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Alwar News: राजस्थान की धरती अपनी धार्मिक मान्यताओं और आस्थाओं के लिए विश्वभर में जानी जाती है. इन्हीं आस्थाओं में से एक करणी माता का पावन मेला है, जो आज पहले नवरात्रि से दस दिनों के लिए आरंभ हो गया है.
सुबह की पहली किरण के साथ ही श्रद्धालु माता के दर्शन करने मंदिर की ओर उमड़ पड़े. सुबह छह बजे से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ नजर आने लगी. इस बार खास बात यह है कि पारंपरिक नौ दिनों के बजाय पूरे दस दिनों तक मेले का आयोजन होगा.
कहते हैं कि राजा बख्तावर सिंह को पेट में एक बार गंभीर दर्द हुआ था, नीम-हकीमों के इलाज के बाद भी जब दर्द ठीक नहीं हुआ, तो दरबार के रक्षक बारैठ ने उन्हें मां करणी का ध्यान करने की सलाह दी. वहीं, राजा ने मां करणी का ध्यान किया और तभी बाला किला पर एक सफेद चील आकर बैठी. इसके बाद राजा का दर्द ठीक हो गया और इसी खुशी में उन्होंने बाला किला में करणी माता का मंदिर बनवाया था.
वन मंत्री संजय शर्मा भी मंदिर परिसर में पहुंचे. उन्होंने देशवासियों के लिए खुशहाली की कामना की. नवरात्रि के इन पावन दिनों में लाखों लोग माता करणी के दरबार में हाजिरी लगाते हुए अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करेंगे.
मंदिर के महंत उमेश शर्मा ने बताया कि करणी माता मंदिर की स्थापना राजा बख्तावर के समय में हुई थी तब से लेकर आज तक यह मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, बिहार समेत अन्य कई राज्यों से भक्त बड़ी संख्या में यहां आते हैं.
माता करणी के दरबार में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं और यह मान्यता है कि माता हर भक्त की सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूरी करती हैं. यही कारण है कि वर्षों से यह मेला न केवल धार्मिक आयोजन बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संगम का प्रतीक बन चुका है.
मेले के पहले ही दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. कई लोग सुबह-सुबह पैदल यात्रा कर माता के दर्शन के लिए निकले तो कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ बाइक पर मंदिर तक पहुंचे. इस बार प्रशासन ने सड़क की स्थिति को देखते हुए चार पहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई है. टूटी हुई सड़क से किसी तरह की दुर्घटना न हो, इसलिए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से केवल पैदल या दोपहिया वाहनों से ही यात्रा करने का आग्रह किया है. भक्तों ने भी इस व्यवस्था का स्वागत करते हुए पैदल यात्रा को आस्था का हिस्सा मान लिया.
आमतौर पर करणी माता का मेला नवरात्रि के नौ दिनों तक चलता है लेकिन इस बार पूरा दस दिन तक यह आयोजन होगा. इस दौरान माता के दरबार में रोजाना सुबह-शाम आरती होगी और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा.
मंदिर में जगह-जगह भजन-कीर्तन की गूंज सुनाई देगी और भक्तों के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहेगा. जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने इस बार मेले की व्यवस्थाओं में कोई कसर नहीं छोड़ी है. मंदिर परिसर और मार्गों पर जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी श्रद्धालु को परेशानी का सामना न करना पड़े.
साथ ही, मेडिकल टीम, एंबुलेंस और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी पास में ही सक्रिय रखे गए हैं. भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए हैं और वाहनों की पार्किंग के लिए अलग-अलग स्थान चिन्हित किए गए हैं. प्रशासन का कहना है कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच सकती है इसलिए सुरक्षा और व्यवस्था दोनों पर विशेष ध्यान दिया गया है.
मेले में केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों की भी बहार रहती है. दूर-दराज से आए व्यापारी अपने-अपने स्टॉल लगाते हैं, जहां ग्रामीण संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. पारंपरिक वस्त्र, खिलौने, मिठाइयां बच्चों व युवाओं को आकर्षित करते हैं.
जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासनिक नियमों का पालन करें. भीड़भाड़ वाले स्थानों पर धैर्य रखें और अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें. साथ ही.पुलिस ने भी श्रद्धालुओं से कहा है कि किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंत नजदीकी पुलिसकर्मी से संपर्क करें.
डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.
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