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राजस्थान: मायावती की धमकी का असर, भारत बंद के दौरान दर्ज मुकदमों पर मांगी गई रिपोर्ट

भारत बंद के दौरान राजस्थान में हुई हिंसा को लेकर 321 मामले दर्ज किए गए थे. 

राजस्थान: मायावती की धमकी का असर, भारत बंद के दौरान दर्ज मुकदमों पर मांगी गई रिपोर्ट
राजस्थान के 6 बीएसपी विधायक गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे हैं. (फोटो साभार: DNA)

जयपुर/भरत राज: बसपा सुप्रीमो मायावती के राजस्थान और एमपी में पिछले साल 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान एससी-एसटी समुदाय के लोगों पर दर्ज मुकदमें वापस न लेने की स्थिति में समर्थन वापस लेने बयान के बाद राजस्थान में इसकी कवायद शुरू की जा चुकी है.

राजस्थान सरकार ने भारत बंद के दौरान दर्ज किए गए प्रकरणों को वापस लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है. इस संबंध में गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय से रिपोर्ट मंगाई है. बताया जा रहा है कि मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव स्वरूप से चर्चा भी की है. 

आपको बता दें कि, 2018 में 2 अप्रैल को दलित संगठनों की ओर से भारत बंद किया गया था. बंद के दौरान राज्य में हुई हिंसा को लेकर 321 मामले दर्ज किए गए थे. इनमें से 262 मामलों में एससी-एसटी समुदाय के लोगों को आरोपी बनाया गया था.

मुकदमा वापस लेने के कांग्रेस सरकार के निर्णय पर बीजेपी ने साधा निशाना

कांग्रेस की ओर से मुकदमें वापस लेने की कार्रवाई शुरू होने के बाद भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने मुकदमें वापस लेने की कार्रवाई को बसपा सुप्रीमो मायावती का डर बताया है. राठौड़ ने कहा है कि इससे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कोई फायदा नहीं मिलने वाला है. वहीं, पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि कई मुकदमें पहले भी हटाए गए हैं.

बीजेपी नेताओं के बयान पर कांग्रेस का पलटवार

राठौड़ के बयान पर कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा, '' भाजपा सरकार के दौरान यदि किसी नौजवान, किसी धर्म या जाति के लोगों पर झूठे मुकदमें लगाए गए तो उन्हें न्याय मिलेगा. इसको लेकर भाजपा को आपत्ति क्यों हो रही है?

गौरतलब है कि मायावती ने पिछले दिनों कहा था कि राजस्थान व मप्र की कांग्रेस सरकार भारत बंद के दौरान एससी-एसटी समुदाय के लोगों पर दर्ज किए मुकदमें वापस ले. ऐसा नहीं करने पर बसपा के द्वारा दोनों राज्य की कांग्रेस  सरकारों को दिए जा रहे समर्थन पर विचार किया जाएगा. माना जा रहा है कि मायावती के इस बयान के बाद राज्य सरकार ने इसकी कवायद शुरू कर दी है.

माना जा रहा है कि मायावती लोकसभा चुनाव से पहले राज्य मेें रहने वाले SC,ST समुदाय के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करना चाह रही है. वैसे 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य़ में बीएसपी के  6 विधायक चुनाव जीतने में कामयाब हुए हैं.