Panchayat Chunav 2025: राजस्थान के इस जिले में सबसे पहले लागू हुई थी पंचायती राज व्यवस्था

Panchayat Chunav 2025:  2 अक्टूबर 1959 को नागौर में पं. नेहरू ने गांधी जयंती पर पंचायती राज की नींव रखी। आज पुलिस लाइन में वह चबूतरा गवाह है। गाँवों को सशक्त करने वाली इस व्यवस्था का शुभारंभ नागौर के लिए गर्व का क्षण!

Panchayat Chunav 2025: राजस्थान के इस जिले में सबसे पहले लागू हुई थी पंचायती राज व्यवस्था
Image Credit: Panchayat Chunav 2025

Panchayat Chunav 2025: नागौर जिले में 2 अक्टूबर 1959 को गांधी जयंती के अवसर पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत की थी. इस ऐतिहासिक घोषणा के स्थल पर आज एक चबूतरा बना हुआ है, जो वर्तमान में पुलिस लाइन परिसर में स्थित है. इस महत्वपूर्ण व्यवस्था, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शासन में भागीदारी का अधिकार दिया, की शुरुआत का साक्षी बनने का गौरव नागौर जिले को प्राप्त है. स्थानीय लोगों को इस बात पर गर्व और खुशी है कि उनके जिले से इस क्रांतिकारी व्यवस्था का शुभारंभ हुआ.


2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के हृदय स्थल नागौर से देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 'स्वराज' के सपने को साकार करने के लिए पूरे देश में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की नींव रखी थी. उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य गाँवों को शासन में भागीदारी देना था. हालांकि, गांधीजी का यह सपना कि देश का शासन गाँवों के हाथों में हो, 61 वर्षों बाद भी पूर्ण रूप से साकार नहीं हो सका है. गांधीजी की सोच थी कि देश की प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी हो, जिसमें गाँव स्वयं अपने निर्णय ले सकें और शासन का केंद्र बिंदु ग्रामीण स्तर पर हो.

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महात्मा गांधी का मानना था कि शासन व्यवस्था केंद्र से गाँव की ओर नहीं, बल्कि गाँव से केंद्र की ओर होनी चाहिए. उनके अनुसार, भारत तभी सशक्त बनेगा जब देश का प्रत्येक गाँव मजबूत होगा. इसके बावजूद, उस समय की प्रसिद्ध उक्ति 'हर घर को पहुंचा जावे और हर आंख से आंसू पौंछा जावे' आज भी पूरी तरह साकार नहीं हो पाई है. कृषि, पशुपालन, पंचायत, सहकारिता और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भले ही अभूतपूर्व कार्यों की शुरुआत हुई, लेकिन इन्हें पूर्णता नहीं मिल सकी. गांधीजी का सपना था कि भारत में कृषि, पशुपालन और कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता दी जाए, किंतु ये तीनों ही क्षेत्र उपेक्षा के शिकार हो गए.


27 सितंबर 1959 को, पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना से मात्र छह दिन पहले, लिखमाराम चौधरी नागौर के प्रथम जिला प्रमुख बने थे. पंचायती राज के लागू होने के साथ ही उन्हें देश के पहले जिला प्रमुख के रूप में ख्याति प्राप्त हुई. इससे पूर्व, चौधरी मूंडवा पंचायत समिति के प्रधान थे और इस पद पर रहते हुए लगभग 15-20 दिनों बाद वे जिला प्रमुख बने. उन्होंने लगातार तीन बार निर्विरोध जिला प्रमुख का पद संभाला और 7 अगस्त 1977 तक इस पद पर रहे. अपने पूरे जीवनकाल में चौधरी ने किसानों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने तथा उन्हें आर्थिक और राजनीतिक शोषण से मुक्ति दिलाने के लक्ष्य के साथ अथक कार्य किया.

जिला प्रमुख/प्रशासक कब से कब तक


1लिखमाराम चौधरीजिला प्रमुख27/9/1959 - 7/8/1977
2अर्जुनराम भंडारीप्रशासक8/8/1977 - 18/5/1978
3धर्म सिंह मीणाप्रशासक7/6/1978 - 13/7/1978
4पीसी जैनप्रशासक26/7/1979 - 19/8/1981
5एसपी पैगोरियाप्रशासक20/8/1981 - 8/1/1982
6भंवराराम सूपकाजिला प्रमुख9/1/1982 - 28/2/1985
7हरिराम बागड़ियाजिला प्रमुख1/3/1985 - 22/7/1988
8हरेन्द्र मिर्धाजिला प्रमुख23/7/1988 - 26/7/1991
9तपेन्द्र कुमारप्रशासक27/7/1991 - 6/8/1993
10ललित मेहराप्रशासक7/8/1993 - 12/2/1995
11बिन्दू चौधरीजिला प्रमुख13/2/1995 - 12/2/2000
12जेठमल बरबड़जिला प्रमुख13/2/2000 - 11/2/2005
13बिन्दू चौधरीजिला प्रमुख12/2/2005 - 11/2/2010
14जेठमल बरबड़जिला प्रमुख13/2/2000 - 11/2/2005
15बिन्दू चौधरीजिला प्रमुख12/2/2005 - 11/2/2010
16बिन्दू चौधरीजिला प्रमुख12/2/2010 - 6/2/2015
17सुनीता चौधरीजिला प्रमुख7/2/2015 - 6/2/2020
18जवाहर चौधरीप्रशासक7.2.2020
19भागीरथ रामजिला प्रमुखवर्तमान

नागौर के प्रथम जिला परिषद बोर्ड में जिला प्रमुख लिखमाराम चौधरी सहित कुल 16 सदस्य शामिल थे. इस बोर्ड में उप प्रमुख रामसिंह कुड़ी के साथ-साथ नरसाराम, रसीद अहमद, मोहनीदेवी, नाथूराम मिर्धा, रामनिवास मिर्धा, मोतीलाल, गोपाललाल, जेठमल, माणकचंद, किशनलाल, गौरी देवी पूनिया, मथुरादास माथुर और यशवंतराय मेहता सदस्य के रूप में शामिल थे.


प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को पूरे देश में 'राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस' मनाया जाता है. यह दिन भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के पारित होने का प्रतीक है, जो 24 अप्रैल 1993 से प्रभावी हुआ था. इस अधिनियम ने पंचायती राज व्यवस्था को मजबूती प्रदान की. राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में इसकी शुरुआत वर्ष 2010 से हुई थी.


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Ansh Raj

Ansh Raj

अंश राज, Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत है. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर की खबरों में खास दिलचस्पी. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनाव और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बयान पर नजर. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करने में मजा आता है. इसके अलावा कंटेंट को पैकेजिंग करके परोसना इनकी खासियत है. डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव. इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है और वर्तमान में मेरठ कॉलेज से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं. खबरों की गंध सूंघने और उसे सबसे पहले, सबसे तेज परोसने का जुनून. यही अंश राज हैं
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