पाली: जर्जर भवनों में संचालित हो रहे आंगनबाड़ी केंद्र, आंखें मूंदे हैं अधिकारी

अधिकारियों की उदासीनता के चलते केंद्र को अभी तक जुलाई और अगस्त माह का पोषाहार भी नहीं प्रदान किया गया है. 

पाली: जर्जर भवनों में संचालित हो रहे आंगनबाड़ी केंद्र, आंखें मूंदे हैं अधिकारी
प्रतीकात्मक तस्वीर.

सुभाष रोहिसवाल, पाली: एक तरफ जहां सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण से बचाने और बच्चों के पोषण-स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र  संचालित कर रही तो आंगनबाड़ी केंद्र वहां आने वाले बच्चों के लिए मौत का रास्ता बन रहे हैं लेकिन ग्राम सेवक, सरपंच और जिला प्रशासनिक अधिकारी इस और ध्यान नहीं हैं. 

बात कर रहे हैं पाली जिले के रोहट तहसील के सांवतला खुर्द गांव में संचालित आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य केंद्र की, जो इतनी जर्जर अवस्था में है कि वहां तैनात केंद्र संचालिका और अन्य कर्मियों को आंगन में बैठ कर काम करना पडता है और जब अब कोरोना के चलते बच्चे घर पर हैं, उनको केंद्र और राज्य सरकार के आदेशनुसार घर ही पोषाहार पहुंचाना पड़ रहा है. 

ऐसे अधिकारियों की उदासीनता के चलते केंद्र को अभी तक जुलाई और अगस्त माह का पोषाहार भी नहीं प्रदान किया गया है. भवन पिछले 15 सालों से जर्जर अवस्था में है और वहां पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है. वहां काम रहे स्वास्थ कर्मी और अन्य सदस्यो को आस-पास के घरों से पीने के पानी की बाल्टी भरकर लानी पड़ती है.  

ऐसे में अब यहां बच्चों का आना शुरू होता है तो उनके जीवन की रक्षा तो भगवान भेरोसे ही रहेगी? ऐसा नहीं है कि इस केंद्र पर प्रशासनिक अधिकारियों की विजिट नहीं होती. वे हर माह केंद्र पर विजिट करते हैं लेकिन उन्हें यह जर्जर भवन दिखाई नहीं देता है. 

दिखाई देता है तो केवल वहां का रजिस्टर और वहां की सफाई व्यवस्था. इतना ही नहीं, ग्रामीणों द्वारा जानवरों का मल और गोबर भी आंगनबाड़ी केंद्र के पास ही डाला जाता हैं, जिस पर भी शायद किसी अधिकारी का ध्यान गया नहीं हो.