अयोध्या मामले पर फैसले के बाद पूनिया ने कहा, अब विकास जैसे मुद्दों पर केंद्रीत रहेगी राजनीति

ऐसा भी नहीं है कि निकाय चुनाव के कारण राजनीति बदल रही हो लेकिन राजनीति में इस बदलाव का सवाल अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया है. 

अयोध्या मामले पर फैसले के बाद पूनिया ने कहा, अब विकास जैसे मुद्दों पर केंद्रीत रहेगी राजनीति
बीजेपी ने निकाय चुनाव में स्थानीय स्तर पर घोषणा पत्र जारी करने की बात कही थी.

जयपुर: अयोध्या मामले पर कोर्ट के फैसले के बाद राजनीति के दौर में भी बदलाव की बातें की जाने लगी हैं. बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया कहते हैं कि अब मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों पर नहीं बल्कि विकास और राष्ट्रवाद पर राजनीतिक केन्द्रित हो रही है. पूनिया ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दौर से बदलाव शुरू हुआ था. अब इसमें विकास के साथ राष्ट्रवाद की भावना भी जुड़ गई है. हालांकि इस बीच सवाल यह भी है कि निकाय चुनाव में भी क्या राष्ट्रीय मुद्दे और राष्ट्रवाद के आधार पर ही पार्टियां लोगों के बीच जाएंगी?

राजनीति बदल रही है और राजनीति में मुद्दों के बदलाव की चर्चा निकाय चुनाव के दौर में हो रही है. हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि निकाय चुनाव के कारण राजनीति बदल रही हो लेकिन राजनीति में इस बदलाव का सवाल अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया है. दरअसल, राम मंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद बीजेपी उत्साहित तो है और इस उत्साह को आपस में साझा भी किया जा रहा है लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व के आदेश के चलते कोई गलत मैसेज लोगों के बीच न जाए इसलिए सधी हुई प्रतिक्रिया दी जा रही है. राम मंदिर पर आए फैसले के दो दिन बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि जनसंघ के समय से अनुच्छेद 370 और राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के मुद्दे थे और आज जब इन पर संतुलित और सर्वमान्य फैसला आया है तो पूरे देश ने इसे स्वीकर किया है. 

अयोध्या मामले में आए फ़ैसले पर सतीश पूनियां संतुष्ट तो दिख रहे हैं लेकिन इस फैसले का निकाय चुनाव में कितना असर होगा? कोई असर होगा भी या नहीं? इस पर सतीश पूनिया कहते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय से विकास की राजनीति शुरू हुई थी. पूनिया ने कहा कि अब पीएम मोदी के दौर में बुनियादी विकास के साथ ही राष्ट्रवाद को भी लिया गया है. उन्होंने सीधे तौर पर अयोध्या मामले को तो आधार नहीं बनाया लेकिन पूनियां ने इतना जरूर कहा कि निकाय चुनाव में भी राष्ट्रवाद के मुद्दों की चर्चा निश्वचित रूप से होगी.

बीजेपी ने निकाय चुनाव में स्थानीय स्तर पर घोषणा पत्र जारी करने की बात कही थी. कुछ जगहों पर हालांकि पार्टी ने इस पर काम भी किया है. इधर प्रदेश स्तर पर विज़न डॉक्यूमेन्ट भी जारी करने की तैयारी है लेकिन इस बीच सवाल यह अहम है कि क्या पार्टी निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दों के मुकाबले राष्ट्रीय मुद्दों और राष्ट्रवाद को आधार बनाकर लोगों के बीच जाना चाहती है? और अगर वाकई ऐसा है तो क्या निकाय चुनाव के बाद शहरों की सरकार राष्ट्रीय मुद्दों पर ही आगे बढ़ेगी?