राजस्थान पंचायत चुनाव का रास्ता साफ, दोबारा निकलेगी बची सीटों की आरक्षण लॉटरी

आदेश के अनुसार, 5 फरवरी तक संबंधित जिला कलेक्टर्स को 4 हजार 582 शेष बची ग्राम पंचायतों के सरपंच-वार्डपंच की लॉटरी निकालनी होगी.

राजस्थान पंचायत चुनाव का रास्ता साफ, दोबारा निकलेगी बची सीटों की आरक्षण लॉटरी
4 हजार 582 शेष बची ग्राम पंचायतों के सरपंच-वार्डपंच की लॉटरी निकालनी होगी.

जयपुर: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद पंचायत चुनाव (Panchayat) का रास्ता साफ हो गया है. राजस्थान (Rajasthan) में शेष बची 4 हजार 585 ग्राम पंचायतों में अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में गांव की सरकार बनाने के लिए चुनाव होंगे. इन ग्राम पंचायतों में वार्ड पंच और सरपंचों की आरक्षण की लॉटरी (Reservation lottery) 5 फरवरी तक दोबारा निकलेगी.

साथ ही जिन जिलों में नवसृजित पंचायत हैं, वहां प्रधानों की लॉटरी निकलेगी और जिन पंचायत समितियों का पुर्नगठन हुआ है, उनके पंचायत समिति सदस्यों की भी लॉटरी निकाली जाएगी. इसमें तय होगा कि ग्राम पंचायत में किस वर्ग का वार्ड पंच और सरपंच होगा?

पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 4 हजार 585 ग्राम पंचायतों में चुनाव को लेकर संकट के बादल छंट गए हैं लेकिन ग्रामीण एवं पंचायतीराज विभाग के शेष बची ग्राम पंचायतो में दोबारा आरक्षण की लॉटरी निकालने के आदेशों ने कही खुशी और गम वाली स्थिति पैदा कर दी है. वहीं, प्रथम चरण में स्थगित हुए 1 हजार 121 ग्राम पंचायतों में वार्ड पंच और सरपंच कन के लिए नामांकन दाखिल कर चुके सरपंच उम्मीदवारों के माथे पर चिंता की लकीर साफ दिखाई दे रही हैं. 

सरपंच उम्मीदवारों का कहना है कि सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं. सिर्फ मतदाताओं के मतदान केंद्रों पर पहुंचकर ईवीएम में बटन दबाने की देरी थी लेकिन ऐन वक्त अरमानों पर पानी फिर गया. तो कुछ ऐसे भी उम्मीदवार जिनका कहना है कि दोबारा लॉटरी निकलेगी तो पता नहीं किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी? क्या दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा या नहीं. अब सब भगवान भरोसे है. तो कुछ ऐसे भी उम्मीदवार हैं जो कहते है कि उनकी ग्राम पंचायत में सालों बाद सीट रिजर्व हुई थी लेकिब अब दोबारा लॉटरी निकलेगी तो क्या होगा. 

आदेश के अनुसार, 5 फरवरी तक संबंधित जिला कलेक्टर्स को 4 हजार 582 शेष बची ग्राम पंचायतों के सरपंच-वार्डपंच की लॉटरी निकालनी होगी. साथ ही जिन जिलों में नवसृजित पंचायत है, वहां प्रधानों की लॉटरी निकलेगी. वही जिन पंचायत समितियों का पुर्नगठन हुआ है उनके पंचायत समिति सदस्यों की भी लॉटरी निकाली जाएगी. 

सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों के पुनर्गठन मामले में राजस्थान सरकार को राहत देते हुए बाकी ग्राम पंचायतों में नोटिफिकेशन के अनुसार अप्रैल की मध्यावधि में चुनाव कराने को कहा है. सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग ने कहा कि उन्हें चुनाव कराए जाने के लिए समय चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में चुनाव कराए जाने का समय दिया. सुप्रीम कोर्ट के सीजे आई एसए.बोबड़े, की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों की एसएलपी पर दिया. 

दरअसल, राज्य सरकार ने एसएलपी में हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अदालत ने 85 याचिकाओं में फैसला देते हुए ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन के लिए राज्य सरकार की ओर से 15 और 16 नवंबर के बाद जारी सभी नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आठ जनवरी को हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ के 13 दिसंबर 2019 के आदेश की क्रियान्विति पर रोक लगा दी थी. राज्य सरकार की ओर से एएजी मनीष सिंघवी और एएजी आरपी सिंह ने दलील दी थी कि राज्य सरकार को नोटिफिकेशन जारी करने का अधिकार है. ऐसे में राज्य सरकार की ओर से की गई कार्रवाई विधायी थी और हाईकोर्ट को उसमें दखल देने का अधिकार नहीं था. नई गठित की गई पंचायतों व पंचायत समितियों से प्रार्थियों के किन्हीं मौलिक और विधिक अधिकारों का हनन नहीं हुआ है.

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव भी कराए जा सकते हैं लेकिन मुसीबत उन भावी सरपंचों के लिए है जो कि सरपंच की कुर्सी पर बैठने का सपना संजोए हुए थे और अपना नामांकन भी दाखिल कर चुके थे. नामांकन पत्र तो सीलबंद लिफाफे में है. लेकिन नए सिरे से होने वाली आरक्षण की लॉटरी से सरपंचाई की कुर्सी डगमगा गई है.