स्वतंत्रता दिवस से पहले अजमेर दरगाह के बाहर देशभक्ति का सैलाब, 786 तिरंगों का हुआ वितरण

Rajasthan News: अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के बाहर स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 786 तिरंगों का वितरण और तिरंगा रैली आयोजित हुई. हाजी मोहम्मद महमूद खान की अगुवाई में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और ज़ायरीन देशभक्ति के जोश के साथ शामिल हुए.

स्वतंत्रता दिवस से पहले अजमेर दरगाह के बाहर देशभक्ति का सैलाब, 786 तिरंगों का हुआ वितरण
Image Credit: Ajmer NewsSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Rajasthan News: अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की विश्व प्रसिद्ध दरगाह के बाहर स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को 786 तिरंगों का वितरण किया गया. इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति का उत्साह चरम पर था. हर वर्ष की तरह इस बार भी दरगाह के बाहर तिरंगा रैली का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और ज़ायरीन (श्रद्धालु) शामिल हुए. कार्यक्रम का आयोजन हाजी मोहम्मद महमूद खान की अगुवाई में किया गया, जिन्होंने बताया कि यह परंपरा हर साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के प्रति एकता और सम्मान प्रदर्शित करने के लिए आयोजित की जाती है.

हाजी मोहम्मद महमूद खान ने कहा कि तिरंगा रैली और झंडा वितरण का उद्देश्य समाज में भाईचारे और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना है. उन्होंने बताया कि इस बार 786 तिरंगे वितरित किए गए, जो सूफी संत के प्रति श्रद्धा और देश के प्रति प्रेम का प्रतीक है. इस आयोजन में सभी धर्मों और समुदायों के लोग शामिल हुए, जिन्होंने तिरंगे को गर्व के साथ लहराते हुए देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया. दरगाह के बाहर आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

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रैली के दौरान देशभक्ति के नारे गूंजे और तिरंगे की शोभा देखते ही बन रही थी. स्थानीय लोगों ने इस आयोजन को सामाजिक एकता का अनूठा उदाहरण बताया. "ख्वाजा साहब की दरगाह शांति और भाईचारे का प्रतीक है, और तिरंगा वितरण का यह आयोजन देश के लिए हमारी एकजुटता को और मजबूत करता है."

हाजी महमूद खान ने बताया कि यह परंपरा न केवल स्वतंत्रता दिवस के प्रति उत्साह को बढ़ाती है, बल्कि युवा पीढ़ी को देश के इतिहास और बलिदानियों के प्रति सम्मान की भावना भी जगाती है. इस अवसर पर दरगाह के बाहर मौजूद पुलिस और प्रशासन ने भी आयोजन की सराहना की और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया.

पीर नफ़ीस मियां चिश्ती ने कहा कि अजमेर की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का प्रतीक बन गया है, जो यह दर्शाता है कि सूफी परंपराएं और देशभक्ति का भाव एक साथ मिलकर समाज को एक नई दिशा दे सकते हैं.

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Pratiksha Maurya

Pratiksha Maurya

मैं प्रतीक्षा मौर्या जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज पर पकड़ रखती हूं . मुझे डिजिटल मीडिया का 2 साल से ज्यादा का अनुभव है. इससे पहले मैं जी बिहार में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं.
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