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जयपुर: फर्जी किसान बने कर्मचारियों के खिलाफ हो सकती कार्रवाई, इंटेलीजेंस पुलिस ने लिखा पत्र

राजस्थान फसली ऋण योजना वर्ष 2019-20 के बजट शुरू की गई. सहकारी बैंकों के लघु एवं सीमांत कृषकों के 30 सितंबर 2017 तक अल्पकालीन फसली ऋण में से 50 हजार तक के कर्ज माफ किए गए.

जयपुर: फर्जी किसान बने कर्मचारियों के खिलाफ हो सकती कार्रवाई, इंटेलीजेंस पुलिस ने लिखा पत्र
प्रतीकात्मक फोटो.

विष्णु शर्मा, जयपुर: प्रदेश में फर्जी किसान बने कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. राज्य की इंटेलीजेंस पुलिस (Intelligence Police) ने फर्जी किसान बनकर फसली ऋण माफी (Rajasthan Crop Loan Scheme) का लाभ उठाने का प्रयास करने वाले इन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंषा की है. इंटेलीजेंस ने एसीएस गृह और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव को कड़ी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है ताकि भविष्य में इनकी आदत पर लगाम लगाई जा सके. 

प्रदेश में राज्य सरकार ने किसानों के फसली ऋण माफ करने की घोषणा की तो सरकारी कर्मचारियों में भी लालच जग गया. प्रदेश के 7,893 कर्मचारियों ने कोऑपरेटिव बैंकों में फसली ऋण माफी योजना के तहत लाभ उठाने का प्रयास किया. उदयपुर संभाग के डूंगरपुर जिले के सर्वाधिक 1,790 कर्मचारियों के 512.06 लाख रुपये, बांसवाड़ा जिले के 695 कर्मचारियों के 2 लाख 4 हजार रुपये ऋण माफी योजना 2018 में स्वीकृत हुए थे लेकिन सरकारी कर्मचारी के अपात्र होने से प्रविष्टियां नियमानुसार ऋण माफी पोर्टल से निरस्त कर दी गई. 

लग गई ऋण माफी आवेदनों की भीड़
राजस्थान फसली ऋण योजना (Rajasthan Crop Loan Scheme) वर्ष 2019-20 के बजट शुरू की गई. सहकारी बैंकों के लघु एवं सीमांत कृषकों के 30 सितंबर 2017 तक अल्पकालीन फसली ऋण में से 50 हजार तक के कर्ज माफ किए गए. अन्य किसानों के 30 सितंबर 2017 को बकाया अल्पकालीन फसली ऋण, लघु काश्तकारों के लिए निर्धारित जोत सीमा के अनुपात में 50 हजार तक के कर्ज माफ करना था. योजना के पात्र 85 हजार किसानों के 193 करोड़ रुपये ऋण माफ किए गए. 

वर्तमान सरकार के गठन के बाद 34 हजार किसानों 103 करोड़ रुपये माफ किए गए. अक्टूबर 2019 तक 58 हजार लोगों को अल्पकालीन फसली ऋण वितरित किए गए. ऋण माफी योजना 2018 में संभाग उदयपुर के जिला डूंगरपुर जिले के 17 कार्मिकों के 512 लाख 6 हजार, जिला बांसवाड़ा के कार्य 2 लाख 4 हजार, भरतपुर संभाग के 338 लाख 45 हजार रुपये के माफी के आवेदन पोर्टल पर आए. नियमानुसार अपात्र के कारण ऋण माफी के पात्र व्यक्तियों के खातों में व्यक्तिगत कारणों से हुई प्रविष्टियों को निरस्त कर दिया गया.

कौन लोग नहीं ले सकते इन योजनाओं का लाभ
राज्य सरकार ने सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठाने वालों की सूची पहले ही जारी कर रखी है. फसली ऋण माफी योजना (Rajasthan Crop Loan Scheme) पर भी यह सूची लागू होती है. इस सूची में कई श्रेणियों के लोगों को शामिल किया गया है. इस सूची में राज्य और केंद्र के वर्तमान पूर्व मंत्री, वर्तमान एवं पूर्व सांसद, आयकर देने वाले किसान, केंद्र-राज्य के सरकारी कर्मचारी-अधिकारी, नियमित पेंशन लेने वाले रिटायर कर्मचारी-अधिकारी, विभिन्न निगमों में नियुक्त पदाधिकारी, विभिन्न आयोगों में नियुक्त अध्यक्ष एवं सदस्य, सभी सार्वजनिक-प्राइवेट-सहकारी बैंकों के पदाधिकारी, कर्मचारी-पेंशनर्स, पंचायती राज संस्थाओं के कर्मचारी, वर्तमान-पूर्व प्रधान, जिला प्रमुख, सहकारी संस्थाओं में पूर्णकालिक कर्मचारी योजना का लाभ नहीं ले सकते.

इंटेलीजेंस ने रिपोर्ट में कड़ी कार्रवाई की बात कही
इंटेलीजेंस ने रिपोर्ट में कहा है कि पूरे प्रदेश में बैंकों की सजगता से सभी जिलों के कोऑपरेटिव बैंकों के 21 करोड़ 76 लाख रुपये बच गए. नहीं तो अपात्र व्यक्ति भी इस राशि का उपयोग कर लेते. इससे राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान होता. इंटेलीजेंस के अनुसार, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, बीकानेर, बूंदी, चूरू, दौसा, हनुमानगढ़, जयपुर, जालौर, झुंझुनूं, कोटा, नागौर, सीकर, सिरोही,  श्रीगंगानगर आदि जिलों में कर्मचारियों ने ऋण माफी का लाभ लेने का प्रयास किया. इन कर्मचारियों ने गलत तथ्य पेश कर फसली ऋण माफी योजना की फर्जी तरीके से पात्रता हासिल करने का प्रयास किया. बैंकों की सजगता से राशि का लाभ नहीं उठा पाए, ऐसे व्यक्तित्व कार्मिकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस आदत पर रोक लग सके. इस मामले में उच्च स्तरीय जांच भी करवाई जाए.