जैसलमेर: जिंदा महिला को उपनिवेशन विभाग ने किया मृत घोषित, जमीनों की कर रहा 'जालसाजी'

अब अधिकारियों और दलालों की साठगांठ के चलते गरीब वास्तविक आवंटियों के बजाय ज्यादा पैसे देने वालों के आवंटन होने लगे.

जैसलमेर: जिंदा महिला को उपनिवेशन विभाग ने किया मृत घोषित, जमीनों की कर रहा 'जालसाजी'
उपनिवेशन विभाग दलालों के साथ मिलकर जमीनों की 'जालसाजी' कर रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मनीष रामदेव/जैसलमेर: अकाल के लिए जाने जाने वाले जैसलमेर जिले में इंदिरा गांधी नहर के आने के बाद यहां की तस्वीर बदलना शुरू हुई थी. खेतीबाड़ी के लिए जो इलाका बरसात पर निर्भर रहा करता था वहां अब नहर आने से साल भर खेती होने लगी और यहां पर जमीनों की कीमतों में भी भारी उछाल आ गया. सरकार द्वारा इस नहरी इलाके में भूमि आवंटन से लेकर यहां की तमाम समस्याओं के निराकरण के लिए उपनिवेशन विभाग का गठन किया गया, ताकि स्थानीय किसानों को समस्याओं के समाधान के लिए भटकना नहीं पड़े. लेकिन कुछ ही समय बाद इस आवंटन के खेल में दलालों का दीमक लग गया. अब अधिकारियों और दलालों की साठगांठ के चलते गरीब वास्तविक आवंटियों के बजाय ज्यादा पैसे देने वालों के आवंटन होने लगे.

उपनिवेशन विभाग की इस कारस्तानी को जानकार आप हैरान रह जाएंगे. क्योंकि विभाग ने मीरा नाम की एक बुजुर्ग महिला को दलालों की सांठगांठ से मृत घोषित कर दिया. दरअसल, मीरा नाम की बुजुर्ग महिला का आवेदन उपनिवेषण विभाग ने यह कह कर निरस्त कर दिया कि उसकी मौत हो गई है और उसकी फाइल को बंद करने की तैयारी की गई. लेकिन किसानों की जागरूकता के चलते मामला बाहर आया. इसके बाद फाइल को खंगालते हुए महिला मीरा की तलाश की गई तो वह जिंदा मिली. वहीं महिला ने नहरी भूमि आवंटन के आवेदन के बारे स्वीकार किया कि उसे आवेदन किया था. लेकिन मीरा का आवेदन उन्हें मृत घोषित कर खारिज कर दिया गया.

ये तो एक मीरा की कहानी है जो सामने आई है. लेकिन इस मीरा ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया है कि अधिकारियों ने ऐसे कितने आवंटियों को मृत घोषित कर उनके हिस्से की जमीनें दलालों को बेच दी हैं. नहर के आने के बाद जहां इलाके में जमीनों की कीमतों में उछाल आया है, वहीं खेतीबाड़ी भी बढ़ी है. जिससे किसानों का जीवन स्तर सुधरा है. लेकिन इस इलाके की जमीनों पर उपनिवेशन विभाग और कुंडली मार कर बैठे दलालों ने कई सारे किसानों के हक का छीनने का काम भी किया है.

दरअसल, सरकार ने इस नहरी इलाके में भूमि आवंटन से लेकर यहां की तमाम समस्याओं के निराकरण के लिए उपनिवेशन विभाग का गठन किया. ताकि स्थानीय किसानों को समस्याओं के समाधान के लिए भटकना नहीं पड़े. लेकिन, उपनिवेषण विभाग के अधिकारी और दलालों ने सांठगांठ कर ली और गरीबों के हक पर डकैती करने लगे. इस पूरे मामले के सामने आने के बाद विभाग के अधिकारी गलती को एक-दूसरे पर डालते नजर आए.