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Deedwana News: राजस्थान कृषि पर्यवेक्षक संयुक्त समन्वय समिति के प्रदेशव्यापी आह्वान पर 4 जुलाई से आंदोलन चल रहा है. इसके तहत 18 अगस्त से सभी कृषि पर्यवेक्षक और सहायक कृषि अधिकारियों ने कृषि विभाग और इनसे संबंधित विभागों के समस्त ऑनलाइन कार्यों का पूर्ण रूप से बहिष्कार कर दिया है, जिससे कृषि विभाग से संबंधित सभी काम ठप हो गए हैं.
इसके कारण राज किसान सत्यापन एप से कृषकों की पत्रावलियों का भौतिक सत्यापन का कार्य समय पर नहीं होने के कारण कृषकों को तारबंदी, फार्मपौण्ड, सिंचाई पाइपलाइन, कृषि यंत्र सहित अन्य विभागीय योजनाओं में अनुदान मिलने में देरी होगी.
साथ ही सीसीई एप से फसल कटाई प्रयोग आनलाइन संपादित नहीं होने की वजह से कृषकों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत् फसल बीमा क्लेम मिलना मुश्किल होगा. कृषि पर्यवेक्षक संयुक्त समन्वय समिति के जिला अध्यक्ष सुरेश पलसानिया ने बताया कि जब तक सरकार द्वारा हमारी मांगों पर द्विपक्षीय वार्ता करके ठोस एवं लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा.
पूर्व में जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें कृषि पर्यवेक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने, प्रत्येक ग्राम पंचायत पर कृषि पर्यवेक्षक के पद सृजित करने, अतिरिक्त कार्य भत्ता 2500 रुपये प्रतिमाह देने, किसान सेवा केंद्र संचालन हेतु 1500 रुपए, स्टेशनरी व्यय हेतु 500 रुपए, बहुआयामी कार्यों के लिए 3500 रुपए प्रतिमाह भत्ता स्वीकृत करने आदि मांगे हैं.
समिति की मुख्य 11 सूत्रीय मांगों पर सरकार द्वारा पूर्व सहमति के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रदेशभर के कृषि विभाग के कार्मिकों में भारी असंतोष व्याप्त है.
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