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Alwar News: जिले के खेड़ली कस्बे में शनिवार को एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. यहां निवासी रामनिवास शुक्ला के निधन के बाद उनकी दोनों बेटियों ने वह जिम्मेदारी निभाई, जिसे समाज वर्षों से बेटों का हक मानता आया है.
रामनिवास शुक्ला के परिवार में कोई बेटा नहीं था. उनकी बड़ी बेटी दीक्षा शुक्ला और छोटी बेटी उर्वशी शुक्ला ने समाज की परंपरा को तोड़ते हुए अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया और शमशान भूमि पर स्वयं मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद सैकड़ों लोग भावुक हो उठे और बेटियों पर गर्व महसूस किया.
जानकारी के अनुसार, करीब डेढ़ महीने पहले रामनिवास शुक्ला अपनी पत्नी गिरजेश देवी के साथ सड़क हादसे का शिकार हो गए थे. हादसा इतना भयंकर था कि रामनिवास गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया. बेटियां दिन-रात अस्पताल में रहकर अपनी मां के साथ पिता की सेवा करती रहीं लेकिन शुक्रवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
बेटे और बेटियों में कोई फर्क नहीं
शमशान भूमि में जब बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा दिया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में आंसू थे. बेटियों ने मुखाग्नि देकर यह साबित कर दिया कि बेटे और बेटियों में कोई फर्क नहीं है. यह दृश्य पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया.
आर्थिक संकट में फंसा परिवार
रामनिवास शुक्ला आर्थिक रूप से कमजोर थे और वही परिवार के भरण-पोषण का सहारा थे. अब उनके जाने के बाद परिवार पर संकट गहराया है.
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