Rajasthan Government Porject: राजस्थान में मेगा वॉटर प्रोजेक्ट की शुरुआत, कूल नदी पर रामगढ़ बैराज से बुझेगी 3 जिलों की प्यास

Rajasthan Government Porject: देश में आपातकाल लगने से पहले साल 1972 में डाकुओं के अपहरण के मामलों के कारण सुर्खियों में आई कूल नदी एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह डर नहीं, विकास है. कभी अपराधियों की गतिविधियों के लिए बदनाम रही यह नदी अब लाखों लोगों की प्यास बुझाने की तैयारी में है. कूल नदी पर रामगढ़ बैराज के नाम से एक बड़ा बांध बनाया जा रहा है और इसका काम जोर-शोर से शुरू हो चुका है.
 

Rajasthan Government Porject: राजस्थान में मेगा वॉटर प्रोजेक्ट की शुरुआत, कूल नदी पर रामगढ़ बैराज से बुझेगी 3 जिलों की प्यास
Image Credit: Rajasthan Government Porject

Rajasthan Government Porject: दूगेर गांव के पास कूल नदी पर बनने वाला यह बैराज राजस्थान वाटर ग्रिड कार्पोरेशन लिमिटेड की ओर से तैयार की जा रही नवनेरा-गलवा-ईसरदा लिंक परियोजना का हिस्सा है.

इस परियोजना के तहत रामगढ़ बैराज की भराव क्षमता 45.30 एमसीवीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) निर्धारित की गई है, जो इस पूरे इलाके के लिए पानी का एक बड़ा स्रोत बनेगा. बैराज के निर्माण के लिए किशनगंज तहसील की पांच ग्राम पंचायतों के 12 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है, जिससे साफ है कि परियोजना का दायरा काफी बड़ा और असर व्यापक होगा.

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योजना के अनुसार, रामगढ़ बैराज में जमा होने वाला पानी आगे महलपुर बैराज में पहुंचेगा. नहरों के जरिए इस पानी को आगे ट्रांसफर किया जाएगा. इसी पानी से अजमेर, जयपुर और टोंक जिलों के लोगों की पेयजल जरूरतें पूरी की जाएंगी. साथ ही, इन क्षेत्रों में खेती के लिए सिंचाई में भी इस पानी का इस्तेमाल होगा. इस लिंक परियोजना को पहले ईआरसीपी (ईस्टर्न राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट) के तहत रखा गया था, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर रामसेतु परियोजना कर दिया गया.

कूल नदी पर मिट्टी डालकर बांध बनाने की प्रक्रिया शुरू

रामगढ़ बैराज के काम को गति देने के लिए जमीन पर तेजी से तैयारियाँ की गई हैं. किशनगंज-रामगढ़ सड़क से कूल नदी तक पेड़ों और झाड़ियों को काटकर चौड़ा रास्ता बना दिया गया है, ताकि भारी मशीनरी और वाहनों की आवाजाही में कोई दिक्कत न हो. कूल नदी पर मिट्टी डालकर बांध बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो आने वाले वर्षों में एक बड़े जलाशय का रूप ले लेगी.

इस पूरे काम को लगभग चार साल की अवधि में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. लंबे समय तक चलने वाले निर्माण कार्य और तकनीकी स्टाफ की सुविधा के लिए यहां पर आवासीय कॉलोनी भी बना दी गई है. बांध निर्माण के लिए जरूरी जेसीबी मशीनें, भारी भरकम जंगी मशीनरी और बड़ी संख्या में डंपर मौके पर पहुंच चुके हैं और दिन-रात काम चल रहा है.

कभी डाकुओं के खौफ से याद की जाने वाली कूल नदी अब आने वाले समय में राजस्थान के एक बड़े हिस्से के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती है. यह परियोजना न सिर्फ पानी की किल्लत कम करेगी, बल्कि इलाके के आर्थिक और सामाजिक विकास की तस्वीर भी बदलने की क्षमता रखती है.

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