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Rajasthan News: भिवाड़ी के फूलबाग थाना परिसर के बाहर आज एक महिला अपनी चार साल की बेटी को एक पेड़ के नीचे लिटाकर फूट-फूट कर रोती हुई नजर आई. बच्ची सलोनी के पूरे शरीर पर पट्टियां बंधी हुई थीं, और उसकी हालत देखकर हर कोई दंग रह गया. महिला और उसका पति थाने में शिकायत लेकर पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें सिर्फ इस वजह से बाहर भेज दिया क्योंकि वे अनपढ़ थे. संतरी पहरे पर तैनात पुलिसकर्मी ने दोनों को गेट से बाहर निकालते हुए कहा कि “अंदर पुलिस के बड़े अधिकारियों की मीटिंग चल रही है, बाहर से शिकायत टाइप करवा कर लाओ.”
यह घटना तब सामने आई जब मीडिया ने महिला से बात की, और तभी पास खड़े अन्य पुलिसकर्मियों ने स्थिति को समझते हुए महिला को थाने के अंदर ले लिया. महिला ने अपनी पीड़ा बयान करते हुए कहा कि 14 फरवरी को भिवाड़ी गांव में एक शादी के दौरान एक गाड़ी ने उसकी बेटी सलोनी को टक्कर मार दी थी. हादसे में घायल बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, और आज जब वे शिकायत लेकर थाने पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें बाहर भेज दिया.
सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस की संवेदनहीनता की कोई सीमा नहीं है? यह घटना ऐसे समय में हुई है जब एडीजी ने सभी थानों के पुलिसकर्मियों को आदेश दिया था कि वे परिवादियों के साथ सही तरीके से पेश आएं और उनकी मदद करें. वहीं, जिले की पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्री भी नए नवाचारों के माध्यम से पुलिस और जनता के बीच के अंतर को कम करने के प्रयासों में लगी हुई हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं उनकी मेहनत को नकारा कर देती हैं.
यह घटना पुलिस व्यवस्था की गंभीर समस्या को उजागर करती है, और समाज में पुलिस के प्रति अविश्वास को और बढ़ाती है. इस पर प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं का सामना न करना पड़े.
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Reported By- कुलदीप मावर