कोटा: साइकिल स्टैंड ठेके पर रिकवरी में ढिलाई का मामला, बाबू के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश

बुधवार को एमबीएस अस्पताल में हुई आरएमआरएस की बैठक में संभागीय आयुक्त डॉ. एल एन सोनी ने साइकिल स्टैंड ठेके और जेरोक्स ठेके में ढिलाई बरतने पर बाबू के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

कोटा: साइकिल स्टैंड ठेके पर रिकवरी में ढिलाई का मामला, बाबू के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
दस महीनों से अस्पताल प्रशासन पूर्व संवेदक से पैसा वसूल करना ही भूल गया था.

मुकेश सोनी, कोटा: एमबीएस अस्पताल में साइकिल स्टैंड ठेके के पेटे (बदले) करीब 12 लाख 50 हजार रुपये की रिकवरी में ढिलाई बरतने पर संभागीय आयुक्त ने नाराजगी जताई है. 

बुधवार को एमबीएस अस्पताल में हुई आरएमआरएस की बैठक में संभागीय आयुक्त डॉ. एल एन सोनी ने साइकिल स्टैंड ठेके और जेरोक्स ठेके में ढिलाई बरतने पर बाबू के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. वहीं, 15 लाख की  रिकवरी समय पर नहीं करने के मामले में सहायक लेखाधिकारी से भी नाराजगी व्यक्त की है. 

गोरतलब है कि आरएमआरएस में वित्तीय हानि होने की खबर "जी मीडिया" में प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया था. संभागीय आयुक्त द्वारा अस्पताल प्रशासन से पूरे मामले की जानकारी मांगने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया था. आनन-फानन में अस्पताल अधीक्षक की ओर से साइकिल स्टैंड के पूर्व संवेदक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया था.

ये है मामला
अस्पताल प्रशासन ने साल 2017 में अस्पताल परिसर स्थित साइकिल स्टैंड का ठेका की निविदा जारी की थी. निविदा के तहत सालाना करीब 32 लाख 50 रुपये राशि तय की थी. संवेदक ने साल भर ठेका भी चलाया लेकिन समय अवधि पूरी होने के बाद भी जब अस्पताल प्रशासन दोबारा टेंडर नहीं निकाल सका तो उसी संवेदक को तीन माह का अवधि विस्तार दे दिया गया. तीन माह तक ठेका संचालक ने साइकिल स्टैंड के पेटे लोगों से राशि वसूली लेकिन अस्पताल में जमा नहीं करवाई. 

इस बीच अस्पताल प्रशासन ने नई निविदा जारी कर दी. दूसरे संवेदक के नाम ठेका जारी हो गया. इधर दस महीनों से अस्पताल प्रशासन पूर्व संवेदक से पैसा वसूल करना ही भूल गया, जिसके चलते आरएमआरएस को करीब 12 लाख 50 हज़ार की वित्तीय हानि हुई. 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ठेका अवधि खत्म होने पर एक शातिर बाबू ने संवेदक फर्म की धरोहर राशि रिलीज कर दी थी. लेकिन 3 माह का अवधि विस्तार बढ़ाने के दौरान ठेका संवेदक से ना तो एडवांस चेक लिए, न ही एफडीआर जमा करवाई. अस्पताल प्रशासन भी पूर्व संवेदक से राशि वसूलना भूल गया. कागजो में खेल करने के चक्कर में बैक डेट में पूर्व संवेदक को नोटिस भेजता रहा. मामले का खुलासा होने के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है, जिसमें साइकिल स्टैंड ठेके की राशि 45 लाख रुपये बताई गई है.