राजस्थान: लॉकडाउन से उपजे हालतों में एग्रो इंडस्ट्री बन सकती है रोजगार का नया विकल्प

सरकार ने राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति को लांच किया था. 

राजस्थान: लॉकडाउन से उपजे हालतों में एग्रो इंडस्ट्री बन सकती है रोजगार का नया विकल्प
अधिकतर एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री लघु एवं मध्यम स्तर के होते हैं.

जयपुर: लॉकडाउन (Lockdown) से उपजे हालातों के बीच राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति-2019 राज्य के लिए वरदान साबित हो सकती है. सरकार की ओर से इसके प्रचार-प्रसार पर ध्यान दिया जाए और लोगों को जागरूक किया जाए तो, बढ़ी संख्या में लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सकता है.

दरअसल, गहलोत सरकार की पहली वर्षगांठ पर दिसंबर 2019 में राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति को लांच किया था. इसमें एग्रो इंडस्ट्री लगाने पर किसानों को 50 परसेंट सब्सिडी के साथ ही, ब्याज में 5 से 6 परसेंट की सब्सिडी थी.

बजट सत्र और कोरोना संकट के चलते इसमें ज्यादा आवेदन नहीं आए. अब कृषि विभाग की ओर से अवेयर किया जाए तो, विभिन्न जिलों में एग्रो इंडस्ट्रीज लगाई जा सकती है. जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिल सकता है. मार्केटिंग बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर एमएल गुप्ता ने बताया कि, इस नीति के तहत मिल रही सहूलियतों और प्रदेश में अनाज, दाल एवं मसालों की भरपूर पैदावार के चलते एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री लगाने के लिए स्थिति काफी अनुकूल है. जिसकी बदौलत हजारों करोड़ रुपए का निवेश हो सकता है.

उन्होंने कहा कि, इससे कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर किसान की आय में बढ़ोतरी होने और नए उद्यमी बनने के साथ लोगों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल सकेगा. योजना के तहत सबसे ज्यादा रूचि जोधपुर के उद्यमी रुचि दिखा रहे हैं.

अब तक वेयरहाउस, क्लीनिंग, ग्रेडिंग, दुग्ध प्रसंस्करण, प्याज सुखाने और मतीरे के बीज जैसी 17 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं. जिनमें लगभग 25 करोड़ रुपए का निवेश होगा. पिछले दिनों राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की पहली बैठक में 8 परियोजनाओं के लिए 4.32 करोड़ रुपए का अनुदान मंजूर किया गया है.

इनमें से 15 करोड़ के 7 प्रोजेक्ट सिर्फ जोधपुर जिले में लगेंगे. एक प्रोजेक्ट सिरोही जिले में स्थापित होगा. इसी प्रकार 6.35 करोड़ रुपए की 7 परियोजनाओ को जिला स्तरीय समितियों ने मंजूर किया है. इनमें से भी छह प्रोजेक्ट सिर्फ जोधपुर जिले के हैं, जबकि एक प्रोजेक्ट बाड़मेर का है.

डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि, इस नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 70 करोड़ रुपए की 45 परियोजनाओं के प्रस्ताव मिल चुके हैं. इनमें बीकानेर जिले के उद्यमियों ने भी अच्छी रुचि दिखाई है और वेयरहाउस, दाल, तेल से जुड़े 25 करोड़ लागत के 12 प्रोजेक्ट अनुदान के लिए प्रस्तुत किए हैं.

जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में मसाले, दलहन एवं अनाज की अच्छी पैदावार होती है. इस वजह से यहां एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में निवेश की भरपूर संभावना है. राज्य में जीरा और इसबगोल खूब पैदा होती है. लेकिन बिकने के लिए गुजरात की ऊंझा मंडी जाती है. फिर वहीं से क्लीनिंग, ग्रेडिंग, शॉर्टिंग एवं पैकेजिंग के साथ मूल्य संवर्धन होकर बाजार में बिकता है.

जीरा-इसबगोल खेती वाले जालोर और बाड़मेर में इसकी इंडस्ट्री लगाने के लिए बहुत अनुकूल स्थिति है. इसी प्रकार कोटा संभाग में धनिया और लहसुन, नागौर में मूंग दाल और मेथी से संबंधित उद्योग लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा दुग्ध उत्पाद, सरसों एवं तिल्ली तेल, मोठ एवं उड़द दाल संबंधी प्रोडक्ट तथा गेहूं से आटा एवं अन्य उत्पाद बनाने की अच्छी संभावना है.

अधिकतर एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री लघु एवं मध्यम स्तर के होते हैं और गांवों में लगाना ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं. आवश्यक कच्चा माल एवं मानव संसाधन वहीं मिल जाता है. अभी तक अनुदान के लिए मंजूर परियोजनाएं तिंवरी, औसियां, फलौदी जैसी छोटी जगहों पर लगी भी हैं. लोगों को अपने गांव या नजदीकी इलाके में ही रोजगार मिल जाएगा. खासकर कोविड-19 (COVID-19) की वजह से बदले माहौल में दूसरे प्रदेशों से अपने घर पहुंचे लोगों को इनमें रोजगार उपलब्ध हो सकेगा. इससे शहरों पर रोजगार एवं अन्य सुविधाओं के लिए दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी.