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Karni Mata Temple : 22 सितंबर से नवरात्र शुरू होने वाले हैं. 9 दिन तक चलने वाले नवरात्र में अलवर के करणी माता के मंदिर में नवरात्र पर सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंचते हैं. करणी माता का लक्खी मेला भरता है. साल में दो नवरात्रों के दौरान यहां मेले भरते हैं. जिला प्रशासन द्वारा पूरी व्यवस्था की जाती है लेकिन इस बार बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों की दीवारें ढह जाने से सड़क बह गई. करणी माता का मंदिर बाला किला की पहाड़ियों में स्थित है, जो शहर से करीब 5 किलोमीटर अंदर पहाड़ियों में घूमते हुए मंदिर तक पहुंचा जाता है.
बरसात में बाला किला, करणी माता मंदिर जाने वाले रास्ता प्रमुख रूप से चार जगह से पूरे क्षतिग्रस्त हो गया है. हालांकि इन क्षतिग्रस्त रास्तों का निरीक्षण राजस्थान सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने भी किया था .और जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को इन दीवारों को शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे. पहला विकट मोड़ के पास तेज बारिश से पूरी दीवार सड़क सहित नीचे की ओर करीब 100 फीट नीचे तक बह गई. उसे सड़क की ऊंचाई 100 फुट के आसपास है .अब नवरात्र शुरू होने में 12 दिन शेष हैं. ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा इस सड़क को पूरी तरह बनाने के प्रयास तेज किया जा रहे हैं. .लगातार काम हो रहा है. लेकिन बरसात से कार्य करने में व्यवधान भी पैदा हो रहा है. क्योंकि जिस तरीके का यह काम है. उसमें मजदूर काम करने में अपने आप को दिक्कत महसूस करते है और जिस तरीके का यह काम है. वहां काम करना बहुत मुश्किल है क्योंकि यह पूरा इलाका पहाड़ी क्षेत्र का है.
यहां पहाड़ी क्षेत्र की सड़क दुरुस्त करने के लिए निपुण मजदूर नहीं है. सार्वजनिक निर्माण विभाग की सहायक अभियंता मौके पर तैनात रहकर इस काम को अंजाम दे रही है. .लगातार काम किया जा रहा है .मिट्टी से भरे कट्टो को लगाकर उनकी नींव मजबूत की जा रही है. और जिस प्रकार की मिट्टी उपयोग उपयोग की जा रहा है. वह काफी मजबूत स्थिति की मिट्टी है. उम्मीद यह जताई जा रही है कि नवरात्र से पहले इस रास्ते को इस तरीके से दुरुस्त कर दिया जाए .जिससे पैदल जाने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हो. जब तक यह मोड का कार्य पूरा नहीं होगा. तब तक आगे के कार्य भी पूरे नहीं होंगे क्योंकि वाहनों को निकालने और सामान ले जाने में दिक्कत हो रही है.
क्या कहना है सार्वजनिक निर्माण विभाग की सहायक अभियंता का
सार्वजनिक निर्माण विभाग की सहायक अभियंता ममता ने बताया कि बारिश के कारण दीवार टूट गई थी. और अब दीवार को सही किया जा रहा है .सेफ्टी उपकरणों का पूरा ध्यान रखा गया है. सुरक्षा का ध्यान रखा गया है और दीवार को खड़ा करने के लिए स्लोव बनाया जाएगा और रोड को चालू करने के प्रयास किए जाएंगे.अभी तो अस्थाई रेस्टोरेशन कार्य किया जा रहा है, जिससे नवरात्र शुरू होने वाले हैं.माता के दरबार में दर्शन करने के लिए श्रद्धालु पैदल जा सके. बजट आवंटित होते ही उसके बाद इस पर आरसीसी का काम शुरू किया जाएगा. अभी नवरात्र के दौरान इस पर बैरिकेट्स करेंगे और रास्ते को सुगम बनाने का प्रयास किया जाएगा. करीब 20 से 30 मजदूर लगातार इसमें काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यहां से अभी रास्ता बनाने का प्रयास किया जा रहा है. क्योंकि ट्रैक्टर ट्रॉली द्वारा मेटेरियल पहुंचने में दिक्कत आ रही है. इसलिए यह रास्ता सही होने पर आगे तक मैटेरियल पहुंचाया जाए. उसके बाद धीरे-धीरे सभी क्षतिग्रस्त दीवारों को सही कर दिया जाएगा.
इस कार्य को कर रहे ठेकेदार धारू मल ने बताया कि यह बड़ा काम है और तेज गति से चल रहा है. वन मंत्री संजय शर्मा भी निर्देश देकर गए थे. काम को जल्दी से जल्दी करो मेला भरेगा. इसलिए जल्दी से जल्दी काम किया जा रहा है क्योंकि मिट्टी लाने में दिक्कत हो रही है. मिट्टी को तीन जगह से लाया जा रहा है. जो काफी दूर है. एक बेरावास ,महवा और घेघोली से मिट्टी लाई जा रही है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस काम को 5 से 7 दिन में पूरा कर लिया जाएगा. इसके बाद मिट्टी से कट्टे भरकर स्टॉक रखेंगे और आगे काम किया जाएगा. इस सड़क और दीवार की मजबूती के लिए लोह के जाल लगाए जाएंगे. सीमेंट और रोड़ी भरी जाएगी. और उसको और मजबूत करने के लिए लोहे के एंगल लगाए जाएंगे. अभी तक इस संबंध में कोई बजट स्वीकृत नहीं हुआ है. लेकिन मेरे द्वारा करीब 20 लाख रुपये अब तक लग चुके है. .क्योंकि मेरा भी एक ध्येय है की माता के मेले में श्रद्धालु आसानी से जाएं. इसलिए जल्दी से जल्दी काम को पूरा करने की कोशिश की जा रही है.
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