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Tonk News: टोंक जिले में प्रस्तावित धर्मांतरण बिल को लेकर विरोध तेज हो गया है. शनिवार को सामाजिक संगठन आवाम-ए-टोंक के कार्यकर्ता और पदाधिकारी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम एडीएम रामरतन सौंकरिया को एक ज्ञापन सौंपा.
इस दौरान संगठन का नेतृत्व एडवोकेट काशिफ जुबेरी ने किया. ज्ञापन में मांग की गई कि धर्मांतरण संबंधी प्रस्तावित कानून संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ है और इसे तुरंत वापस लिया जाए. एडवोकेट जुबेरी ने कहा कि "दो वयस्क लोगों के बीच शादी और धर्म अपनाने का फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत होता है.
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इसमें राज्य या किसी अधिकारी का हस्तक्षेप करना संविधान के राइट टू प्राइवेसी (निजता के अधिकार) का उल्लंघन है."उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कानून के तहत धर्म परिवर्तन करने से पहले व्यक्ति को 60 दिन पहले संबंधित अधिकारी को सूचना देनी होगी, जो न केवल असंवैधानिक है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता पर भी सीधा प्रहार है.
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जुबेरी ने इसे एक "अश्वगंधानी" कानून करार देते हुए कहा कि धर्म और आस्था किसी की निजी पसंद है, और कोई भी नागरिक चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो या ईसाई, किसी को भी अपनी आस्था की सूचना देने के लिए बाध्य नहीं हो सकता.आवाम-ए-टोंक ने मुख्यमंत्री से अपील की कि यह बिल वापस लिया जाए और संविधान की गरिमा को बरकरार रखा जाए.
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