राजस्थान के इस गांव में है सकट चौथ माता का मंदिर, जानें पूजा-विधि और कथा

Sakat Chauth 2026: आज यानी 6 जनवरी को सकट चौथ के त्योहार है. सकट चौथ का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. सकट चौथ पर मुख्य रूप से भगवान गणेश और माता चौथ की पूजा की जाती है. ऐसे में आज हम आपको राजस्थान के विशेष सकट चौथ माता के मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो लगभग 630 साल पुराना बताया जाता है. 

राजस्थान के इस गांव में है सकट चौथ माता का मंदिर, जानें पूजा-विधि और कथा
Image Credit: Sakat Chauth Mata Mandir

Sakat Chauth 2026: प्रदेश के अलवर जिले से लगभग 60 किमी दूर सकट नाम का एक गांव है, जहां पर वहां संकट चौथ माता का मंदिर स्थित है. इस मंदिर में गणेशजी और भगवान भैरव की मूर्तियां भी हैं इसलिए चौथ के दिन यहां गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है.संकष्टी चतुर्थी व्रत बहुत खास माना जाता है. इस व्रत को वक्रतुंडी चतुर्थी, माघी चौथ और तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है.

हिंदू पचांग के अनुसार, ये व्रत माघ महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है. सकट चौथ का व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता गै. राजस्थान में इसी तिलकुट चतुर्थी के दिन चौथ का बरवाड़ा नाम की जगह पर एक बड़ा मेला लगता है.

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सकट गांव मंदिर के मंदिर के शिलालेख से पता चलता है कि विक्रम संवत 626 साल पहले जयपुर के महाराजा मानसिंह प्रथम ने चौथ माता का मंदिर बनावाया और इसके बाद सकट गांव बसा था. पहले ये गांव मंदिर से लगभग दो किलोमीटर दूर काली पहाड़ी की तलहटी में था.

सकट चतुर्थी की कथा
सकट चतुर्थी के कही कथाएं प्रचलित है. कहा जाता है कि एक दिन माता पार्वती और भगवान शिव नदी किनारे बैठकर चोपड़ खेल रहे थे लेकिन वहां उनके अलावा कोई नहीं था, जो हार जीत का फैसला कर सकें. इसके चलते माता पार्वती और शिव जी ने एक मिट्टी की मूर्ति में जान फूंक दी और उसे निर्णायक की भूमिका दे दी.

वहीं, खेल में माता पार्वती लगातार तीन से चार बार जीती लेकिन एक बार बालक ने गलती से माता पार्वती को हारा हुआ और भगवान शिव की जीत घोषित कर दी, जिससे माता पार्वती उससे गुस्सा हो गई और बालक को लंगड़ा बना दिया. बालक ने माता से माफी मांगी लेकिन श्राप अब वापस नहीं जा सकता था. फिर माता ने उससे उपाय बताया कि संकष्टी के दिन यहां पर कुछ कन्याएं पूजा के लिए आती है उनसे व्रत और पूजा की विधि पूछना और तुम भी वैसे ही व्रत और पूजा करना. फिर बालक ने वैसे ही किया और उसकी पूजा से प्रसन्न होकर भगवान गणेश उसके संकटों को दूर किया.
सकट चौथ पर पूजा विधि
सबसे पहले सुबह स्नान के बाद चौथ माता की मूर्ति या तस्वीर को फूलों से सजाएं
व्रत का संकल्प लें और दिनभर निर्जला उपवास रखें
शाम को चंद्रमा देख अर्घ्य दें
चौथ माता और भगवान गणेश की आरती करें

डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.
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Sneha Aggarwal

Sneha Aggarwal

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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