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Ajmer Chamunda Mata Temple: हिंदू धर्म में नवरात्र का पर्व सबसे पावन और शुभ अवसरों में से एक माना जाता है. यह उत्सव मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की उपासना को समर्पित होता है. इस साल शारदीय नवरात्र 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को दशहरा के साथ संपन्न होगी. राजस्थान के देवी मंदिरों में नवरात्रि को लेकर अभी से तैयारियां जोरों पर हैं. खासकर अजमेर का चामुंडा माता मंदिर इन दिनों भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र बन जाता है. नवरात्रि में यहां भारी भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि अगर यहां कपूर से माता की आरती की जाए, तो भक्त को विशेष फल की प्राप्ति होती है और उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
राजस्थान की धरती जितनी वीरों की गाथाओं के लिए मशहूर है, उतनी ही देवी-देवताओं की आस्था और शक्ति स्थलों के लिए भी. अजमेर ज़िले के पवित्र नगर पुष्कर की पहाड़ियों में बसा है चामुंडा माता मंदिर, जिसे मणिबन्ध शक्ति पीठ के नाम से भी जाना जाता है. यह वह स्थान है, जहां देवी सती की कलाई गिरी थी. तभी से यह स्थल शक्ति उपासना का केंद्र बन गया और आज लाखों श्रद्धालु यहां मां के दर्शन के लिए आते हैं.
पुराणों के अनुसार जब भगवान शिव सती के देहांत के बाद शोक में तांडव कर रहे थे, तो विष्णु भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के अंग अलग किए. जहां-जहां सती के अंग गिरे, वहां शक्ति पीठ बने. पुष्कर की इस पावन भूमि पर सती की कलाई गिरी थी. इसी वजह से इसे मणिबन्ध शक्ति पीठ कहा जाता है और यहां विराजमान देवी को चामुंडा माता के रूप में पूजा जाता है.
कपूर से करें आरती. पूरी होगी हर मनोकामना
नवरात्रि में मां चामुंडा की पूजा के दौरान दीपक जलाने की परंपरा बेहद पवित्र मानी जाती है. खासकर कपूर का दीपक जलाना शुभ फल देने वाला होता है. कपूर शुद्धता का प्रतीक है. इसे जलाने से वातावरण शुद्ध होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को शांति मिलती है. नवरात्र में कपूर का दीपक जलाने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है और धन लाभ और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है.
भक्तों को सीढ़ियां चढ़नी पड़ती
चामुंडा माता मंदिर पहाड़ी पर स्थित है. यहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. ऊपर पहुंचने पर सामने खुला आकाश, अरावली की वादियां और दूर-दूर तक फैला पुष्कर का विहंगम दृश्य मन को मोह लेता है. मंदिर का ढांचा भले ही सादा है लेकिन इसके गर्भगृह में बैठते ही भक्त को दिव्य ऊर्जा का अनुभव होता है. ढोल-नगाड़ों और घंटों की गूंज के बीच जब माता की आरती होती है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है.
हर मनोकामना है पूरी होती
नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. दूर-दराज़ से लोग पदयात्रा करके माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं. विवाह, संतान, स्वास्थ्य या धन-समृद्धि हर प्रकार की मनोकामना लेकर भक्त यहां पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि माता चामुंडा सच्चे मन से मांगी गई हर प्रार्थना को जरूर सुनती हैं.
कैसे पहुंचे इस मंदिर
मंदिर, पुष्कर झील से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. अजमेर से सड़क मार्ग द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. नजदीकी रेलवे स्टेशन अजमेर है और सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर है. पुष्कर का चामुंडा माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और शक्ति का प्रतीक है.
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