आधार सेंटर को लेकर रिश्वत खेल का हुआ बड़ा खुलासा, जयपुर से दिल्ली तक जुड़े अधिकारियों के तार

फर्म का मुख्य काम आधार सेंटर अलॉटमेंट के लिए जयपुर और दिल्ली में बैठे अधिकारियो के लिए शिकार तलाशना और उनसे रिश्वत की रकम लेकर जयपुर और दिल्ली में बैठे अधिकारियो तक पहुंचाना है.

आधार सेंटर को लेकर रिश्वत खेल का हुआ बड़ा खुलासा, जयपुर से दिल्ली तक जुड़े अधिकारियों के तार
आधार सेंटर को लेकर रिश्वत खेल का हुआ बड़ा खुलासा.

मनवीर सिंह/अजमेर: भारत में अब किसी को आधार कार्ड (Aadhar Card) का महत्व बताने की जरूरत नहीं है. आपके दस्तावेजों की शृंखला में आधार कार्ड सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में अपना स्थान रखता है. यह अलग बात है कि केंद्र और राज्य सरकार के तमाम दावों के विपरीत आज भी आधार कार्ड बनवाना या उसमे करेक्शन करवाना किसी गढ़ को जीत लेने से कम बात नजर नहीं आता.

इसका सबसे बड़ा कारण आज भी राजस्थान में पर्याप्त संख्या में आधार सेंटर का उपलब्ध ना होना है. राजस्थान में लोग आधार सेंटर लेना चाहते हैं. लेकिन एक जिम्मेदार अधिकारी ने पूरे सिस्टम को कुछ इस अंदाज में रिश्वत की भेंट चढ़ा दिया कि अब यहां बिना चढ़ावा दिए किसी का कोई काम नहीं होता.

राजस्थान में आधार सेंटर के माध्यम से रिश्वत (Bribe) के इस खेल की खबर सबसे पहले उन पीड़ितों के माध्यम से हम तक पहुंची, जिन्हे एक लोकल सर्विस प्रोवाइडर (LSP) द्वारा सम्पर्क साधा गया. तंवर कम्प्लीट सिस्टम के नाम से पूरे राजस्थान में काम करने वाली इस फर्म का मुख्यालय डालडा फैक्ट्री रोड दुर्गा पूरा जयपुर में स्थित है.

यहीं इस फर्म द्वारा एक कॉल सेंटर का भी संचालन किया जाता है. कहने को यह फर्म कई काम एक साथ करती है. लेकिन इसका मुख्य काम आधार सेंटर अलॉटमेंट के लिए जयपुर और दिल्ली में बैठे अधिकारियो के लिए शिकार तलाशना और उनसे रिश्वत की रकम लेकर जयपुर और दिल्ली में बैठे अधिकारियो तक पहुंचाना है.

इस खेल में यह फर्म हर महीने लाखों रुपए के वारे न्यारे करती है. जानकारी के अनुसार, सबसे पहले तंवर कम्प्लीट सिस्टम नाम की फर्म आधार कार्ड सेंटर के लिए अप्लाई करने वाले लोगों से सम्पर्क साधती है. इसके बाद किसी तरह से झांसा देकर उनसे 30 हजार से 35 हजार रुपए तक की रकम वसूली जाती है.

इस खेल के राजस्थान में कई खिलाड़ी हैं.  लेकिन सबसे बड़ा खिलाड़ी तंवर कम्प्लीट सिस्टम का संचालक हेमराज है.  हेमराज तंवर ही वो दलाल है जो सूचना व प्रौद्योगिकी विभाग (DOIT) और दिल्ली में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDA) में बैठे बड़े अधिकारियों के सम्पर्क में रह कर रिश्वत के इस खेल को संचालित करता है.

तंवर द्वारा दावा किया जाता है कि आधार सेंटर अलॉटमेंट के लिए जब तक उसके माध्यम से रिश्वत की रकम का भुगतान नहीं किया जाता. तब तक जयपुर और दिल्ली में बैठे अधिकारी किसी आधार सेंटर को अप्रूवल नहीं देते हैं. हेमराज तंवर ने खुलासा करते हुए बताया कि उसके कॉल सेंटर से जो फोन किए जाते हैं, उसके माध्यम से हर महीने 100 से अधिक फाइलों का सौदा तय होता है. हर फाइल पर रिश्वत के रूप में अधिकारियों के लिए 20 हजार रुपए प्रति फाइल वसूले जाते हैं जबकि तंवर का खुद का हिस्सा इसके अलावा होता है.

