारवादक शुजात खान और नागा नृत्य नायिक इत्यादि की प्रस्तुतियां हुईं.

इस संगीत उत्सव के विचार के बारे में राजे ने कहा, 'डब्ल्यूएसएसएफ का पहला संस्करण नागौर में 2007 में संपन्न हुआ था. यह नागौर किले के पुनरोद्धार का पहला चरण पूरा होने का उत्सव था. चूंकि नागौर चिश्ती सूफी का महत्वपूर्ण केंद्र है तो वहां की सूफी संगीत परंपरा को सहेजने की दृष्टि से इस उत्सव की रुपरेखा बनी. बाद में इस उत्सव का समापन कार्यक्रम मेहरानगढ़ किले में किया जाने लगा'.

राजे ने कहा कि इस उत्सव के माध्यम से कई आध्यात्मिक परंपराओं के संगीत कलाकारों को मंच मिला है. हर साल इस उत्सव की रुपरेखा बनाते समय हमारी कोशिश होती है कि अलग-अलग परंपरा के संगीत कलाकारों को यहां लाया जाए. डब्ल्यूएसएसएफ का आयोजन इस साल मेहरानगढ़ किले में 22 से 24 फरवरी के बीच हुआ.

कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध वायलिन वादक और कविता कृष्णामूर्ति एवं एल. सुब्रहमण्यम के सुपुत्र अंबी सुब्रहमण्यम ने कर्नाटक संगीत की शास्त्रीय वादन परंपरा पेश की. ईरान के शिराज बैंड ने फारसी शास्त्रीय सूफी संगीत की परंपरा, एनाटोलिया के टेली टर्ननालर बैंड ने वहां की आशिक परंपरा और अलेवी परंपरा, स्कॉटलैंड के रुरा बैंड ने उत्तरी भारत की मशक परंपरा और अजरबेजान के इंगी बैंड ने वहां की बाकू अजेरी परंपरा की प्रस्तुति दी.

(इनपुट-भाषा)