चौमूं के अस्पताल में ऑपरेशन करने के बाद महिलाओं को फर्श पर लिटाया, आक्रोश में परिजन

मामला चौमूं के सरकारी अस्पताल का है जहां नसबंदी शिविर में परिवार नियोजन कैंप के तहत नसबंदी करवाने के लिए आई थी

चौमूं के अस्पताल में ऑपरेशन करने के बाद महिलाओं को फर्श पर लिटाया, आक्रोश में परिजन
राजधानी के चौमू कस्बे के सरकारी अस्पताल का हाल बेहाल है

प्रदीप सोनी/चौमूं: प्रदेश के सरकारी अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिले इसको लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत संवेदनशील है. सरकारी अस्पतालों में मुख्यमंत्री जांच और दवा जैसी कई जनकल्याणकारी लागू की, लेकिन इन योजनाओं के लागू होने के बाद भी अभी तक स्थिति में कुछ खास बदलाव नहीं आया है. राजधानी के चौमू कस्बे के सरकारी अस्पताल का हाल बेहाल है. यहां अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है.

मामला चौमूं के सरकारी अस्पताल का है जहां नसबंदी शिविर में परिवार नियोजन कैंप के तहत नसबंदी करवाने के लिए आई थी, लेकिन अस्पताल ने लापरवाही दिखाते हुए महिलाओं को एक ही कमरे में जानवरों की तरह ठूंस-ठूंस कर जमीन पर लिटा दिया. इन्हें ना तो कोई बिस्तर दिया गया और ना कोई गद्दा दिया गया. लापरवाही की हद तो तब हो गई, जब इस भीषण गर्मी में ऑपरेशन करने के बाद बंद कमरे में लिटा दिया.

इस बात को लेकर महिलाओं के साथ आए परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया. जिसके बाद कुछ महिलाओं को एक दो बैड पर शिफ्ट किया गया. लेकिन यहां भी एक ही बेड पर दो-दो तीन-तीन महिलाओं को लिटा दिया गया. पूरे मामले में अस्पताल की लापरवाही साफ साफ नजर आ गई. वहीं महिलाओं ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लागते हुए कहा कि शिकायत के बाद भी यहां कोई सुनने वाला नहीं है.

साथ ही चौमूं इलाके के आस पास के गांवों से महिलाओं ने अस्पताल प्रभारी को शिकायत के लिए पहुंची. लेकिन चिकित्सा प्रभारी डॉ मान प्रकाश सैनी भी अस्पताल में नहीं मिले. जब अस्पताल के कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा हमारे पास बेड खाली नहीं है, लेकिन जब महिलाओं ने अंदर जाकर देखा तो अस्पताल में एक वार्ड पूरा खाली पड़ा था. जिसके बाद अस्पताल प्रसाशन अपनी लापरवाही पर पर्दा डालता नजर आया. मरीज के परिजन राजकमल ने बताया कि अस्पताल में बेड खाली पड़े हैं लेकिन फिर भी महिलाओं को जमीन पर लिटाया गया है.