श्रीगंगानगर: 10 सालों से जंजीरों में कैद है 22 साल के अंग्रेज सिंह की जिंदगी, हालत देख आप...

सादुलशहर विधानसभा के गांव जोगीवाला के महेंद्र सिंह ने बताया कि बेटे का 11 साल पहले मानसिक संतुलन बिगड़ा था. 

श्रीगंगानगर: 10 सालों से जंजीरों में कैद है 22 साल के अंग्रेज सिंह की जिंदगी, हालत देख आप...
मां को को उम्मीद है एक न एक दिन अंग्रेज सही होकर फिर से अपनी दुनिया में आ जाएगा

कुलदीप गोयल, सादुलशहर: जिंदगी किस तरह से इम्तिहान लेती है, इसकी तस्वीरें श्रीगंगानगर (Sri Ganganagar) के सादुलशहर (Sadul Shahar) में सामने आई हैं. यहां 22 साल का अंग्रेज सिंह नाम के एक शख्स को पिछले 10 सालों से उसके माता-पिता ने मजबूरी में बांध रखा है.

पिछले 10 सालों से इसकी दुनिया एक चारपाई और कुछ जंजीरें हैं, जिसमें यह जकड़ा हुआ है. दिन-रात चिल्लाना, कोई सामने आ जाए तो काट खाना, ऐसे में लोग उसे पागल समझने लगते हैं. बेटा घर में कैद है, जिसे देख कर माता-पिता की आंखों में आंसू आते हैं. ये कई सालों से एक ही चारपाई से बंधा हुआ है. 

वहीं, सादुलशहर विधानसभा के गांव जोगीवाला के महेंद्र सिंह ने बताया कि बेटे का 11 साल पहले मानसिक संतुलन बिगड़ा था. पैसे न होने के कारण सरकारी अस्पताल में ही इलाज करवाया पर राहत नहीं मिली. तब से अंग्रेज सिंह को जंजीरों में बांधा हुआ है.

मां से नहीं देखई जाती बेटे की हालत
मां बलजीतकौर बेटे को जंजीरों में बंधा देखते सारे दिन रोती रहती है. मां का कहना है कि बेटे की यह हालत अब और नहीं देखी जाती. घर के सभी लोग मजदूरी करते हैं. कभी-कभी अंग्रेज को घर पर अकेले छोड़ कर चले जाते हैं तो सारे दिन उसकी ही चिंता लगी रहती है. अंग्रेज की ऐसी हालत के चलते भाई ने बीच में पढ़ाई छोड़ दी. परिवार गरीब है, लेकिन कोई सरकारी मदद नहीं मिलती. अंग्रेज के भाई ने बताया कि हम उसे जंजीरों में बांधकर इसलिए रखते हैं क्योंकि कभी-कभी वह अपने आप को नुकसान पहुंचा लेता है. इसलिए हमारी भी मजबूरी है.

सरकार से उम्मीद की दरकार
मां को को उम्मीद है एक न एक दिन अंग्रेज सही होकर फिर से अपनी दुनिया में आ जाएगा. वाहेगुरु जी से अब एक ही प्रार्थना है कि वह ठीक हो जाए. अंग्रेज सिंह का इलाज मुमकिन है लेकिन इस परिवार की कुछ जरूरतें हैं. जरूरत है कुछ हाथों को आगे आने की. शासन प्रशासन के प्रयास से कई सालों से गम के अंधेरे में जी रहे इस परिवार को रौशनी की किरण दिखाई जा सकती है.