अलवर: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी नहीं रुका अवैध खनन, प्रशासन बोली...

सुप्रीम कोर्ट ने नवम्बर 2019 में राजस्थान में अवैध बजरी के दोहन पर रोक लगाई थी. साथ ही, सभी जिला कलेक्टर ओर एसपी को तत्काल प्रभाव से इसकी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे.

अलवर: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी नहीं रुका अवैध खनन, प्रशासन बोली...
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी नहीं रुका अवैध खनन.

जुगल गांधी/अलवर: राजस्थान के अलवर जिले में अवैध खनन एक नासूर बन चुका है. सुप्रीमकोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा फिर वो चाहे अरावली पर्वतमालाओं से हो रहा अवैध खनन हो या बजरी माफिया द्वारा किया जा रहा खनन यह सब खेल आज भी बदस्तूर जारी है. इस क्षेत्र में पहाड़ के पहाड़ साफ कर दिए गए. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी की थी और पूछा था क्या पहाड़ हनुमान जी ले गए. उसके बाद भी आज तक न तो खनिज विभाग और न ही वन और पुलिस विभाग अवैध खनन को रोक पाए है. आज भी अवैध खनन से भरी बजरी और पत्थरों की गाड़ियां सड़को पर दौड़ती नजर आती है. जिम्मेदार अपनी व्यवस्थाओं के साथ पर्यावरण की उजड़ती तस्वीर में अपनी मुख्य भूमिका निभा रहे है.

बता दें कि, अलवर जिले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने नवम्बर 2019 में राजस्थान में अवैध बजरी के दोहन पर रोक लगाई थी. साथ ही, सभी जिला कलेक्टर ओर एसपी को तत्काल प्रभाव से इसकी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे. सुप्रीमकोर्ट ने अवैध रेत खनन से पर्यावरण को अपूर्णीय क्षति होने की संभावना जताई. आज इन माफियाओं के चलते जहा अरावली पर्वतमाला खत्म होती जा रही है. वही, नदियां नाले भी लुप्त होते जा रहे है, बांध हो या कैचमेंट एरिया यहां तक कि नदियों में भी अतिक्रमण कर लिए गए. जिसके कारण नदियों का पानी आना खत्म हो गया. जिसके चलते भूजल स्तर भी इस कदर गिर चुका है कि आज पूरा जिला डार्कजोन की स्थिति में आ चुका है.

अब नदियों को उजाड़ने की रही सही कसर बजरी माफिया पूरी कर रहे हैं. अलवर जिले में कभी तीन नदिया सावी, रूपारेल और बाणगंगा नदी बारामासी यानी बारा महीने बहती थी. इसके अलावा छोटी नदियां, नाले तालाब जोहड़ जो इन्ही नदियो से जिंदा थे सब खत्म हो चुके है. सावी नदी जिससे शाहपुरा, बैराठ, बानसूर, बहरोड और मुंडावर को फायदा मिलता था. वहीं, रूपारेल अजीत नगर, बैराठ, थानागाजी और प्रतापनगर को इसका लाभ मिलता था आगे यह मथुरा से जमुना नदी में विलय हो जाती थी. अगर बात बाणगंगा नदी की करे तो इसका फायदा भरतपुर से राजगढ़ और दौसा तक मिलता था. वहीं, छोटी नदियों में चाहे गाजू की नदी हो या सोनपुर और मौजपुर की नदी मात्र अब बरसाती नाले बनकर रह गए है.

लगातार चल रहे बजरी के अवैध खनन को आज तक कोई नही रोक पाया, इसके लिए जिम्मेदार विभाग आंखे मूंदे बैठे है, अलवर के आसपास ऐसे अनेको गांव है जहां अवैध बजरी खनन देखा जा सकता है लेकिन उनके क्षेत्र में जाकर कार्यवाही करने की भी हिम्मत प्रशासन में नजर नही आ रही, ऐसे अनेको वाहन सड़को पर बजरी से भरे हुए नजर आ जाते है यहां तक कि थानों के आसपास, खनिज विभाग के दफ्तर के पास ओर पुलिस और वन विभाग की चौकियों के आगे से वाहन बेख़ौफ़ निकल रहे है.

इसके अलावा बजरी बनास से और बंदुकुई से लाकर भी भारी मात्रा में अलवर में सप्लाई की जा रही है, जब से बजरी पर रोक लगी है तब से बजरी के दाम भी आसमान पर पहुंच गए है, ठेकेदार और बजरी विक्रेताओं को पुलिस का कोई भय नहीं वह खुल्ले में कहते है, घर पर बजरी पहुंचाने की उनकी गारंटी है.

आज भी ऐसे अनेको निजी और सरकारी निर्माण कार्य चल रहे है जहां बजरी से काम चल रहा है. हालांकि, इसका सबटिट्यूट क्रेशर से आने वाली स्टोन डस्ट हो सकती है लेकिन, एनसीआर में क्रेशर पर भी पॉल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड ने बैन किया हुआ है. इस मामले में जब जिला पुलिस अधीक्षक से बात की उनका कहना है यहां बजरी का परिवहन ज्यादा है, इसके लिए जिला कलेक्टर द्वारा एक एसआईटी टीम का गठन किया है. जिसमे खनिज, वन और पुलिस विभाग सहित तहसीलदार और सियोज को शामिल किया है. इस पर सख्ती से अवैध कार्य करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.