3 हजार फाइलों को खंगालने के बाद निकला करोड़ों का घोटाला, कलेक्ट्रेट का ये कमरा सील

जिला कलेक्ट्रेट (Jaipur District Collectorate) में करीब तीन हजार से ज्यादा फाइलों को खंगालने और सैकडों चेक की जांच के बाद जयपुर-महुवा खंड और  जयपुर-रींगस खंड हाइवे की चौडाई बढ़ाने की मुआवजा राशि के भुगतान में करोड़ों का घोटाला (Scam) सामने आया है. 

3 हजार फाइलों को खंगालने के बाद निकला करोड़ों का घोटाला, कलेक्ट्रेट का ये कमरा सील
फाइल फोटो

जयपुर: जिला कलेक्ट्रेट (Jaipur District Collectorate) में करीब तीन हजार से ज्यादा फाइलों को खंगालने और सैकडों चेक की जांच के बाद जयपुर-महुवा खंड और  जयपुर-रींगस खंड हाइवे की चौडाई बढ़ाने की मुआवजा राशि के भुगतान में करोड़ों का घोटाला (Scam) सामने आया है. अतिरिक्त जिला कलेक्टर तृतीय (Additional District Collector III) ने बनीपार्क थाने में मामला दर्ज कराया है और जांच के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है. 

जयपुर जिला कलेक्ट्रेट, जहां जयपुर के हाकिम से लेकर एडीएम, एसडीएम सहित अन्य अधिकारी बैठते हैं. न्याय की आस लेकर सैकड़ों फरियादी पहुंचते हैं, लेकिन यहां करोड़ों रूपए का गबन का मामला सामने आया है. वो भी अतिरिक्त जिला कलेक्टर तृतीय के चेकों पर हस्ताक्षर के बाद हेराफेरी करके. दरअसल मामला एनएचएआई की चौडाई बढ़ाने की मुआवजा राशि के भुगतान से जुड़ा है. मुआवजे की करीब तीन हजार से ज्यादा फाइलों को खंगालने पर घोटाले की परत पर परत खुलती जा रही हैं.

साथ में मुआवजा राशि के जारी चेकों का भी बैंक के स्टेटमेंट से मिलान किया जा रहा है. अब तक 90 चेक में गड़बड़ी मिली है. जानकारी के मुताबिक जयपुर स्थित कोटक महेंद्रा बैंक में एडीएम जयपुर-3 और एनएचएआई जयपुर-महुवा, जयपुर-रींगस के नाम से दो खाते हैं. हाईवे की चौड़ाई बढ़ाने के लिए भूमि आवाप्ति के मुआवजे के भुगतान की जिम्मेदारी कपिल शर्मा वरिष्ठ सहायक पर है. कपिल के साथ दो संविदाकर्मचारी जयनारायण बुनकर और दुष्यंत कुमार शर्मा भी लगे हैं. कपिल ही एडीएम तृतीय को पत्रावली और चेक हस्ताक्षर के लिए देते थे.

पत्रावली पर स्वीकृति के बाद उस राशि के चेक जारी किए जाते...जांच में सामने आया की एडीएम से पत्रावली और चेक पर हस्ताक्षर करवाने के बाद चेक का नाम व राशि को बदला गया. प्रारंभिक जांच में जिला प्रशासन द्वारा जारी चेकों और आरटीजीएस में हेरफेर कर भुगतान लिया गया है. फिलहाल इस मामले में करीब 2 करोड़ का घोटाला सामने आ रहा है. मामला संज्ञान में आने के बाद कपिल शर्मा को एपीओ कर दिया गया है और संविदाकर्मी जयनारायण बुनकर फरार चल रहा है.

यूं समझे किस तरह हुआ घोटाला
1- पत्रावली में जिसका नाम शंकर के नाम से 67,265 का चेक जारी हुआ है जबकि बैंक के विवरण में यहीं चेक राधेश्याम के नाम पर 19 लाख 82 हजार 893 रुपए का जामा हो गया.
2- भूराराम का 27,357 राशि का चेक सेढूराम के नाम पर 16 लाख 82 हजार 609 रुपए का जमा हो गया.
3- दामोदर नाम से 43, 967 रुपए का चेक मुकेश के नाम 3,86, 966 राशि का जमा हो गया.
4- एक महिला फूली के नाम 20 लाख 89 हजार 480 की राशि जमा हुई है.
5-मदन गोपाल, रतनलाल, लालचंद और पवन कुमार के नाम 45 हजार 856 का चेक आलम शेर खान के नाम 23 लाख 31 हजार 519 रूपए का जमा हो गया.
6-सरिता देवी के नाम से 56 हजार 928 का चेक किसी अन्य के नाम से 10 लाख 59 हजार 758 राशि का जमा हो गया.
7-भगवती के नाम का 4 हजार 858 का चेक किसी अन्य के नाम 9 लाख 82 जार 811 के नाम जमा हो गया.

मामले की जांच टीम में ये शामिल
एडीएम प्रथम इकबाल खान
ट्रेजरी ऑफिसर देवाराम
दो लेखाधिकारी भगवान सहाय, छोटूराम
दो मंत्रालयिक कर्मचारी प्रदीप राठौड, जंग बहादुर

कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा का कहना है कि मामले की एडीएम प्रथम इकबाल खान के नेतृत्व में 6 सदस्यों की प्रशासनिक जांच टीम जांच कर रही है. इसी सप्ताह जांच रिपोर्ट आने की संभावना है इसके बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो पाएगा. दोषियों के खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी. मुआवजा राशि भारत सरकार की ओर से एनएचएआई को भुगतान के लिए दी गई थी. मामले की जांच की जा रही है कि किस तकनीक से और किस स्तर पर हेरफेर किया गया है.

एडीएम तृतीय राजेंद्र कविया ने बनीपार्क थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है. बनीपार्क एसएचओ मामले की जांच कर रहे हैं. कलेक्ट्रेट के कमरा नंबर 115 को सील कर दिया गया है. 300 से अधिक खाताधारकों को मुआवजा भुगतान राशि दी गई है. यह भी बताया जा रहा है कि जयपुर सीकर हाईवे की चौड़ाई बढ़ाने में आवाप्त हुई भूमि के समय 2011 से मुआवजा राशि में हेरफेर किया जा रहा है.

बहरहाल, कलेक्टर और एडीएम के मामला संज्ञान में आने के बाद मामले की जांच अपने स्तर पर करवाई जा रही हैं. पुलिस भी अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही हैं, लेकिन अभी समझ से परे है चेक मुआवजा राशि के भुगतान का साइन हुआ तो फिर बाद में किस तकनीक की सहायता से उसमें हेराफेरी की गई.

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