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सभी धर्मों के लोगों के लिए खास है अजमेर शरीफ दरगाह, आंकड़ों से हुआ खुलासा

राजस्थान में शांति और सद्भावना का सबसे बड़ा केंद्र कहलाने वाली अजमेर शरीफ दरगाह, विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की ये दरगाह करीब एक हजार साल पुरानी है.

सभी धर्मों के लोगों के लिए खास है अजमेर शरीफ दरगाह, आंकड़ों से हुआ खुलासा

अजमेर/ मोहम्मद रईस खान: धार्मिक स्थलों पर अब आस्थावानों की संख्या बढ़ती जा रही है. देशभर में ऐसे कई धार्मिक पर्यटन स्थल हैं जहां अब हर रोज हजारों सैलानी पहुंचते हैं. इन्ही में से एक अजमेर शरीफ दरगाह है जहां अब हर रोज 25 हजार से ज्यादा जायरीन हाजरी के लिए पहुंचते हैं. इन अकीदतमंदों में हिन्दू मुस्लिम दोनों कि ही संख्या बराबर होती है. 

राजस्थान में शांति और सद्भावना का सबसे बड़ा केंद्र कहलाने वाली अजमेर शरीफ दरगाह, विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की ये दरगाह करीब एक हजार साल पुरानी है. मान्यता है कि इस दरगाह में मांगी गई मुराद कभी खाली नही जाती. यही वजह है कि इस संत की दरगाह पर खासों आम सभी मजहब के लोग बेखौफ बेफिक्र अपनी मन्नते लिए चले आते हैं. पिछले 10 सालों में इस दरगाह पर आने वाले अकीदतमंद सैलानियों की संख्या में हर साल इजाफा हुआ है. इस दरगाह पर हर रोज 25 हजार से ज्यादा जायरीन आते हैं. जबकि गुरुवार और शुक्रवार को इन जायरीन की संख्या 1 लाख तक पहुंच जाती है. 

इनमें पुरुष, महिला और बच्चे शामिल हैं. इसके अलावा ख्वाजा साहब की हर माह होने वाली छटी शरीफ में 1 लाख जायरीन शरीक होते हैं. अब बात की जाए ख्वाजा साहब के सालाना उर्स की तो इसमें 20 लाख के करीब जायरीन 10 दिनों में शिरकत करते हैं. इसी तरह मिनी उर्स मोहर्रम में इसकी संख्या कम हो जाती है मतलब 4 लाख के करीब जायरीन 10 दिनों में शिरकत करते हैं. ईद उल अजहा, ईद उल फितर और गरीब नवाज के पीर के उर्स के दरमियान 2 लाख के आसपास जायरीन शरीक होते हैं. ऐसे में दरगाह के 3 हजार खादिम हर जायरीन के संपर्क में रहता है और उनके लिए सभी तरह की धार्मिक और सामाजिक सेवा प्रदान करता है.

अजमेर शरीफ दरगाह आने वाले जायरीन के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक दरगाह कमेटी बना रखी है जो दरगाह आने वाले सैलानियों की सुरक्षा और व्यवस्था का ध्यान रखती है. इसके अलावा दरगाह के खादिमों की अंजुमन सैय्यद जादगान की तरफ से भी जायरीन सैलानियों के लिए खाने पीने और ठहरने की भी व्यवस्था रहती है. 

अजमेर दरगाह में पहुंचे जायरीन सैलानियों को अदब का खास ख्याल रखना होता है. ख्वाजा साहब के दरबार मे सिर ढक कर बावजू जाना होता है. सैलानी जब दरगाह में पहुंचते है तो अपने रिश्तेदारों के लिए तस्बीह, डोरी, अंगूठी और यादगार पलों को कैमरे में कैद करके ले जाना नहीं भूलते. अजमेर में सभी धर्म जाति के अकीदतमंद आते है हाथों में चादर और दिल मे मुराद लाते हैं.