राजस्थान कांग्रेस में इन पदों पर होनी हैं नियुक्तियां, नेता-कार्यकर्ताओं में जगी आस

पीसीसी के पूर्व महासचिव रुपेश कांत व्यास ने कहा कि कार्यकर्ताओं की सरकार से बड़ी उम्मीदें हैं और आने वाले दिनों में उम्मीदें पूरी भी होंगी.

राजस्थान कांग्रेस में इन पदों पर होनी हैं नियुक्तियां, नेता-कार्यकर्ताओं में जगी आस
प्रतीकात्मक तस्वीर.
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जयपुर: राजस्थान की राजनीति में जुलाई-अगस्त में 34 दिन तक चले उठापटक के घटनाक्रम के बाद थोड़ी शांति हो गई है, लेकिन सरकार और सत्ताधारी पार्टी से जुड़े अधिकांश लोगों की निगाहें अब भविष्य पर जम गई हैं. 
ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी में अब हर कोई आगामी दिनों होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों में अपनी जगह बनाने की जुगत में लगा है, तो कुछ लोग संगठन में अपना स्थान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं. इस बीच नया फार्मूला राजनीतिक नियुक्तियों में विधायकों को तरजीह देने का भी तैयार किया गया है.

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन को 20 महीने हो गए हैं. ऐसे में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस नेताओं का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है. इस बीच सरकार के रणनीतिकारों ने राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर एक नया फार्मूला सुझाया है. इस फॉर्मूले में बोर्ड और निगमों में पदों पर किए जाने वाले प़ॉलिटिकल अपॉइंटमेंट में विधायकों को प्राथमिकता देने का प्रोफार्मा तैयार किया गया है. हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां पार्टी के केंद्रीय नेताओं की तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही होने हैं लेकिन इस फार्मूले के पैरोकारों ने सरकार को तकरीबन 55 बोर्ड निगमों के पदों की लिस्ट के साथ ही 14 यूआईटी में अध्यक्ष पर भी विधायकों की नियुक्ति का विकल्प भी सुझाया है.

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इन पदों पर होती है राजनीतिक नियुक्ति 
अध्यक्ष, जन अभाव अभियोग निराकरण समिति.
अध्यक्ष, वित्त आयोग राज्य वित्त आयोग.
अध्यक्ष, समाज कल्याण बोर्ड.
उपाध्यक्ष, 20 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति.
अध्यक्ष, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड.
अध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग. 
अध्यक्ष, मदरसा बोर्ड.
अध्यक्ष, वक्फ बोर्ड.
अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग.
अध्यक्ष, राजस्थान डांग क्षेत्र विकास बोर्ड.
अध्यक्ष, राजस्थान खादी ग्राम उद्योग बोर्ड.
अध्यक्ष, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड.
अध्यक्ष, राज्य खेल परिषद.
अध्यक्ष, राजस्थान लोक सेवा आयोग. 
अध्यक्ष, राजस्थान राज्य बुनकर सहकारी संघ लिमिटेड.
अध्यक्ष, राजस्थान पर्यटन विकास निगम आरटीडीसी.
अध्यक्ष, राजस्थान राज्य किसान आयोग.
अध्यक्ष, अनुसूचित जाति आयोग.
उपाध्यक्ष, अनुसूचित जाति आयोग. 
अध्यक्ष, जोधपुर विकास प्राधिकरण. 
अध्यक्ष, राजस्थान राज्य बीज निगम. 
अध्यक्ष, पशु कल्याण बोर्ड.
अध्यक्ष, राज्य स्तरीय सलाहकार समिति श्रम विभाग.
उपाध्यक्ष, राजस्थान फाउंडेशन. 
अध्यक्ष, राजस्थान सफाई कर्मचारी आयोग.
अध्यक्ष, राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग.
अध्यक्ष, साहित्य अकादमी.
अध्यक्ष, उर्दू अकादमी. 
अध्यक्ष, संस्कृत अकादमी.
अध्यक्ष, भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी.
अध्यक्ष, राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी.
अध्यक्ष, राजस्थान ललित कला अकादमी.
अध्यक्ष, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी.
अध्यक्ष, राजस्थान सिंधी भाषा अकादमी.
अध्यक्ष, राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन.
अध्यक्ष, राजस्थान विकास परिषद. 
अध्यक्ष, राजस्थान राज्य हज कमेटी.
अध्यक्ष, राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक लिमिटेड.
सभापति, सार्वजनिक प्रन्यास मंडल. 
अध्यक्ष, जनजाति आयोग.
अध्यक्ष, सेंटर फॉर डेवलपमेंट. 
अध्यक्ष, सीनियर सिटीजन बोर्ड.
अध्यक्ष, क्षेत्रीय विकास बोर्ड.
अध्यक्ष, भूदान बोर्ड.
अध्यक्ष, युवा बोर्ड.
अध्यक्ष, माटी कला बोर्ड.
अध्यक्ष, लघु उद्योग विकास निगम.
अध्यक्ष, निशक्तजन आयोग.
अध्यक्ष, गौ सेवा आयोग.
अध्यक्ष, पशुपालक कल्याण बोर्ड. 
उपाध्यक्ष, पशु पालक कल्याण बोर्ड.
अध्यक्ष, मेला प्राधिकरण. 
अध्यक्ष, विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतू जाति कल्याण बोर्ड.
उपाध्यक्ष, राजस्थान राज्य खेल परिषद. 
इसके साथ ही प्रदेश में 14 नगर सुधार न्यास हैं.

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कार्यकर्ताओं को भी सरकार से बड़ी आस 
इधर कांग्रेस के संगठन में अलग-अलग पदों पर काम कर चुके नेताओं का कहना है की पार्टी को सरकार में लाने के लिए सभी लोग मिलकर संघर्ष करते हैं. कांग्रेस नेता सत्येंद्र भारद्वाज कहते हैं कि के नेताओं को पहले तो विधानसभा चुनाव में पार्टी के टिकट और उसके बाद में विधायकी के रूप में सरकार में हिस्सेदारी मिल चुकी है, लिहाजा अब संगठन से जुड़े लोगों को भी राजनीतिक नियुक्तियों में भागीदारी देने पर विचार करना चाहिए. पीसीसी के पदाधिकारी रहे सत्येंद्र भारद्वाज कहते हैं कि कार्यकर्ताओं को भी सरकार से बड़ी आस है, अगर सरकार विधायकों को एडजस्ट करना चाहती है तो बेशक किया जाना चाहिए लेकिन संगठन में काम करने वाले कार्यकर्ताओं की तरफ भी सरकार की नजरे इनायत होनी चाहिए.

वहीं, पीसीसी के पूर्व महासचिव रुपेश कांत व्यास ने कहा कि कार्यकर्ताओं की सरकार से बड़ी उम्मीदें हैं और आने वाले दिनों में उम्मीदें पूरी भी होंगी.

राजनीतिक नियुक्तियों में संगठन के लोगों को ज्यादा भागीदारी दी जाए या विधायकों को इसको लेकर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को करना है लेकिन उससे पहले कांग्रेस के सामने दो बड़े टास्क हैं.
पहला तो पीसीसी के संगठन की पुनरसंरचना करना, जिसमें कई नए चेहरों को भी शामिल किया जा सकता है और दूसरी चुनौती स्थानीय निकाय चुनाव की है. चुनाव से पहले पीसीसी के संगठन को मूर्त रूप देने की कोशिश गोविंद सिंह डोटासरा की इसलिए भी होगी क्योंकि तभी पदाधिकारी सक्रियता से चुनाव में काम कर सकेंगे.