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कोटा में शुरू हुआ 'आसमान प्रोजेक्ट', गर्भवती महिलाओं के लिए होगा मददगार

इमरजेंसी की स्थिति में जेके लोन अस्पताल में 24 घंटे मौजूद विशेषज्ञ डॉक्टर टेलीकॉलिंग से उक्त स्थान पर मौजूद स्टाफ को निर्देश देंगे. ताकि मरीज को गांव में भी हायर सेंटर का ट्रीटमेंट मिल सकेगा.

कोटा में शुरू हुआ 'आसमान प्रोजेक्ट', गर्भवती महिलाओं के लिए होगा मददगार
जिले की 8 सीएचसी को आसमान प्रोजेक्ट से जोड़ा गया है.

कोटा/ मुकेश सोनी: मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर कम करने और ग्रामीण इलाकों में बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से कोटा में “आसमान’ प्रोजेक्ट की विधिवत शुरुआत की गई है. इसके तहत कोटा के जेके लोन अस्पताल में एक टेबलेट लगाया है. चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. आरके लवानिया की मौजूदगी में गुरुवार को जेके लोन अस्तपाल के लेबर रूम से मोड़क सीएचसी से इस प्रोजेक्ट के तहत सीधे बात की गई.

8 सीएचसी पर शुरुआत
चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. आरके लवानिया ने बताया कि आसमान प्रोजेक्ट जिले की इटावा, सांगोद, मोड़क, दादाबाड़ी, सुल्तानपुर, रामगंजमंडी, सुकेत और कैथून स्वास्थ्य केन्द्रों से कनेक्ट रहेगा. प्रोजेक्ट के तहत चयनित सीएचसी पर टेबलेट स्टॉल किए गए है. इसमें मरीज से सम्बंधित सारा डाटा टैबलेट में ऑनलाइन सिस्टम के जरिए दर्ज होगा. 

इमरजेंसी की स्थिति में जेके लोन अस्पताल में 24 घंटे मौजूद विशेषज्ञ डॉक्टर टेलीकॉलिंग से उक्त स्थान पर मौजूद स्टाफ को निर्देश देंगे. ताकि मरीज को गांव में भी हायर सेंटर का ट्रीटमेंट मिल सकेगा. लवानिया ने बताया कि प्रदेश में कोटा जिले में ही आसमान प्रोजेक्ट के तहत कनेक्टिविटी की है. झालावाड़ मे अभी कनेक्टिविटी नहीं हुई.

रेफरल केस में आएगी कमी
जेके लोन अस्पताल में गायनी विभाग की प्रोफेसर डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि आसमान प्रोजेक्ट से गांवों से रेफर होने वाले केसों में कमी आएगी. इस प्रोजेक्ट की मदद से जेके लोन अस्पताल के लेबर रूम में 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टर के सम्पर्क से सीएचसी पर मोजुद डॉक्टर, मरीज की कंडीशन व हिस्ट्री के हिसाब से इलाज कर सकेगा. दूर दराज में रहने वाले मरीजों को शहर में आने की जरूरत नही पड़ेगी. जिस कारण उनका खर्चा भी बचेगा. गांव में बैठा डॉक्टर ही महिलाओं का टेलीकॉलिंग से मिले निर्देशो से इलाज कर सकेगा. गम्भीर अवस्था मे ही मरीज को रेफर किया जाएगा.