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Tonk News: राजस्थान के टोंक जिले में उनियारा के बनेठा में चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है. बनेठा में कीरो की झोपड़ी निवासी कैलाशी देवी ने 27 नवंबर 2024 को नसबंदी यह सोचकर करवाई थी कि परिवार नियोजन किया जाए और दो बच्चियां, एक बच्चा होने के बाद नसबंदी करवाई थी.
पीड़िता कैलाशी के पहले तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बच्चियां और एक बच्चा है. अब नसबंदी का ऑपरेशन करवाने के बाद भी कैलाशी गर्भवती हो गई और इसका सुरक्षित प्रसव भी हो गया.
इस पूरे मामले में एक ओर हैरानी की बात यह है कि नसबंदी जब 24 नवंबर 2024 को करवाई गई थी और 1 अगस्त 2025 को महिला का प्रसव हुआ तो यह अवधि आठ महीने ही पूरे कर पाई है, जिसके चलते यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि नसबंदी के दौरान ही महिला गर्भवती थी.
चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अगर ऐसा हुआ है तो महिला ने नसबंदी ऑपरेशन करवाते समय अपने गर्भवती होने की जानकारी चिकित्सकों से छिपाई इसीलिए यह लापरवाही हुई है.
हालांकि पीड़िता और उसका पति बस इतना ही बोल पा रहा है कि नसबंदी आपरेशन फेल हो गया है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगर वाकई नसबंदी आपरेशन फेल हुआ है तो लापरवाह चिकित्सक कौन है और उस पर क्या कार्रवाई होगी?
वहीं, चिकित्सा विभाग के उनियारा ब्लाक चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मनीष लोधी ने अब इस पूरे मामले को लेकर जांच पड़ताल कर कार्रवाई की बात कही है.
बता दें कि नसबंदी, जिसे पुरुष नसबंदी (वेसेक्टॉमी) और महिला नसबंदी (ट्यूबल लिगेशन) के रूप में जाना जाता है, यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जो प्रजनन क्षमता को स्थायी रूप से रोकने के लिए की जाती है. पुरुष नसबंदी में, शुक्राणु ले जाने वाली नलिकाओं (वासेक्टॉमी) को काट दिया जाता है या बंद कर दिया जाता है. जबकि महिला नसबंदी में फैलोपियन ट्यूबों को काट दिया जाता है या बंद कर दिया जाता है.
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