तंवर ने दावा किया कि एक आधार सेंटर के लिए वो तीस से पैंतीस हजार रुपए की रिश्वत वसूल करता है. जिसमें से वो अपना और संबंधित एलएस पी का हिस्सा निकालने के बाद शेष रकम संबंधित अधिकारी तक पहुंचाता है. वहीं, इस खेल का मुख्य सरगना एक उच्च अधिकारी है, जिस पर भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का भार सौपा था.

इस अधिकारी से सम्पर्क करने के दौरान कई अहम बातों का खुलासा हुआ. यह रिश्वतखोर अधिकारी रिश्वत का सौदा करते समय पूरी सावधानी और सतर्कता बरतता है. यह अधिकारी केवल व्हाट्सप्प वॉइस कॉल पर ही बात करता है.  इस अधिकारी द्वारा यह सतर्कता इसलिए बरती जाती है ताकि कोई इसकी कॉल को रिकॉर्ड ना कर सके. साथ ही सीबीआई या किसी प्रदेश की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यूनिट इसके मोबाइल फोन को सर्विलांस पर नहीं ले पाए.

अधिकारी ने फोन वार्ता के दौरान रिश्वत ना केवल लेना स्वीकार किया, बल्कि इस बात को भी बताया कि उसके बिकने की कीमत क्या है? खुलासा इस बात का भी किया कि रिश्वत के इस खेल में वो अकेला नहीं है. दिल्ली में उनके दो सहयोगियों के साथ ही जयपुर में बैठे अधिकारी भी खेल का हिस्सा है और रिश्वत की रकम का बंटवारा इन सभी के बीच  होता है.  

व्हाट्सप्प वौइस् कॉल पर अधिकारी का साफ कहना था कि आप उन फाइलों के बारे में दो जिनका लेवल वन और टू  क्लियर है. इसी दौरान अधिकारी द्वारा हमें आश्वस्त कि यदि रिश्वत का मामला तय होता है तो उनके द्वारा वह लिस्ट हमें भेज दी जाएगी जो उनके पास अप्रूवल के लिए आई है. इसके लिए भी अधिकारी द्वारा एक नायाब तरीका निकाला गया.  

अधिकारी द्वारा हमसे एक नई मेल आईडी बनवाई गई और उसका यूजर व पासवर्ड हमसे व्हाट्सप्प के माध्यम से ले लिया. इस अधिकारी द्वारा कुछ ही देर में वह लिस्ट हमारे नए बनाए ईमेल पर भेज दी जो की ईमेल के ड्राफ्ट बॉक्स में थी.

इस अधिकारी द्वारा जो लिस्ट भेजी गई थी वह वही लिस्ट थी जो राजस्थान डीओआईटी द्वारा उनके पास अप्रूवल के लिए भेजी गई थी. अधिकारी का कहना था कि इस लिस्ट में से वो तमाम नाम जो आपसे संबंधित है और रिश्वत देकर अप्रूवल चाहते हैं उन्हें शार्ट लिस्ट कर लिया जाए. इस लिस्ट में जो नाम रिश्वत देने वालों के है उनसे 10 हजार रुपए इस अधिकारी के होंगे.

अधिकारी के अनुसार इस दस हजार रुपए का बंटवारा दिल्ली बैठे तीन अधिकारियो के बीच होगा. लेकिन जो आवेदक केवल लेवल फर्स्ट क्लियर है. उन्हें लेवल सैकेंड के लिए तीन हजार रुपए अलग से भुगतने होंगे, जो जयपुर डीओआईटी में बैठे अधिकारियों को बतौर रिश्वत दिए जाएंगे.

रिश्वत के इस खेल में पारंगत हो चुके इस अधिकारी के अनुसार यदि अप्रूवल फाइलों की संख्या अधिक होगी तो रिश्वत की रकम में भी कमी की जा सकेगी. दरअसल, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह अधिकारी भारतीय प्रशसनिक सेवा से जुड़ा एक अधिकारी है.  यह एक ऐसा अधिकारी है जिसे केंद्र सरकार ने यूआईडीए में असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल के रुप में नियुक्त किया है.

मूलतः भारतीय दूरसंचार सेवा के इस अधिकारी ने कार्यक्षेत्र में राजस्थान के साथ ही मध्य प्रदेश उत्तराखंड और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली आता है. यह 1999 बैच के अधिकारी है जो सरकार के अंतर्गत डायरेक्टर मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के पद पर कार्यरत थे. लेकिन 5 अक्टूबर 2018  को इन्हे असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल फाइनेंस एंड अकाउंट्स के रूप में यूडीएआई में नियुक्ति दी गई थी. तभी से यह साहब रिश्वत के इस खेल को खुलेआम खेल रहे थे.