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बाड़मेर के अस्पताल में सामने आया कर्मचारी का एम्बुलेंस घोटाला, मामला दर्ज

मामले का जब खुलासा हुआ तो बाड़मेर पीएमओ डॉ. संजीव मित्तल ने गड़बड़झाला करने वाले कंपाउंडर के खिलाफ कोतवाली में मामला दर्ज करवाया. 

बाड़मेर के अस्पताल में सामने आया कर्मचारी का एम्बुलेंस घोटाला, मामला दर्ज
घटनाक्रम सामने आने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

बाड़मेर/भूपेश आचार्य: जोधपुर के जिले के सबसे बड़े अस्पताल की एम्बुलेंस सेवा पर तब सवाल खड़े हो गए जब सरकारी एम्बुलेंस के पार्ट्स खोलकर निजी एम्बुलेंस में लगाने का मामला सामने आया. दरसअल, सरकार ने नई एम्बुलेंस भेजी, जिसके इंजन, पार्ट्स, गेयर्स सैट बदलकर पुराने लगा दिए गए और नई एम्बुलेंस के पार्ट्स को निजी एम्बुलेंस में लगा दिया गया. 

खबर के मुताबिक जिस एम्बुलेंस में नए पार्ट्स लगाए गए वह एम्बुलेंस अस्पताल में कार्यरत एक कंपाउंडर की है. मामले का जब खुलासा हुआ तो बाड़मेर पीएमओ डॉ. संजीव मित्तल ने गड़बड़झाला करने वाले कंपाउंडर के खिलाफ कोतवाली में मामला दर्ज करवाया. अब पूरा घटनाक्रम सामने आ चुका है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में एंबुलेंस को लेकर एक चौका देने वाला मामला सामने आया है. नई एंबुलेंस के पास खोलकर एक कंपाउंडर ने अपनी निजी एंबुलेंस में लगाकर पुराने पार्ट्स को सरकारी नई एंबुलेंस में लगा दिए गए मामला तब सामने आया जब एक सरकारी ड्राइवर एम्बुलेंस लेकर रवाना हुआ तो एम्बुलेंस ने तकनीकी समस्या नज़र आई. मिस्त्री को दिखाने पर मामला खुल गया. एम्बुलेंस नई होते हुए भी इसके इंजन और गियर पुराने मिले. 

जब मामले का पता किया गया तो सामने आया कि सरकारी एम्बुलेंस के पार्ट्स खोलकर किसी निजी एम्बुलेंस में लगा दिए गए. मामले में खास मोड़ तो तब आया जब पता चला कि जिस एम्बुलेंस में नए पार्ट्स लगाए गए है, उसी कंपाउंडर के पास एम्बुलेंस संचालन की जिम्मेदारी भी है. जिसके बाद पीएमओ ने कोतवाली पुलिस थाने में कंपाउंडर के खिलाफ मामला दर्ज करवाया. हालांकि, बाड़मेर पीएमओ ने मामले पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया और कोतवाली में मामला दर्ज होने की बात कही.

वहीं मामले को लेकर अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने बताया कि घटनाक्रम को लेकर पीएमओ संजीव मित्तल से बात हुई है.पीएमओ के अनुसार मामला दर्ज करवा दिया गया है. उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थिति में सरकारी एम्बुलेंस की उपलब्धता पर सरकारी एम्बुलेंस ही उपलब्ध करवाए जाने के निर्देश दिए गए है. कोताही बरतने पर कार्यवाही की जाएगी.

जिले के सबसे बड़े अस्पताल में इस तरीके का घोटाला सामने आना अपने आप में चौका देने वाला है. गांव से आने वाली गरीब मरीज यह उम्मीद करते हैं कि अगर उनका बाड़मेर जिले में अस्पताल में इलाज नहीं होगा तो उन्हें जोधपुर रेफर किया जाएगा. ऐसे में सरकार की ओर से एंबुलेंस की सुविधा मिलेगी लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते सरकारी एंबुलेंस का फायदा गरीब मरीजों को नहीं मिल पाता. इस तरीके से सरकारी कर्मिक सरकारी एंबुलेंस और को नुकसान पहुंचा कर अपनी निजी एंबुलेंस से भारी रकम लेकर गरीब मरीजों को रेफर करते हैं. अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले में अस्पताल प्रशासन कंपाउंडर के खिलाफ कब कार्रवाई करता है.